टू वीमेन नॉवेल (सांकेतक)
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सामाजिक यथार्थ का उपन्यास ‘टू वीमेन’ कहता है, बात नहीं करने से बात समाप्त नहीं होती है। जब मोरोक्को सैनिकों ने रोजेट्टा का बलात्कार किया, उसकी इच्छा शक्ति कुचल गई, उसी समय एक अनजान चीज उसके शरीर में आग की तरह घुस गई, अब वह उससे जल रही थी। अब वह जल रही थी ताकि उसके अरस्ते में आने वाले सारे आदमी उसे मोरोक्को सैनिकों की तरह बरतें। वह मां से कहती है, ‘मैं संभोग करना चाहती हूं क्योंकि यही एक चीज अहि जो मुझे पसंद है, यौन-क्रिया करने का मेरा मन करता है।’
मां जब रोजेट्टा को आदमियों के पास जाने से रोकना चाहती है वह बिल्कुल नहीं सुनती है। एक अन्य स्त्री कोन्सेटा कहती है, ‘एक मां का अधिकार है, वह जो चाहती है उसके लिए बेटी को मना करे। लेकिन क्या बेटी का भी यह अधिकार नहीं कि जिसे वह चाहे उसके साथ जाए?’...हम माताओं को समझना चाहिए और माफ कर देना चाहिए।’
युद्ध क्या करता है? मोराविया के अनुसार, युद्ध सदा साहसियों, नि:स्वार्थियों, ईमानदार को नष्ट करता है। कुछ मारे जाते हैं, कुछ रोजेट्टा की तरह गूंगे बना दिए जाते हैं। दूसरी ओर सबसे बुरे, स्वार्थी लोग जिनके पास न साहस होता है, न धर्म, न गर्व होता है, वे हत्या करते हैं, चोरी करते हैं। ये सुरक्षित निकल आते हैं, और यहां तककि पहले से और अधिक निर्लज तथा भ्रष्ट हो जाते हैं। (पेज 345) वह जीती चली जाती है। जीवन मृत्यु से प्रमुख है, यह उसे कभी पता नहीं चलता है। वह मरना चाहती है, कैसे बचती है, क्यों बचती है, यह बताना मेरा काम नहीं है। आप खुद पेज 340-341 पढ़ कर देखें।
ग्यारह अध्याय में विभाजित 1957 में लिखे उपन्यास का 1958 में प्रकाशित अंगस डेविडसन का इंग्लिश संस्करण मेरे पास है। प्रसिद्ध एल्बर्टो मोराविया ने तपेदिक से जूझते हुए ‘टाइम ऑफ इनडिफरेंस’, ‘द फैंसी ड्रेस पार्टी’, ‘द वूमन ऑफ रोम’, ‘टू अडोलसेंट्स’, ‘ए घोस्ट एट नून’, ‘दि एम्टी कैनवास’, ‘द लाई’, ‘टाइम ऑफ डेसक्रेशन’ तथा कई कहानियों जैसी कई उत्कृष्ट रचनाएं कीं। अपने युद्ध काल के अनुभवों पर आधारित यह उपन्यास वे एक सकारात्मक नोट पर समाप्त करते हैं।
यात्रा में हुई घटनाओं के बाद रोती हुई रोजेट्टा को देख कर सिसेरा को अचानक पक्का विश्वास होता है, रोजेट्टा मूल रूप में परिवर्तित नहीं हुई है, साथ ही रोजारियो के पैसे चुराने के बावजूद वह खुद भी नहीं बदली है। उसने चैन अनुभव किया, इस आश्वासन से उसके मन में विचार आया, ‘ज्योंहि मैं रोम पहुंचूगी, मैं इस रकम को रोजारियो की मां को लौटा दूंगी।’ बिना कुछ कहे वह रोजेट्टा की बांह-में-बांह डाल देती है और उसका हाथ कस कर थाम लेती है।
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