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काम में आगे और फिटनेस के मामले में पीछे हैं भारतीय

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दरअसल काम करने के मामले में भले ही भारतीय सबसे आगे हों लेकिन फिटनेस और एक्टिव रहने के मामले में भारतीय सबसे पीछे हैं।
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अच्छी सेहत ही व्यक्ति के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होती है। कहा भी जाता है कि पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में हो माया। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अपनी सेहत को मेंटेन रखना एक चुनौती भरा काम है। ऐसे कितने ही लोग हैं जो सेहत पर सही से ध्यान नहीं देने के कारण कम उम्र में ही अपने जीवन से हाथ धो बैठते हैं। किसी भी देश के विकास के लिए सेहतमंद आबादी अपरिहार्य है। आज खाद्य पदार्थों में बढ़ती मिलावट और पूरे पैसे देने के बाद भी गुणवत्ता युक्त पदार्थ मिलना दूभर है। इसलिए ऐसी परिस्थिति में खानपान के संतुलन और पौष्टिकता का सवाल खड़ा होना लाजिमी है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में एक महत्वकांक्षी योजना फिट इंडिया मूवमेंट शुरू की है। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस के मौके पर देशभर में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना से देशवासी कितने फिट होंगे ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन उसके पहले यह जानना जरूरी है कि फिट इंडिया जैसे मूवमेंट की जरूरत क्यों है? और सेहत के मामले में भारतीयों की ताजा स्थिति क्या है?

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काम में आगे और फिटनेस के मामले में पीछे हैं भारतीय
दरअसल काम करने के मामले में भले ही भारतीय सबसे आगे हों लेकिन फिटनेस और एक्टिव रहने के मामले में भारतीय सबसे पीछे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के लोग सबसे कम फुर्तीले होते हैं और रोजाना औसतन भारतीय सिर्फ 6 हजार 553 कदम ही चलते हैं, जो इस स्टडी में शामिल सभी देशों के लोगों की तुलना में सबसे कम है। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और सिंगापुर सहित 18 देशों के लोगों के डेटा के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय नींद लेने के मामले में भी बहुत पीछे हैं। जापान के बाद भारतीय दूसरे नंबर पर हैं, जो सबसे कम नींद लेते हैं। भारतीय औसतन रात में 7 घंटे 1 मिनट ही सोते हैं।

आयरलैंड में लोग सबसे ज्यादा औसतन 7 घंटे 57 मिनट यानी करीब 8 घंटे सोते हैं। 18 देशों से जुटाए गए डेटा के आधार पर कहा गया है कि भारतीय दिन में औसतन 32 मिनट ही फुर्तीले रहते हैं। इतना ही नहीं, हॉन्ग कॉन्ग के लोगों की तुलना में भारतीय रोजाना 3600 कदम कम चलते हैं। ज्यादातर लोग जिम जाना तो शुरू करते हैं लेकिन लगातार जा नहीं पाते हैं। एक स्टडी के मुताबिक, पैदल चलने वाली महिलाओं के शरीर पर बेहद कम फैट होता है। इसका सबसे ज्यादा असर 40 से 60 की उम्र में देखने को मिलता है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल असोसिएशन के एक प्रयोग के मुताबिक, सुबह उठकर पैदल चलने वाले लोगों का मूड हर समय अच्छा बना रहा है और वे खुद को तरोताजा महसूस करते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 18 से 25 वर्ष के भारतीय औसतन रात में 12 बजकर 33 मिनट पर सोते हैं, वहीं बुजुर्ग इससे एक घंटे पहले ही सोने चले जाते हैं। भागदौड़ भरी जिंदगी और बदले लाइफस्टाइल की वजह से आज ज्यादातर लोग नींद न आने की समस्या से पीड़ित हैं।

