पुणे में मराठा आंदोलन और उपद्रवी
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संविधान से कितना सीखा नागरिकों ने
आपातकाल के तानाशाही और लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने वाले दौर में शायद यह एकमात्र अच्छा कदम था, लेकिन आज हम कह सकते हैं कि यह कदम भी देश के नागरिकों में कर्तव्य-भावना का विकास करने में विफल रहा। लोकतान्त्रिक अधिकार-बोध तो लोगों में तीव्र से तीव्रतर होता गया गया है, लेकिन मौलिक कर्तव्यों के अनुपालन की कोई भावना उनमें अबतक पैदा नहीं हो सकी है। आए दिन जहां-तहां लोग आचार और विचार दोनों ही प्रकार से जाने-अनजाने मौलिक कर्तव्यों की धज्जियां उड़ाते रहते हैं।
उदाहरण के तौर पर उल्लेखनीय होगा कि दसवां मौलिक कर्तव्य कहता है कि नागरिक सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहें। बात-बात पर मरने-मारने की बात करने वाले लोग हिंसा से कितने दूर हैं, ये तो खैर सामने ही है। अब बात सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखने की करें तो इसके लिए रेलवे से बेहतर उदाहरण नहीं हो सकता। अक्सर रेलगाड़ियों में सुविधाओं की कमी का रोना रोने वाले लोगों को जब सुविधाओं से युक्त गाड़ियां मिलती हैं,तो वे क्या करते हैं, इसकी बानगी इन आंकड़ों से मिल जाती है।
रेलवे और सरकारी संपत्ति को नुकसान
एक अज्ञात रेलवे अधिकारी के हवाले से गत दिनों कई अखबारों की सुर्खियां बनें इस आंकड़े के मुताबिक़ पिछले वित्त वर्ष में देशभर की ट्रेनों के एसी कोचों से करीब 21,72,246 बेडरॉल सामान गायब हो गए हैं, जिनमें 12,83,415 तौलिए, 4,71,077 चादर, 3,14,952 तकिए का गिलाफ, 56,287 तकिए और 46,515 कंबल शामिल हैं। यहां ध्यान देने वाली बात है कि ये सब वातानुकूलित कोचों से गायब हुए हैं, जिनमें प्रायः देश का संपन्न और शिक्षित माना जाना वाला वर्ग ही सवारी करता है। इस स्थिति पर अब और अधिक क्या कहा जाए!
अभी हाल ही में पुणे से मुंबई के बीच चलने वाली प्रगति एक्सप्रेस को नई और बेहतर सुविधाओं से लैस किया गया था, लेकिन ये सुविधाएं यात्रियों को रास नहीं आईं। ट्रेन के बाथरूम से टोटियां और शीशें तक गायब होने लगे। ये एक उदाहरण है। पड़ताल करेंगे तो ऐसे अनेक प्रकार के उदाहरण मिलेंगे जो बात-बात पर देशप्रेम का दावा करने वाले नागरिकों की देश के प्रति कर्तव्य-भावना की कलई खोलते हैं। अधिक क्या कहें, लोगों में कर्तव्य-भावना का शून्य होना ही तो कारण है कि आज घर-बाहर सफाई रखने के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए भी सरकार को पहल करनी पड़ रही है।
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