कोरियन फिल्म- ट्रेन टू बुसान
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नई सदी कोरिया फिल्म उद्योग के लिए नए आकाश को लेकर आई। कोरिया की फिल्में विश्व में सम्मान पाने लगीं। 1999 में बनी कैन्ग जी-ग्यु निर्देशित फिल्म ‘शिरी’ बॉक्स ऑफिस पर सफल होने वाली इस दौर की पहली फिल्म बनी। 66 पुरस्कार जीतने वाले दक्षिण कोरिया के सिने-निर्देशक, स्क्रीनप्लेराइटर, प्रड्यूसर किम की-डुक (1960-2020) के बिना कोरिया का सिने-इतिहास पूरा नहीं हो सकता है।
कुछ लोग किम की-डुक को सनकी मानते हैं मगर उन्होंने सिनेमा में खूब प्रयोग किए। उन्होंने ‘क्रोकोडाइल’, ‘वाइल्ड एनीमल्स’, ‘बर्डकेज इन’, ‘रीयल फिक्शन’, ‘एड्रेस अननॉन’ तथा ‘स्प्रिंग, समर, फॉल, विंटर...एंड स्प्रिंग’ जैसी तमाम प्रयोगात्मक फिल्में बनाई।
आज विश्व खोज-खोज कर कोरिया की फिल्में देखना चाहता है क्योंकि आज वहां की फिल्में अपने कथानक और शैली में विशिष्ट होती हैं। बॉन्ग जून-हो निर्देशित, ऑस्कर विजेता फिल्म ‘पैरासाइट’ (2019) अमीर और गरीब आबादी की एक-दूसरे पर निर्भरता को दिखाती है। दोनों एक-दूसरे का शोषण कर जीवित रहते हैं, दोनों वर्ग लालची हैं।
‘ट्रेन टू बुसान’ ने जीते कई पुरस्कार
एक अन्य फिल्म जिसने विश्व का ध्यान आकर्षित किया वह है, ‘ट्रेन टू बुसान’। सैन्ग-हो येओन निर्देशित इस फिल्म में दक्षिण कोरिया में एक जोम्बी वायरस फैल जाता है और सियोल से बुसान जाने वाली ट्रेन के यात्री जान बचाने में जुट जाते हैं। इसमें गॉन्ग यू, जुंग यु-मी तथा मा डोन्ग-सियोक जैसे अभिनेताओं ने काम किया है। इस फिल्म ने अब तक 35 पुरस्कार जीते हैं।
2021 में लोकप्रिय अभिनेत्री यौन्ग युह-जंग ने ‘मिनारी’ फिल्म के लिए सर्वोत्तम सहायक अभिनेत्री का अकादमी पुरस्कार जीता, वैसे उसने कुल जमा 63 पुरस्कार पाए हैं। इक्कीसवीं सदी में कोरिया की सफल फिल्मों में ‘ओल्डबॉय’, ‘द होस्ट ब्रेक्स’, ‘दि इसेल’, ‘ग्रीन फिश’, ‘ओयासिस’, ‘समरिटन गर्ल’, ‘पोयेट्री’, असफल परिवार पर आधारित फिल्म त्रयी ‘फादर इज ए डॉग’, ‘मदर इज ए व्होर’ तथा ‘आई एम ट्रैस’ जैसी फिल्में बनीं।
इसी समय ‘मेमोरीज ऑफ मर्डर’, ‘अनलॉक्ड’, ‘मदर’, ‘द मैन फ्रॉम नोव्हेयर’, ‘सोलमेट’, ‘साइलेंस’, ‘माई सैसी गर्ल’, ‘हाउसमेड’, ‘मिरैकल इन सेल नंबर 7’, ‘होप’ जैसी सफल फिल्में कोरिया में बनी और विश्व स्तर पर सराही गईं। सिने-विश्व को कोरिया से काफी उम्मीदें हैं।
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