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न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ का रिटायरमेंट और फैसले: न्याय व्यवस्था पर दीर्घकाल तक रहेगा प्रभाव

सार

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ का कार्यकाल उन्हें भारतीय न्यायिक इतिहास में एक परिवर्तनकारी प्रधान न्यायाधीश के रूप में स्थापित करेगा, जिनका न्यायिक विशेषज्ञता और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति दृष्टिकोण भारत के संवैधानिक ढांचे को सशक्त करेगा।
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न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने संविधान की व्याख्या करते समय हमेशा इसके मूल सिद्धांतों, जैसे समानता, स्वतंत्रता, और सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दी। - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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न्यायमूर्ति धनंजय वाई. चंद्रचूड़ सेवा निवृत्त हो गए हैं, मगर उनके निर्णयों ने भारतीय न्याय व्यवस्था को जो दिशा दी है उससे आने वाले समय में उनकी विरासत का प्रभाव और भी गहरा होगा। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ का कार्यकाल उन्हें भारतीय न्यायिक इतिहास में एक परिवर्तनकारी प्रधान न्यायाधीश के रूप में स्थापित करेगा, जिनका न्यायिक विशेषज्ञता और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति दृष्टिकोण भारत के संवैधानिक ढांचे को सशक्त करेगा। वह समकालीन भारत में सबसे प्रभावशाली न्यायिक व्यक्तित्वों में से एक माने जाते हैं। उनके कार्यकाल की विशेषता संवैधानिक मूल्यों और मानवाधिकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, न्यायिक सुधारों की दिशा में उनके नेतृत्व, और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी बनाने के प्रयासों से है।  

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संवैधानिक मूल्यों और अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की संवैधानिक मूल्यों और अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता गहरी थी। उन्होंने हमेशा संविधान की सर्वोच्चता, मानवाधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उनके दृष्टिकोण में न्याय और समानता के सिद्धांतों का पालन करना, विशेष रूप से गरीबों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना, एक प्रमुख पहलू था।

दरअसल, उन्होंने संविधान की व्याख्या करते हुए समाज के समग्र कल्याण को ध्यान में रखा, जिससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जनहित में फैसले लेने की उनकी प्रतिबद्धता प्रकट हुई। चंद्रचूड़ ने अपने निर्णयों में हमेशा नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता दी। वह हमेशा समानता के अधिकार को सशक्त बनाने के पक्षधर रहे।

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न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने संविधान की व्याख्या करते समय हमेशा इसके मूल सिद्धांतों, जैसे समानता, स्वतंत्रता, और सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दी। वह मानते थे कि संविधान एक जीवित दस्तावेज है, जो समय और समाज की जरूरतों के अनुसार विकसित होता है। उनके निर्णयों में भारतीय समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता को सम्मान देने की एक स्थायी भावना रही। उन्होंने हमेशा धर्मनिरपेक्षता और समाज में सामूहिक सद्भावना को बढ़ावा दिया।  
 

समलैंगिकों के अधिकार का संरक्षण

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ का नवतेज सिंह जौहर बनाम भारत संघ (2018) में भी महत्वपूर्ण योगदान था। जहां उन्होंने भारतीय दंड संहिता की धारा-377 को समाप्त किया, जिससे सहमति से समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया। यह निर्णय समलैंगिक समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक जीत थी, जिसने समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सिद्धांतों को मजबूती से स्थापित किया।

न्यायिक सुधार और दक्षता

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने भारतीय न्यायिक प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए। उनके नेतृत्व में कई नवाचारों को स्वीकार किया गया जिससे न्याय व्यवस्था को जनता के लिए और अधिक कार्यकुशल बनाया गया। उनके कार्यकाल में सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का डिजिटलाइजेशन शुरू हुआ ताकि आम आदमी भी फैसलों को देख सकें। उन्होंने न्यायिक भाषा की सरलता पर जोर दिया।

उनका मानना था कि जिन लोगों के बारे में न्यायिक फैसले होते हैं वे उनको समझ नहीं पाते और समझने के लिये फिर उन्हें सहायता की आवश्यकता होती है। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने ई-फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई और ऑनलाइन केस मैनेजमेंट सिस्टम की दिशा में अहम पहल की।

कोविड-19 महामारी के दौरान, जब भौतिक कोर्ट में सुनवाई संभव नहीं थी, तब उनके नेतृत्व में इन डिजिटल प्रणालियों का कार्यान्वयन हुआ, जिससे न्यायपालिका ने संकट के दौरान भी कार्य करना जारी रखा। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू करने का समर्थन किया। यह कदम न्यायपालिका की पारदर्शिता को बढ़ाने और जनता की पहुँच को सुनिश्चित करने के लिए था। इसके परिणामस्वरूप अदालत की कार्यवाही अब अधिक सार्वजनिक और उत्तरदायी बन गई।

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चंद्रचूड़ ने न्यायालयों में समानता को बढ़ावा दिया और हाशिए पर रहने वाले समुदायों (जैसे दलित, आदिवासी, महिलाएं, और अन्य कमजोर वर्ग) के अधिकारों की रक्षा की। - फोटो : अमर उजाला

