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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: पेनेलोपी स्फीरीस- रॉक डॉक्यूमेंट्री

सार

2 दिसम्बर 1945 को अमेरिका में जन्मी पेनेलोपी को अक्सर ‘रॉक एंड रोल अंथ्रॉपोलोजिस्ट कहा जाता है। 10 पुरस्कार पाने वाली पेनेलोपी स्फीरीस अपनी फिल्मों की थीम सीधे जीवन से उठाती हैं।
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सिनेमा का इतिहास - फोटो : Freepik
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विस्तार
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10 पुरस्कार पाने वाली पेनेलोपी स्फीरीस अपनी फिल्मों की थीम सीधे जीवन से उठाती हैं। 2 दिसम्बर 1945 को अमेरिका में जन्मी पेनेलोपी को अक्सर ‘रॉक एंड रोल अंथ्रॉपोलोजिस्ट' कहा जाता है। उन्होंने अपनी पहली फीचर फिल्म न बना कर डॉक्यूमेंट्री बनाई। इसे उन्होंने उपेक्षित लॉस एंजेलेस पंक रॉक सीन से उठाया, 1981 की इस फिल्म का नाम है, ‘द डिक्लाइन ऑफ वेस्टर्न सिविलाइजेशन’।

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पहली ही बार में ही उन्हें आश्चर्यजनक प्रशंसा मिली। इसे नेशनक्ल फिल्म प्रिजर्वेशन बोर्ड का पुरस्कार मिला। इस फिल्म को नेशनल फिल्म रजिस्ट्री ने लाइब्रेरी ऑफ कॉन्ग्रेस ‘सांस्कृतिक, ऐतिहासिक या कलात्मक’ विशिष्टता के लिए चुना है।

रूढ़िवादिता को जबाव देने वाली महिला

चार बच्चों में सबसे बड़ी पेनीलोपी ने मनोविज्ञान एवं फिल्म की पढ़ाई की। लोग सोचते थे स्त्रियां भला क्या फिल्म बनाएंगी उसमें भी डॉक्यूमेंट्री बनाना उनके बस का कदापि नहीं है। उन्होंने उन लोगों को मुंहतोड़ उत्तर दिया है, जो कहते हैं कि डॉक्यूमेंट्री फिल्म से बात नहीं बनती है। पेनेलोपी ने डॉक्यूमेंट्री के कथानक को फीचर फिल्म में रूपांतरित किया और 1983 में ‘सबर्बिया’ बनाई।

यह एक गुस्से से भरे हुए हताश किशोर की कहानी है जो भाग कर लॉस एन्जेल्स की सीमा पर एक उजाड़ घर में शरण लेता है। उसी स्थान से हो कर फ्रीवे का निर्माण होना है। सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म के कई दृश्य रोंगटे खड़े कर देते हैं, जैसे कि पहला दृश्य जहां जंगली कुत्ते एक शिशु को जघन्यता से चीर डालते हैं। इसी तरह की कई क्रूर घटनाएं पूरी फिल्म में आई हैं। कुत्तों द्वारा चीरे जाते बालक को उसकी मां और शैला दोनों देखती हैं। 

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शैला अपने पिता के यौनाचार से बचने के लिए घर से भागी है और जिसे बच्चे की मां ने सहायता दी है। इसी घर में अपनी मां के अत्याचारों से घबरा कर भागा हुआ एथान है, जोश है जो अपने  समलैंगी पिता के कारण घर छोड़ आया है। ये सारे युवा अपने माता-पिता द्वारा छोड़ दिए गए हैं, या यूं कहें उनके माता-पिता को अपनी दुनिया से फुरसत नहीं है कि अपने बच्चों पर ध्यान दें।

जैक का सौतेला पिता एक पुलिस है। इसी पुलिस वाले की कार इस ग्रुप का वाहन है, ये लोग लूटपाट से अपना जीवन यापन करते हैं और संग रह कर खुश हैं। मगर असल में ये कितने खुश हैं, यह देखना होगा। शैला आत्महत्या करती है। उसके शव को अन्य बच्चे उसके माता-पिता को सौंपते हैं जो माता-पिता इन बच्चों को उसके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने देते हैं।

असल में इस फिल्म में पेनेलोपी स्फीरीस ने अपने बचपन की कहानी कही है, जहां उन पर उन कामों के दोष भी मढ़े जाते थे जो उन लोगों ने नहीं किए होते थे। उनका बचपन खुद सबर्बिया में बीता था। खुद को मूल्यों के रखवाले घोषित करने वाले पड़ोसियों ने उन लोगों को समाज से निकाल दिया था।

