क्या आपने कभी घास पर नंगे पांव चलते हुए अप्रत्याशित शांति महसूस की है? क्या आपने गौर किया है, जब आप समुद्र की लहरों के किनारे होते हैं, तो कैसे तनाव कम होने लगता है? यदि ऐसा महसूस किया है, तो शायद आपने अनजाने में खुद को धरती से जोड़ लिया है, यानी ‘ग्राउंडिंग’ की है। ग्राउंडिंग, या अर्थिंग का अर्थ है अपने शरीर को सीधे धरती की सतह से जोड़ना। हमारे पूर्वज बिना जूतों के धरती पर चलते थे, अनजाने में ही उन्होंने ‘इस चलन’ को अपना लिया था। लेकिन आजकल घरों में मैट, सड़कें, और यहां तक जूते की वजह से हम धरती से कम जुड़ पाते हैं।
कहा जाता है कि ग्राउंडिंग से तनाव कम होता है, मूड बेहतर होता है, और दर्द में राहत मिलती है। लेकिन अभी इसके फायदों के बारे में पक्के सबूत कम हैं। आजकल सोशल मीडिया रील्स के जरिये ग्राउंडिंग से जुड़े कई उत्पादों की बात हो रही है, जैसे ग्राउंडिंग मैट या बेडशीट, जो अच्छी नींद का दावा करते हैं। क्या यह वाकई सेहत के लिए बेहतर है? मानव शरीर बिजली का संवाहक है, यानी यह पृथ्वी और कृत्रिम स्रोतों के साथ बिजली का आदान-प्रदान कर सकता है।
ग्राउंडिंग के समर्थक कहते हैं कि यह अभ्यास शरीर को धरती के प्राकृतिक और सूक्ष्म सतही विद्युत आवेश से पुन: जोड़ता है। वे मानते हैं कि इससे शारीरिक व मनोवैज्ञानिक लाभ होता है। ग्राउंडिंग आपकी नींद को बेहतर बना सकती है या नहीं, यह जानने के लिए अभी शोध हो रहे हैं।
वर्ष 2025 में कोरिया में हुए एक अध्ययन में 60 लोगों को दो समूहों में बांटा गया। एक को ग्राउंडिंग मैट दी गई और दूसरे को बिना ग्राउंडिंग वाली मैट दी गई। स्लीप ट्रैकर के माध्यम से मापने पर पता चला कि ग्राउंडिंग मैट वाले लोग औसतन ज्यादा देर तक सोए। लेकिन नींद की गुणवत्ता, दिन में नींद आना या तनाव में, दोनों समूहों में कोई खास फर्क नहीं दिखा। अनिद्रा के मामले में ग्राउंडिंग समूह को थोड़ा फायदा हुआ, लेकिन यह फर्क पहले से ही मौजूद था, तो यह साफ नहीं है कि ग्राउंडिंग का असर था या नहीं।
वर्ष 2019 के एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग तीव्र व्यायाम के बाद ग्राउंडिंग मैट पर सोए, उन्हें कम दर्द हुआ और खून में सूजन के स्तर कम थे। पर लंबे समय तक ट्रेनिंग पर इसका असर अभी साफ नहीं है। ग्राउंडिंग मैट आजमाने में कोई हर्ज नहीं। लेकिन घास पर नंगे पैर चलना मुफ्त है! भले ही ग्राउंडिंग से नींद बेहतर होने के पक्के सबूत न हों, लेकिन बाहर समय बिताने से सूरज की रोशनी आपकी नींद, मूड, और जैविक घड़ी को बेहतर कर सकती है। हालांकि अपनी सेहत का ध्यान रखने के लिए हमेशा चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है।
-साथ में चार्लोट गुप्ता (द कन्वर्सेशन से)