30 पुरस्कारों से लैस मुंबई में जन्मी जोया अख्तर कहानी कहने की उस्ताद हैं। वे रुपहले परदे पर कहानी कहती हैं। उन्होंने 10 फिल्में निर्देशित की हैं। 17 फिल्में प्रड्यूस भी हैं और क्यों न हों वे ऐसी? उनका पूरा परिवार साहित्य और फिल्म से जुड़ा हुआ है। पिता जावेद अख्तर जाने-माने गीतकार, स्क्रीनप्ले राइटर, भाई फरहान अख्तर भी फिल्मों से जुड़े हुए हैं।
उनकी पहली फिल्म ‘लकी बाई चान्स’ (2009) बहुत गैलमरस नहीं थी, पर उसका दर्शकों के बीच स्वागत हुआ। हालांकि इसके पहले पहले जोया ने 2004 में ‘नर्गिस’ बनाने का प्रयास किया। मगर वह बेल कभी मेढ़े न चढ़ सकी। पहली फिल्म का स्क्रीनप्ले उन्होंने अपने पिता एवं अतर नवाज के साथ मिल कर लिखा। नायक अपने भाई को बनाया, नायिका सोना मिश्रा के रूप में कोंकणा सेन शर्मा को रखा, साथ में हैं ऋषि कपूर,संजय कपूर, हृतिक रोशन, जूही चावला, डिम्पल कपाडिया, अली खान भी ।
फिल्म से 8 पुरस्का झोली में आए, जिसमें फिल्मफेयर का सर्वोतम नव-निर्देशक एवं भारत का अनुअल सेंट्रल यूरोपियन बॉलीवुड अवार्ड्स भी शामिल हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसे ‘ए बॉलीवुड सटायर’ की संज्ञा दी है।
फिल्म ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’
दो साल बाद 2011 में जोया ने ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ का निर्देशन किया। ढाई घंटे की इस फिल्म ने 35 पुरस्कार जीते। इस बार स्क्रीनप्ले लिखा भाई फरहान अख्तर एवं रीमा काग्टी के साथ मिल कर औरअभिनेता हैं, ऋतिक रोशन, फरहान अख्तर एवं अभय देओल। वैसे कटरीन कैफ, नसीरुद्दीन शाह, दीप्तिनवल, कल्की कोचलिन, भी यहां हैं।
यह रोड मूवी युवाओं एवं एन.आर. आई को ध्यान में रख कर बनाई गई है। जहां स्पेन के एक्जोटिक लोकेशन, बैचलर पार्टी, सी डाइविंग, टमाटर फेस्टिवल, पीना-पिलाना,रोमांस, एडवेंचर भरपूर हैं। तीनों दोस्तों की केमिस्ट्री अच्छी तरह काम करती है। दर्शक बार-बार इस फिल्म को देखने गया।
2013 की ‘बॉम्बे टाकीज’ चार कहानियां (‘शीला की जवानी’, ‘स्टार’, ‘अजीब दास्तान है’ तथा ‘मुरब्बा’) समेटे हुए है। जोया अख्तर ने ‘शीला की जवानी’ का निर्देशन किया है। चारों में इसे सबसे बढ़िया कह सकते हैं। अभिनेत्री कटरीन कैफ से प्रेरित विक्की (नमन जैन) डॉन्सर बनना चाहता है, कटरीना उसे अपने स्वप्न को चुपचाप पूरा करने की सलाह देती है।
अधिकांश पिताओं की तरह उसके पिता इसके खिलाफ हैं पर उसकी बहन काव्या (खुशी दुबे) उसे बढ़ावा देती है। वास्तविकता को जादुई तरीके से प्रस्तुत करना इस फिल्म की यूएसपी है। भाई-बहन की कैमेस्ट्री अच्छी जेल करती है। जोया की कई फिल्में दो-दो साल के अंतराल पर आई हैं।
‘दिल धड़कने दो’
2015 की फिल्म भी उन्होंने जावेद अख्तर एवं रीमा काग्टी के साथ मिलकर लिखी है। करीब तीन घंटे उनकी निर्देशित फिल्म ‘दिल धड़कने दो’ में मेहरा परिवार शादी की 30वीं वर्षगांठ मना रहा है। अभिनय किया है, अनिल कपूर (कमल मेहरा), शेफाली शाह (नीलम मेहरा), प्रियंका चोपड़ा (आयशा अली), रनवीर सिंह (कबीर मेहरा) राहुल बोस, फरहान अख्तर, आमीर खान, अनुष्का शर्मा, ज़रीन बहाव, विक्रांत मैसी आदि ने।
शहरी दर्शकों को लुभाने वाली फिल्म ने 10 पुरस्कार बटोरे। क्रूज पर परिवार एवं दोस्तों के साथ 10 दिन-रात रहना आसान नहीं है। इस करोड़पति बाहर से सुखी दीखते परिवार का अंतर्जगत इतना न तो सुखी है और न ही इतना कूल एवं शांत। कॉमेड और मसाला फिल्म पर बॉलीवुड का ठप्पा है।
‘लस्ट स्टोरीज’ (2018) तथा ‘घोस्ट स्टोरीज’ (2020) भी ‘बॉम्बे टाकीज’ की तरह चार निर्देशकों (जोया अख्तर, दिबाकर बैनर्जी, करण जोहर एवं अनुराग कश्यप) द्वारा बनाई चार कहानियों का समुच्चय है। लस्ट स्टोरीज को एक एवं घोस्ट स्टोरीज को तीन पुरस्कार मिले।
जोया अख्तर के लिए ‘लस्ट स्टोरीज में भूमि पेडनेकर (सुधा महेश्वरी), नील भूपालम (अजित खन्ना), निकेता दत्ता (रुक्मिनी सोनकरी), रसिका दुग्गल (सोनालिका अतिहरन) ने काम किया है। ‘घोस्ट स्टोरीज; में उन्होंने जान्हवी कपर (समीरा), सुरेखा सीकरी (मिसेज मलिक), विजय वर्मा (गुड्डु) को लिया है।