इंदौर टेस्ट में टीम इंडिया अपने ही बनाए जाल में फंस गई और उसे एक शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। होलकर स्टेडियम में मात्र सवा दो दिन में ऑस्ट्रेलिया के हाथों 9 विकेटों से मिली हार को लंबे समय तक क्रिकेट प्रेमी नहीं भूल पाएंगे। दरअसल, टीम इंडिया ने ही इंदौर में स्पिनर्स के लिए मदद वाला ट्रैक मांगा था। घर में स्पिन गेंदबाजी पर अच्छी बल्लेबाजी का भ्रम भी भारतीय बल्लेबाजों ने इंदौर में तोड़ दिया।
जिस तरह टीम इंडिया के धुरंधर खिलाड़ियों ने ऑस्ट्रेलिया के स्पिन गेंदबाजों के आगे सरेंडर किया, वह आंखें खोलने वाला है। एक तरफ हमारे बल्लेबाज हताश, निराश और परेशान थे तो गेंदबाजी में भी वह धार नहीं दिखी। खासकर भारतीय स्पिनर्स. ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों जैसा कमाल नहीं दिखा सके।
इंदौर टेस्ट में हार के बाद निश्चित ही मैच की समीक्षा होगी। लगातार टेस्ट जीतते आ रहे कप्तान रोहित शर्मा को इस बात का आकलन करना होगा कि टॉस जीतकर उन्होंने पहले बल्लेबाजी क्यों की? क्या उन्हें अति आत्मविश्वास था कि हमारे बल्लेबाज एक बड़ा स्कोर इंदौर में खड़ा करेंगे और घूमती गेंदों पर मेहमान टीम कुछ खास नहीं कर पाएगी।
हालांकि, पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया का स्कोर भी बहुत अच्छा नहीं रहा था और उनकी पूरी टीम 197 रन बनाकर आउट हो गई। पहली पारी में भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और रविंद्र जड़ेजा ने 7 विकेट लिए। ऑस्ट्रेलिया को 88 रन की एक छोटी बढ़त मिली, लेकिन जैसे ही दूसरी पारी शुरू हुई, भारतीय बल्लेबाजों ने पहली पारी से हल्का सा अच्छा प्रदर्शन करते हुए 163 रनों पर खेल खत्म कर लिया।
दूसरी पारी में भी पांच भारतीय बल्लेबाज सिंगल डिजिट स्कोर को पार न कर सके। थोड़ा बहुत संघर्ष चेतेश्वर पुजारा ने किया और उन्होंने 59 रनों की पारी खेली। ऑस्ट्रेलिया के 'कुख्यात स्पिनर' नाथन लायन ने दोनों पारियों में 11 विकेट लिए और मैन ऑफ द मैच रहे।
ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए मात्र 76 रनों का टारगेट मिला। मेहमान टीम जब दूसरे दिन का खेल खत्म होने पर होटल जा रही थी तो उसके चेहरों पर मुस्कान थी, क्योंकि वह जानती थी कि 76 रन एक छोटा टारगेट है और घर में भारतीय टीम अपना आत्मविश्वास खो चुकी है। मैच के तीसरे दिन सुबह-सुबह ही ऑस्ट्रेलिया ने बिना किसी बड़े संघर्ष के मात्र 18.5 ओवर्स में 78 रन बनाकर इंदौर टेस्ट अपने नाम कर लिया, वो भी केवल एक विकेट गंवाकर।
शर्मनाक हार के बाद भारतीय कप्तान रोहित शर्मा इस बात को स्वीकार भी कर रहे हैं कि स्पिनर्स के लिए अनुकूल पिच पर पहले बैटिंग का फैसला पूरी टीम का था। सभी को पता था कि इस पिच पर खेलना आसान नहीं होगा, लेकिन टीम इस चुनौती के लिए तैयार थी।
वैसे, भारत का घर में टेस्ट रिकॉर्ड बहुत शानदार रहा है। पिछले 10 सालों में यह तीसरी बार है, जब किसी मेहमान टीम ने हमसे टेस्ट मैच जीता है। इंदौर टेस्ट से पहले, वर्ष 2017 में पुणे टेस्ट को भी ऑस्ट्रेलिया ने जीता था, जबकि वर्ष 2021 में इंग्लैंड के हाथों हमें चेन्नई में हार मिली थी। स्टीव स्मिथ एकमात्र ऐसे कप्तान हैं, जिन्होंने 10 साल में दो बार भारत को भारत की धरती पर टेस्ट मैच हराया है।
इंदौर पिच की, मैच के पहले ही दिन आलोचना शुरू हो गई थी। विशेषज्ञ तो यहां तक कहने लगे थे कि मैच रद्द कर दिया जाना चाहिए। वैसे, खराब पिच के कारण इंटरनेशनल क्रिकेट में पहले भी 3 अवसर ऐसे रहे हैं, जब मैच रद्द हो गया था।
वर्ष 1997 में भारत और श्रीलंका का वनडे मैच इंदौर में ही रद्द हुआ था, क्योंकि पिच में असीमित उछाल था, खिलाड़ी घायल होने लगे थे। 1998 में वेस्टइंडीज और इंग्लैंड का टेस्ट मैच असामान्य उछाल के कारण रद्द हुआ था। वहीं 2009 में दिल्ली में भारत और श्रीलंका के वनडे में पिच पर असामान्य उछाल और गेंद में गति देखी गई, इस मैच को भी रद्द कर दिया गया था।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को इंदौर पिच की समीक्षा करनी चाहिए। हालांकि, यह पहला अवसर नहीं था, जब किसी टीम ने अपने अनुसार पिच में बदलाव कराया हो। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमें इसके लिए मशहूर हैं, लेकिन इंदौर में टीम इंडिया का दांव उस पर ही उल्टा पड़ेगा, यह आश्चर्य में डालने वाला है।
यदि इंदौर टेस्ट टीम इंडिया जीत जाती तो वह वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंच जाती। अब उसका इंतजार लंबा हो गया है। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की प्वाइंट टेबल में टीम इंडिया के 60.29% प्वाइंट हैं, जबकि इंदौर में शानदार जीत दर्ज करने वाली ऑस्ट्रेलिया 68.52% के साथ टॉप पर है।
अब सबकी निगाहें 9 मार्च से अहमदाबाद में शुरू हो रहे मौजूदा बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के चौथे टेस्ट पर हैं। यह टेस्ट जीतकर टीम इंडिया सीधे वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंच सकती है, बशर्ते इंदौर जैसी गलती न दोहराई जाए। निश्चित ही टीम इंडिया अहमदाबाद में पिच को लेकर अति सतर्क रहेगी और बल्लेबाजों को मदद देने वाला ट्रैक तैयार कराएगी। अहमदाबाद में भी इंदौर वाली प्लेइंग इलेवन के रहने की उम्मीद है। टॉस जीतकर वहां भी टीम इंडिया को पहले बल्लेबाजी करनी चाहिए। चौथे टेस्ट में चेतेश्वर पुजारा और रविंद्र जड़ेजा पर विशेष निगाहें भी रहेंगी, क्योंकि गुजरात इनका गृह राज्य है।
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