फिल्म ‘सॉन्ग विदआउट ए नेम’ का दृश्य
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जोस लोम्बार्डी का निर्देशन और फिल्में
खूबसूरत फ्रांसिस्को जोस लोम्बार्डी पेरु के बहुत सम्मानित निर्देशकों में गिने जाते हैं। वे निर्देशन के साथ-साथ प्रड्यूसर भी हैं। कई पुरस्कारों से सम्मानित लोम्बार्डी की ‘अंडर द स्किन’, ‘टिंटा रोजा’, ‘सिन कम्पेशन’ आदि कुछ अन्य फिल्में हैं। उन्हें मानव अधिकारों के प्रति समर्पित होने केलिए भी कई पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। उन्होंने मारिओ वर्गास लोसा के कार्य ‘द टाइम ऑफ द हीरो’ को भी फिल्म में परिवर्तित किया है।
लोम्बार्डी ने 2003 में छ: भिन्न परंतु समानान्तर कहानियों को मिला कर 1 घंटे 35 मिनट की फिल्म ‘ओजोस क्यु नो वैन’ बनाई। इसमें उन्होंने पेरु के समाज का चित्रण वर्ग तथा पीढ़ियों के हिसाब से किया है और 90 के दशक की पेरु की सरकार के भ्रष्टाचार का खुलासा किया है। यहां फुजीमोरी सरकार के पतन को दिखाया गया है।
पेरु से ही एक अन्य लेखक, सिने-निर्देशक आती हैं। क्लाउडिआ लोसा मारिओ वर्गास लोसा तथा पेरु के कल्ट फिल्म निर्देशक लुई लोसा (एनाकोंडा) की भतीजी हैं। 15 नवम्बर 1976 को लीमा में जन्मी क्लाउडिआ लोसा को अब तक विभिन्न श्रेणी के 21 पुरस्कार मिल चुके हैं। ‘ला टेटा असुस्टाडा’, ‘मैडेइनुसा’, ‘लोओरो’ उनकी कुछ फिल्मों के नाम हैं। ‘मैडेइनुसा’ कमिंग ऑफ एज की कहानी जिसमें एक 14 साल की किशोरी अपने छोटे-से, दूर-दराज के गांव में ईस्टर समारोह के दौरान अचानक वयस्क होती है।
इस भूमिका को अभिनेत्री मैगली सोलिएर ने बड़ी कुशलत से निभाया है। ‘मैडेइनुसा’ के आलावा ‘द मिल्क ऑफ सोरो’, ‘मेगालांस’ मैगली सोलिएर की अन्य फिल्में हैं। मैगली सोलिएर को कई पुरस्कार प्राप्त हैं। वे लैटिन अमेरिका के आलावा यूरोप में भी खूब लोकप्रिय हैं।
‘द मिल्क ऑफ सोरो’ फिल्म कहानी है एक स्त्री फौस्टा की जो एक विरल बीमारी मिल्क ऑफ सोरो से ग्रसित है। यह बीमारी उन गर्भवती स्त्रियों के दूध से फैलती है, जिनका गर्भावस्था में बलात्कार हुआ है। मुसीबत यह है कि फौस्टा एक ओर तो इस बीमारी से तरह-तरह के भ्रम और निरंतर भय में है और उसी बीच उसकी मां की अचानक मृत्यु हो जाती है। वह एक कठोर कदम उठाती है और ऐसा रास्ता चुनती है ताकि उसे अपनी मां की राह पर न चलना पड़े।
फिल्म को 16 विभिन्न पुरस्कार प्राप्त हुए, साथ ही यह फिल्म ऑस्कर के लिए नामांकित भी हुई थी। 2009 की इस फिल्म को बर्लिन समारोह में सर्वोत्तम फिल्म का गोल्डेन बेयर पुरस्कार मिला था।
समय के साथ प्रगति पर है सिनेमा
इसी तरह पेरु के सिनेमा को देश के बाहर लोकप्रिय बनाने में कार्लोस एल्कांत्रा के अभिनय का भी काफी योगदान है। ‘पेरो गार्डियन’, ‘हाउस ऑफ स्नेल’ कार्लोस एल्कांत्रा की कुछ अन्य फिल्में हैं। वे टीवी तथा थियेटर में भी काम करते हैं।
इस सदी में पेरु के जिस सिनेमा की खूब चर्चा हुई वह चे ग्वेरा के जीवन को परिवर्तित करने वाली उनकी मोटरसाइकिल रोड ट्रिप पर आधारित बायोपिक है। 2004 में वाल्टर सेलेस की ‘द मोटरसाइकिल डायरीज’ युवाओं के बीच खूब लोकप्रिय हुई।
एक नवजात बच्ची के चोरी होने और उसकी खोज पर ‘सॉन्ग विदआउट ए नेम’ (मेलिना लिओन), अपने बेटे का इंतजार करते बूढ़े युगल पर ‘इटर्निटी’ (ऑस्कर कैटाकोरा), पर्यावरण बचाने की जद्दोजहद पर ‘व्हेन टू वर्ल्ड्स कोलाइड’ (हैडी ब्रैंडनबर्ग तथा मैत्यु ओर्जेल) आदि इस सदी की पेरु से आने वाली कुछ अन्य अच्छी फिल्में हैं।
अब पेरु में कई प्रोड्कशन स्टूडियो हैं और ये लोग देश और देश के बाहर दोनों स्थानों के दर्शकों को ध्यान में रखे हुए हैं। अब तो पेरिस में हर साल पेरुवियन सिनेमा समारोह का आयोजन भी होता है।
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