इसी संसद भवन में चली थी संविधान सभा
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इसी भवन में भारत का संविधान भी बना
संसद भवन का निर्माण 1921 और 1927 के बीच किया गया था। इसे जनवरी 1927 में इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल के आसन के रूप में खोला गया था। भारत में ब्रिटिश शासन के अंत के बाद, इस भवन में सन् 1946 से जनवरी 1950 तक 2 साल 11 महीने और 18 दिन संविधान सभा चली और फिर 1950 में भारत का संविधान लागू होने के बाद भारतीय संसद द्वारा इसे अपने अधिकार में ले लिया गया। भारत में पाए गए चौसठ योगिनी मंदिरों को इसकी प्रेरणा माना जाता है। जबकि नया संसद भवन बुद्ध की कर्ण मुद्रा पर आधारित है।
कुल 83 लाख में बना था संसद भवन
अब अतीत के पन्नों में अपनी जगह बनाने जा रहा संसद भवन कुल 83 लाख की लागत से 24,281 वर्गमीटर क्षेत्र में बना था। जिसमें लोकसभा के 552 सदस्यों और राज्यसभा के 245 सदस्यों वाले सदनों के साथ ही 436 सीट वाला एक सेंट्रल हॉल भी था। सेंट्रल हॉल संसद भवन में एक महत्वपूर्ण स्थान है जहां विशेष अवसरों पर दोनों सदनों के संयुक्त सत्र आयोजित किए जाते हैं। इसका उपयोग भारत के राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक कार्यों और महत्वपूर्ण अवसरों के लिए भी किया जाता है।
इसके अलावा संसद भवन में कई समिति कक्ष हैं जहां संसदीय समितियां अपनी बैठकें आयोजित करती हैं और कानून और निरीक्षण से संबंधित विभिन्न मामलों पर चर्चा करती हैं। इसी में संसद पुस्तकालय भी है जो कि संसद भवन का एक अनिवार्य हिस्सा है और संसद के सदस्यों के लिए संसाधन और शोध सामग्री प्रदान करता है। इसी इमारत में लोकसभा के अध्यक्ष और राज्य सभा के सभापति के कक्ष होते हैं। संसद भवन में ही विभिन्न मंत्रियों के अपने आधिकारिक कर्तव्यों और बैठकों को पूरा करने के लिए उनके कक्ष होते हैं। इन विशिष्ट कमरों के अलावा, संसद भवन परिसर के भीतर कार्यालय, स्वागत क्षेत्र, प्रशासनिक स्थान और अन्य सहायक सुविधाएं भी हैं।
नए भवन में लोकसभा के लिए 888 सीटें
दिल्ली में ब्रिटिश राजधानी स्थापित होने के लगभग एक सदी बाद 2011 में स्थानाभाव के कारण नए संसद भवन की आवश्यकता महसूस की गई थी। इसके लिए तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार द्वारा 2011 में एक समिति का गठन किया गया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2019 में दूसरी बार सत्ता में आने पर सेंट्रल बिस्टा परियोजना शुरू की जिसका भाग नया संसद भवन भी था।
नए संसद भवन का 28 मई को उद्घाटन होने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। हालांकि, प्रमुख विपक्षी दल इसका उद्घाटन राष्ट्रपति के माध्यम से चाहते थे। यह संसद भवन भारतीय स्थापत्य शैली के आधार पर बना है। इसमें लोकसभा के लिए 888 सीटें होंगी। तो सवाल उठता है कि क्या अगले परिसीमन में लोकसभा की सीटें बढ़ेंगी? नया संसद भवन 65 हजार स्क्वेयर मीटर में बना है।
इसे त्रिकोण आकार में बनाया गया है। नए संसद भवन में लोकसभा की 888 सीटें होंगी, जबकि राज्यसभा के लिए 384 सीटें रखी जाएंगी। यही नहीं संयुक्त सत्रों की स्थिति में 1,272 सीटों की व्यवस्था की गई है। इसे राष्ट्रीय पक्षी मोर की थीम पर बनाया गया है। जानकारों का कहना है कि इसे त्रिकोण आकार में इसलिए बनाया गया है ताकि जगह का सही इस्तेमाल किया जा सके। भारतीय संसद में राष्ट्रपति तथा दो सदन-राज्य सभा (राज्यों की परिषद) एवं लोकसभा (लोगों का सदन) होते हैं। राष्ट्रपति के पास संसद के दोनों सदनों में से किसी भी सदन को बुलाने या स्थगित करने अथवा लोकसभा को भंग करने की शक्ति है।
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