न्याय तक पहुंच आसान बनाने का प्रयास

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की ये पहलें न्याय तक पहुंच को आसान और सुलभ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुईं। उनका उद्देश्य था कि न्याय केवल अदालतों में ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक के लिए सुलभ और सकारात्मक रूप से उपलब्ध हो। उन्होंने प्रत्येक नागरिक को शीघ्र और सुलभ न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके लिए न्यायालयों के कामकाज में सुधार के लिए कदम उठाए, जिससे लंबित मामलों की संख्या को घटाया जा सके और न्याय की गति को तेज किया जा सके।

चंद्रचूड़ ने न्यायालयों में समानता को बढ़ावा दिया और हाशिए पर रहने वाले समुदायों (जैसे दलित, आदिवासी, महिलाएं, और अन्य कमजोर वर्ग) के अधिकारों की रक्षा की। उनके द्वारा दिए गए फैसलों में इन समुदायों के अधिकारों का उल्लंघन रोकने के लिए कई उपाय किए गए। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि सभी को न्याय तक समान पहुंच मिले, और किसी भी व्यक्ति को भेदभाव या असमानता का सामना न करना पड़े।

मौलिक और महिला अधिकारों का सम्मान

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ का भारतीय संवैधानिक कानून में सबसे महत्वपूर्ण योगदान के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017) मामले में था। इस निर्णय में उन्होंने गोपनीयता के अधिकार को संविधान के तहत मौलिक अधिकार के रूप में स्थापित किया। चंद्रचूड़ ने महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक समानता की रक्षा करने वाले कई ऐतिहासिक फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बिजो इमैनुएल बनाम केरल राज्य (2018) में, उन्होंने धार्मिक विश्वासों के आधार पर राष्ट्रगान गाने से इनकार करने के अधिकार को बरकरार रखा, जो धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा में एक महत्वपूर्ण कदम था। 

इसके अलावा उन्होंने महिलाओं के धार्मिक स्थानों में प्रवेश के अधिकार का समर्थन किया और लिंग आधारित भेदभाव को चुनौती दी। अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020) में इंटरनेट शटडाउन और विरोध के अधिकार पर उनके द्वारा दिया गया फैसला लोकतंत्र की मूलभूत स्वतंत्रताओं की रक्षा करता है। इस निर्णय ने यह स्थापित किया कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना न्यायपालिका का कर्तव्य है, विशेषकर डिजिटल युग में।  


प्रेस की स्वतंत्रता और न्यायिक स्वायत्तता

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले दिये जो मीडिया की स्वतंत्रता और पत्रकारों के अधिकारों को सुरक्षित रखने में सहायक रहे। उन्होंने हमेशा प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का मूल स्तंभ माना और इसे संविधान द्वारा प्रदत्त स्वतंत्रता के अधिकार के तहत सुरक्षित किया। उन्होंने सरकार और अन्य संस्थाओं द्वारा मीडिया पर लगाए गए दबाव और सेंसरशिप के खिलाफ कई महत्वपूर्ण निर्णय दिए। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने उन मामलों में मीडिया के अधिकारों का बचाव किया, जहां समाचारों और रिपोर्टों को नियंत्रित या रोकने की कोशिश की जा रही थी।

चंद्रचूड़ ने कई बार प्रेस की स्वतंत्रता को संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत व्यक्तिगत और सामूहिक स्वतंत्रता के अधिकार से जोड़ा, जो कि नागरिकों को बोलने और विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है।  

न्यायमूर्ति चंद्रचूड के प्रमुख निर्णय और फैसले

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं, जो भारतीय कानूनी परिदृश्य में स्थायी रूप से दर्ज हो गए हैं। एक जज और प्रधान न्यायाधीश के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान चंद्रचूड़ संविधान पीठ के फैसलों सहित 700 से अधिक फैसलों में शामिल रहे हैं, जिनमें से कई को उन्होंने लिखा और कुछ में उन्होंने असहमति जताई तो कुछ में सहमति भी व्यक्त की।

प्रधान न्यायाधीश के रूप में, वह 18 संविधान पीठों के फैसलों का हिस्सा थे। वह 104वें संशोधन अधिनियम 2019 को चुनौती देने वाली पीठ का भी हिस्सा थे, जिसने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के लिए प्रदान किए गए आरक्षण को और 10 साल के लिए बढ़ा दिया।

अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के फैसले (2019) में न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ ने विशेष रूप से अपनी असहमतिपूर्ण राय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जबकि पीठ के बहुमत (जिसमें मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस.ए. बोबडे, एन.वी. रमना और अन्य शामिल थे) ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट के पक्ष में फैसला सुनाया और विवादित भूमि को राम मंदिर के निर्माण के लिए हिंदुओं को दे दिया लेकिन न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर असहमति जताई।

विशेष रूप से संपत्ति विवादों को नियंत्रित करने वाले कानूनी सिद्धांतों और धर्म और कानून के बीच संबंधों के मुद्दे पर राय दी। उन्होंने जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे की समाप्ति पर असहमति व्यक्त की और इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और परामर्शात्मक बनाने की आवश्यकता जताई।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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