कांग्रेस के लिए मप्र की राहें आसान नहीं है।
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गुजरात की ट्रेनिंग एमपी में
गुजरात विधानसभा चुनाव ने राहुल गांधी और उनकी पार्टी को एक नई दिशा दी है, इसे भाजपा और संघ के खिलाफ काउंटर नैरेटिव तो नहीं कहा जा सकता लेकिन इसने राहुल और उनकी पार्टी को मुकाबले में वापस आने में मदद जरूर मिली है। मध्य प्रदेश में भी पिछले कुछ महीनों के अपने चुनावी अभियान के दौरान वे ध्यान खीचने कामयाब रहे हैं जिसमें प्रदेश की जनता के अलावा प्रदेश के कई सीनियर पत्रकार भी शामिल हैं। पहले राहुल गांधी का भाषण मुख्य रूप राष्ट्रीय मुद्दों और मोदी सरकार को निशाना बनाने पर ही फोकस रहता था जिसकी वजह से उनके भाषण स्थानीय लोगों को कनेक्ट नहीं कर पाते थे. लेकिन अब वे लोकल मुद्दों पर ज्यादा जोर देते हुए नजर आ रहे हैं.
क्या मप्र में सत्ता वापसी करेगी कांग्रेस
पिछले 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस को इस बार मध्य प्रदेश में माहौल अपने अनुरूप लग रहा है, लेकिन राह आसान भी नहीं है। मंदसौर में किसान आंदोलन मुद्दा, भ्रष्टाचार और व्यापमं जैसे मसले पर चुनाव जीतने का सपना पाल रही है, लेकिन पार्टी के अंदरखाने की गुटबाजी बाधा बन सकती है। इधर, बसपा से गठबंधन का न हो पाने को भी कांग्रेस अपने लिये प्लस पॉइंट के रूप में देख रही है। कांग्रेस को लगता है कि इससे स्वर्ण मतदाता उसकी तरफ वापसी कर सकते हैं. लेकिन जमीन पर ऐसा है नहीं। राहुल के चुनावी अभियान के उमड़ने वाली भीड़ का वोट में तब्दील होना इतना भी आसान नहीं है।
प्रदेश में बीजेपी की स्थिति
इधर बात यदि बीजेपी की करें तो इस बात में कोर्इ राज्य में पार्टी की जड़ें मजबूत है। शिवराज की लोकप्रियता में कमी नहीं आर्इ है। पार्टी के कार्यकर्ता बढ़े हैं और वे मेहनत भी कर रहे हैं। इस सबकी तुलना में कांगेस के लिए जमीन पर हालात अब भी कठिन हैं। कार्यकर्ताओं में वैसा जोश और उत्साह नहीं है जो होना चाहिए। राहुल के बयान उनमें जोश भरते हैं, लेकिन अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष की गलतियां निराश भी करती हैं।
इधर बीजेपी में प्रदेश में अब भी पीएम नरेंद्र मोदी की चुनावी सभाओं में कमी की गई है। इसी तरह से अमित शाह भी यहां उतने सक्रिय दिखाई नहीं पड़ रहे हैं जितना दावा किया जा रहा है। पहले बताया गया था कि विधानसभा के दौरान वे मध्यप्रदेश में ही कैम्प करेंगें, लेकिन अंत में ऐसा कुछ नहीं हुआ। राज्य में भाजपा के चुनाव प्रचार अभियान में भी केंद्र की उपलब्धियां पर ना के बराबर ही फोकस किया जा रहा है।
बहरहाल, भाजपा की तरफ से फ्रंट पर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ही नजर आ रहे हैं, जिन्होंने लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के लिये अपने आप को पूरी तरह से झोंक दिया है. लेकिन इस बार उनका रास्ता आसान नहीं है।
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