इस फिल्म में वे ढकोसले भरी जिंदगियों को दिखाती हैं और समाज से निकाले गए बच्चों और उनके द्वारा किए गए उत्पातों का दोष समाज को देती हैं।

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सिनेमा की दुनिया - फोटो : istock

‘द बॉयज नेक्स्ट डोर’ (1985)

1985 में पेनेलोपी की दूसरी फिल्म ‘द बॉयज नेक्स्ट डोर’ आई इसमें भी वे हाई स्कूल के दो लड़कों को दिखाती हैं जो अपने ग्रेजुएशन के ठीक तीन दिन पहले लॉस एन्जेल्स जाते है और वहां मारकाट करते हैं। अगले साल उन्होंने एक कॉमेडी और एक्शन का मिश्रण ‘हॉलीवुड वाइस स्क्वाड’ बनाई। यहां भी वे परिवार की दुर्दशा दिखाती हैं। इस फिल्म में एक मां अपनी खोई हुई बेटी को खोजने लॉस एन्जेल्स जाती है और पाती है कि उसकी बेटी नशे की आदी है और पोर्नोग्राफी के व्यापार में जुड़ी हुई है।

एक युवा महत्वाकांक्षी जासूस इस अड्डे का भंडाभोड़ करता है। एक साल बाद 1987 में उन्होंने ‘डड्स’ का निर्देशन किया। यह फिल्म पंक्स (निकम्मे) के एडवैंचर्स को दिखाती है। ये निकम्मे लोग जब दुनिया के समाप्त होने की प्रतीक्षा करते-करते उकता जाते हैं तो पश्चिम की ओर प्रवास कर जाते हैं।ये लोग सड़क किनारे अपना डेरा डालते हैं जहां उन पर एक दूसरा गुट आक्रमण करता है और इनमें से एक को मार कर भाग जाता है। बचे हुए दो लोगों का पीछा करते हुए कथावाचक हत्यारों की तलाश करता है।

1988 की फिल्म  ‘थंडर एंड मड’

कीचड़ में कुश्ती करने वाली महिलाओं पर 1988 में पेनेलोपी ने ‘थंडर एंड मड’ का निर्देशन किया। इसके बाद वे काफी समय तक टेलीविजन से जुड़ी रहीं। इससे प्राप्त रकम से वे अपने मनमाफिक काम डॉक्यूमेंट्री बनाने में जुट गईं।

1994 में बच्चों को ले कर उन्होंने ‘द लिटिल रास्कल्स’ फिल्म बनाई जिसकी खूब आलोचना हुई क्योंकि इसमें उन्होंने वयस्कों के मजाक बच्चों के मुंह से कहलवाए हैं। फिल्म लिंग भेदभाव को भी दर्शाती है। 1996 में पेनेलोपी ने ‘ब्लैक शीप’ बनाई और 1998 में ‘सेन्सलेस’ कॉमेडी निर्देशित की। इसके बाद एक बार फिर ये डॉक्यूमेंट्री बनाने की ओर मुड़ गईं। 

ओज फेस्टिवल पर 2001 में ‘वी सोल्ड आवर सोल्स टू रॉक एंड रोल’ बनाई जिसमें 1999 के घुमक्कड बैंड्स को इन्होंने अपनी थीम बनाया। बैंड वालों ने खुद इस डॉक्यूमेंट्री को बनाने में सहायता की। इसे कई फिल्म समारोहों में सर्वोत्तम डॉक्यूमेंट्री का खिताब मिला। 2005 में फिर से ये एक बार फिल्म की ओर लौटी और ‘द किड एंड आई’ बनाई। इसमें कैलीफोर्निया के गवर्नर, बास्केटबॉल स्टार और बहुत सारे लोगों ने बड़े प्रेम से काम किया है। यह बहुत प्रेम से बनाई गई एक फिल्म है। 

‘द डिक्लाइन ऑफ ऑफ वेस्टर्न सिविलाइजेशन’ उन्होंने 1981,1988 तथा 1998 अर्थात तीन बार बनाई। इसी सिने-त्रयी को लेकर जगह-जगह दिखाने के लिए 2016 में वे अपनी प्रड्यूसर बेटी एना फॉक्स के साथ यात्रा पर निकलीं।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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