एचआईवी संक्रमण का खतरा
- फोटो : Adobe Stock
क्यों बढ़ रहे हैं संक्रमण के मामले?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पड़ोसी देशों-म्यांमार और बांग्लादेश से बड़े पैमाने पर शरणार्थियों की आवक भी कुछ हद तक इस संक्रमण के लिए जिम्मेदार है। वर्ष 2021 में म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के बाद वहां से करीब 40 हजार शरणार्थी सीमा पार कर मिजोरम के विभिन्न इलाकों में रह रहे हैं।
राज्य सरकार समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाती रही है। लेकिन इसका कोई खास असर नहीं हो सका है। राज्य की दुर्गम भौगोलिक बसावट के कारण हर जगह जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। नजदीकी शहर में इसकी सुविधा नहीं होने की वजह से भी कई लोग दूर-दराज के शहरों तक जाकर जांच कराने से बचते हैं।
डा. राल्ते बताते हैं कि इस संक्रमण से जुड़े सामाजिक कलंक को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इससे निपटने के लिए अब सेल्फ टेस्टिंग किट बाजार में उतारा है। इससे कोई भी व्यक्ति घर बैठे संक्रमण की जांच कर सकता है।
संक्रमण बढ़ने का हो सकता है खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि देरी से जांच की वजह से दूसरे लोगों में भी संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता है। इसी वजह से सेल्फ टेस्टिंग किट बाजार में उतारने का फैसला किया गया ताकि लोग घर बैठे बीमारी की जांच कर सकें। उसके बाद उनका इलाज शुरू किया जा सकेगा। इसका इस्तेमाल काफी आसान है। लार या खून के नमूने से ही संक्रमण का पता लगाया जा सकता है। इस जांच का नतीजा मिनटों में पता चल जाता है। डा. राल्ते के मुताबिक, कई देशों में यह तरीका आजमाया जा रहा है और वहां इससे संक्रमण का पता लगाने में सहूलियत हुई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे गंभीर बात यह है कि इस संक्रमण की चपेट में आने वाले ज्यादातर लोग युवा ही हैं। सेल्फ टेस्टिंग किट से संक्रमित मरीजों की सही तादाद का पता तो जरूर लगाया जा सकता है। लेकिन उनको इलाज केंद्रों तक पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है।
------------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।