फिल्म का मोड़
एक समय आता है जब स्नेहमय को मियागे के कैंसर पीड़ित होने का पता चलता है। वह स्कूल से छुट्टी लेकर उसके इलाज की जानकारी के लिए कलकत्ता जाता है। चिकित्सक कहता है कि मरीज को बिना देखे वह कुछ नहीं कह सकता है। आंधी-पानी के बीच स्नेहमय बहुत निराशा होती है। लॉटारी में वह मियागे से फोन पर बात करता है, यही उनकी आखिरी बातचीत सिद्ध होती है। आंधी-पानी तूफान में बदल जाता है। भयंकर हवा-पानी में फंसे स्नेहमय को निमोनिया हो जाता है।
भयंकर तूफान के कारण गांव वाले दवा लेने गोसाबा नहीं जा पाते हैं। गोसाबा नाव से ही जाया जा सकता था और तूफान भयंकर था। कुछ दिनों में निमोनिया से ग्रसित स्नेहमय मर जाता है। तूफान शांत हो जाता है। और एक दिन सिर घुटाए हुए सफेद साड़ी पहने मियागे उसके घर पहुंचती है। अपने पति के उस घर में स्नेहमय की यादों के साथ-साथ उसे संध्या और पोल्टू मिलते हैं। प्रेम और विवाह मन के संबंध होते हैं।
स्नेहमय और मियागे का संबंध समाजशास्त्र के नियम को धता बताते हुए सैकड़ों मील की दूरी, तमाम कठिनाइयों के बावजूद अंत तक बना रहता है। प्रेम के अपने नियम होते हैं जिनकी व्याख्या गणित टीचर भी नहीं कर पाता है। वह प्रेम जीता है, उसी में मरता है।
‘द जैपनीज वाइफ’ में नायक स्नेहमय है, मगर नायिका मियागे और संध्या का महत्व कम है। जापान में भी किसी स्त्री का बिना विवाह किए (समाज की दृष्टि में वह विवाहित नहीं है) रहना आसान नहीं है। संध्या जिसकी एक समय स्नेहमय से शादी तय थी उसके लिए उसी व्यक्ति के घर में रहना कितना संघर्षमय होगा सोचा जा सकता है। वह मां है, जब वह अपने बेटे के प्रति इस पुरुष का प्रेम-स्नेह देखती है तो उसके मन में इस पुरुष के प्रति कोमल भावनाएं उदय होती हैं।
वह मात्र एक स्त्री नहीं बल्कि एक मां और सबसे बढ़ कर एक विधवा स्त्री है। अपर्णा सेन के लिए राहुल बोस पहले भी इंग्लिश अगस्त’, स्प्लिट वाइड ओपेन’, ‘15 पार्क एवेन्यू’ तथा ‘मिस्टर एंड मिसेज अय्यर’ में काम कर चेके हैं। निर्देशक उनसे बहुत अच्छा काम लेने में सफल है।
जापानी अभिनेत्री के लिए एजेंसी की सहायता से उन्होंने 12 लड़कियों को चुना और ऑडीशन के बाद चिगुसा टाकाकु को लिया। चिगुसा इंग्लिश नहीं जानती है, अत: पूरे समय एक अनुवादक संग रहा। फिल्म की शूटिंग कलकता, सुंदरबन, जापान हुई। फिल्म में पतंग उड़ाने की स्पर्द्धा मजेदार है, बंगाल की प्रकृति के अनुरूप।
दर्शकों और समीक्षकों ने सराहा
रिलीज होने पर इस फिल्म द जैपनीज वाइफ’ को दर्शकों और समीक्षकों की प्रशंसा प्राप्त हुई। निर्देशक के रूप में अपर्णा सेन के काम को लोगों ने खूब पसंद किया। स्टार एंटरटेनमेंट वालों ने उन्हें सर्वोत्तम निर्देशक के रूप में पुरस्कृत किया। राहुल बोस की एक ग्रामीण के रूप में अभिनय तथा बांग्ला-अंग्रेजी बोलने की वाहवाही हुई। रइमा सेन की शर्मीली विधवा की भूमिका लोगों को भाई।
मौसमी चटर्जी सदा से प्रिय अभिनेत्री रही हैं। फिल्म को स्टार एंटरटेनमेंट का सर्वोत्तम फिल्म का पुरस्कार मिला। केरला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल में इसे उस साल का सिल्वर क्रो फेसेंट अवॉर्ड मिला। फिल्म की उदासी आपके अंतर को छूती है और आप तहे दिल से चाहते हैं कि पति-पत्नी कम-से-कम एक बार मिल जाएं।
यह मर्मिक लगता है कि जो दो इंसान अपने आस-पास के लोगों के समक्ष खुद को अभिव्यक्त नहीं कर पाते हैं, वे हजारों मील दूर बैठे व्यक्ति से कैसे जुड़ जाते हैं। सच है प्यार कब, कहां और किससे हो जाए कहा नहीं जा सकता है। प्यार, पंछी, नदियां देशों की सरहदों को नहीं मानती हैं। अगर एक सरल मर्मस्पर्शी फिल्म देखने का मन करे तो वसंत के इस प्रेम भरे मौसम में इस फिल्म को अवश्य देखें।
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