प्रेम के गंभीर मसले की फिल्म
21 पुरस्कारों वाली ‘प्रेमम्’ में प्रेम के गंभीर मसले को हास्य के छौंक के साथ प्रस्तुत किया गया है। यहां तक कि दिल टूटने जैसे हताश-उदास लम्हे भी हल्के-फुल्के ढंग से दर्शकों का मनोरंजन करते हैं। लड़कों का खूबसूरत मेरी (अनुपमा परमेश्वरन) के घर का चक्कर लगाना, मेरी के पिता का उनको खदेड़ना, दिल टूटना, डेविड जॉर्ज का रोना-बिसूरना, इन सबके साथ फिल्म आगे बढ़ती है।
अब बढ़ी हुई दाढ़ी के साथ जॉर्ज प्रि-डिग्री पार कर कॉलेज पहुंच गया है। उसका अपना गैंग है, वह पीता, लड़ता-झगड़ता है, जूनियर छात्रों को पीटता है। मतलब पढ़ाई के अलावा ये लड़के सब करते हैं। जिंदगी एक बार फ़िर पलटा खाती है। जॉर्ज को एक बार फिर से प्यार होता है। इस बार उसे प्रेम होता है, अपने कॉलेज की गेस्ट लेक्चरर मलर से। मलर यानि साई पल्ल्वी। साई पल्लवी की एक तरह से यह पहली मलयालम फ़िल्म है, वैसे आदिवासी परिवार में जन्मी यह अभिनेत्री इसके पहले दो (एक मलयालम और एक तमिल) फ़िल्म में काम कर चुकी थी, मगर रोल छोटा था, अत: क्रेडिट में नाम नहीं आता है।
उसकी सादगी, खूबसूरती और क्षमता पर जॉर्ज पहली झलक में मर मिटता है। मलर को भी खास इंकार नहीं है। पर दिल क्या करे? कॉलेज के हकले लेक्चरर विमल (विनय फोर्ट) का दिल भी मलर की गिरफ़्त में है। वह आती गेस्ट लेक्चरर के रूप में है, पर छा जाती है। उसका आत्मविश्वास, उसकी अभिनय कुशलता सब देखने, अनुभव करने की बात है। हाय रे! जॉर्ज की किस्मत! यह बेल भी मेढ़े नहीं चढ़ती है।
निविन पॉली ने तीनों भूमिकाएं कुशलतापूर्वक करके सिद्ध कर दिया कि वे विभिन्न भूमिकाएं करने में सक्षम हैं। वैसे एक साल पहले वे खुद को ओम शांति ओशाना में बखूबी प्रमाणित कर चुके थे। ‘प्रेमम्’ में किशोर के रूप में निविन नर्वस, भयभीत, प्रेम निवेदन में लड़खड़ाते हुए, खोए-खोए से नजर आते हैं, तो युवा के रूप में अधिक सुनिश्चित और आत्मविश्वास से भरे हुए हैं, जिसे अपनी टीचर से प्रेम निवेदन में कोई झिझक नहीं होती है।
निवेदन के बाद यह कहना भी जॉर्ज नहीं भूलता है कि वह पिए हुए नहीं है। और सन 2014 में वह मुस्कुराते युवा से फोर्ट कोच्ची में एक्जोटिक केक-पेस्ट्री की हाई क्वालिटी बेकरी-केफे चलाने वाला एक प्रौढ़, गुस्सैल, कड़क आदमी है। और फिर उसे मिलती है सेलीन (मैडोना सेबास्टीयन)। आई तो वह उसके ही अतीत से है, पर नए वेष, नए परिवेश में नई युवती के रूप वह जॉर्ज को मिलती है। फिर क्या होता है? कैसे होता है? आप स्वयं देखें। पर निविन पॉली हर भूमिका के साथ न्याय करते हैं, कभी भी सस्ते रोमियो नहीं दीखते हैं।
बाकी अभिनेताओं ने भी सटीक अभिनय किया है। संवाद (इंग्लिश सबटाइटिल) मजेदार हैं। उम्र के अलग-अलग दौर में प्रेम कैसे रंग दिखाता है, इसे कैमरामैन आनंद सी. चंद्रन ने पकड़ा है और दर्शकों तक संप्रेषित किया है। राजेश मुरुगेशन का संगीत कर्णप्रिय है।
अब देर क्यों कर रहे हैं? मौसम भी है, रुत भी है और रिवायत भी। जल्दी से इस सहज-स्वाभाविक प्रेम भरी फिल्म को देख लीजिए। फिल्म बताती है, ‘दिल क्या करे जब किसी को किसी से प्यार हो जाए...’। याद रखिए, ‘प्यार दीवाना होता है, मस्ताना होता है, हर खुशी से हर गम से बेगाना होता है...’।
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