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आमतौर पर भारत में ऐसा माना जाता है कि बच्चा जितना ज्यादा खाना खाता है वो बड़ा होकर उतना ही मजबूत बनता है।
आमतौर पर भारत में ऐसा माना जाता है कि बच्चा जितना ज्यादा खाना खाता है वो बड़ा होकर उतना ही मजबूत बनता है। ये बात सही भी है। यही वजह है कि बच्चों को दूध-दही खाने की हिदायत हमेशा ही दी जाती है। लोग कुछ महीने के बच्चे को तब तक खिलाते रहते हैं जब तक वो रो कर इसके लिए मना न कर दे। लेकिन इसके बावजूद भारतीय बच्चों को पूरी तरह से स्वस्थ होने का तमगा हासिल नहीं हो पाता। असल में होता ये है कि हद से ज्यादा खाने की आदत बच्चों को मोटापे की ओर ले जाती है। भारत के मुकाबले पश्चिमी देशों में तो हालात और भी ज्यादा खराब हैं। यहां फास्ट फूड खाने की वजह से बहुत से बच्चे इतने मोटे हो जाते हैं कि उन्हें इलाज करवाना पड़ता है। लोग समय से पहले ही मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। सुनकर हैरानी जरूर होती है लेकिन ये बात बिल्कुल सच है कि 14-15 साल के बच्चे भी हार्ट अटैक से मर रहे हैं। द लासेंट में छपी एक रिसर्च के मुताबिक, जापान में जन्मे बच्चे लंबे समय तक एक स्वस्थ जीवन जीते हैं और इसका सबसे बड़ा कारण है उनके खाने की आदत। इसका मतलब ये कि जापानी इतना पौष्टिक खाना खाते हैं कि बीमारियां उनसे दूर ही रहती हैं।

भारत में बढ़ रही है मोटापे की समस्या
दुनिया भर के विकसित और भारत जैसे विकासशील देशों में मोटापे की समस्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ जापान में लोगों में मोटापे की दर बहुत कम हो गई है। इसकी वजह जेनेटिक बदलाव नहीं है बल्कि खाने-पीने और दिनचर्या में बदलाव है। पूरी दुनिया जापान से खाने-पीने की कुछ अच्छी आदतें सीख सकती है। मोटापे से दूर रहने का ये मतलब नहीं है कि खाना ही छोड़ दें बल्कि लोगों को खाने में ऐसी चीजें जोड़नी चाहिए जिनमें अधिक कैलोरी न हो। जैसे एक जापानी मील में चावल, मीट या मछली का एक हिस्सा, और कई सारी सब्जियां शामिल होती हैं। जापानी खाना बनाते समय इस बात का ध्यान रखते हैं कि वो एक अच्छी मील में सब कुछ शामिल कर लें। यानी उसमें निश्चित मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन, फाइबर आदि आ जाएं। यही वजह है कि वो होल फूड खाना पसंद करते हैं। वजह ये है कि कटे हुए और प्रोसेस्ड खाने में काफी अधिक कैलोरी होती हैं।

भारत में हर तीसरा बच्चा कुरकुरे खाने की जिद करता है। असल में छोटे बच्चों की जो आदत डाली जाए वो वही खाना पसंद करते हैं। शुरू-शुरू में तो लोग बच्चों की बात मानते हैं लेकिन इसी वजह से उनकी आदत खराब हो जाती है और बड़े होकर वो जिद करने लगते हैं। वहीं जापान के लोग कम खाना पसंद करते हैं। इसके अलावा जब भी वो कोई स्नैक खाते हैं जिसमें ज्यादा कैलोरी हो तो उसके बाद तुरंत ही एक्सरसाइज भी कर लेते हैं। इसके अलावा जब भी किसी को वजन कम करना होता है उसे लोग हिदायत देते हैं कि सबसे पहले तो चावल खाना छोड़ दो। लोग ये काम करते भी हैं। लेकिन सच बात तो ये है कि जापान के खाने में चावल जरूर होता है और वो उसके साथ अलग-अलग सब्जियां और मछली खाते हैं। इससे चावल खाने के बाद जो भरे पेट जैसा महसूस होता है वो दिक्कत नहीं आती। उम्मीद है कि दुनिया भर के देश जापान से जरूर सीखेंगे। भारत में एक तरफ कुछ लोग अक्सर भूखे सोते हैं तो कुछ हद से ज्यादा खाकर अपना वजन बढ़ा रहे हैं। ऐसे में इस बात पर ध्यान देना बहुत जरूरी है कि हमारे देश के युवा मोटापे का शिकार न हों। खाने का वो हिस्सा अगर गरीबों को दे दिया जाए तो शायद समाज में एक संतुलन बना रहेगा।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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