फिल्म लाइन में आने से पहले ट्रंबो ने पिता के बागीचे की सब्जियों को घूम-घूम कर बेचा, अखबार बेचा, वह कु क्लक्स क्लान में शामिल होना चाहता था, मगर उसके पास इसकी फीस देने के पांच डॉलर नहीं थे। लिख तो वो स्कूल काल से रहा था। तब वह द डेली सेंटिनल का रिपोर्टर था। बाद में ह्यूमर मैगजीन तथा ईयरबुक में भी लिखा।
वे कहानियां लिख रहे थे और ये कहानियां वैनिटी फेयर, वोग, हॉलीवुड स्पेक्टेटर जैसी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती थीं। बौल्डर डेली कैमरा के लिए भी काम किया। पिता का काम छूट जाने पर परिवार लॉस एंजलस आ गया। मगर जब ट्रंबो इक्कीस साल के थे उनके पिता की मृत्यु हो गई अत: मां और दो बहनों की जिम्मेदारी उन पर आ गई। इस समय उन्होंने तरह-तरह के तमाम काम किए।
एक बेकरी में दस साल रात की ड्यूटी की। उन्होंने अपना पहला उपन्यास हॉलीवुड स्पेक्टेटर के लिए ‘एक्ल्पिस’ नाम से लिखा। इसमें अपने एक मुख्य किरदार जॉन एबोट को उन्होंने अपने पिता की तर्ज पर गढ़ा। वे हॉलीवुड स्पेक्टेटर के लेखक, आलोचक तथा एडीटर भी थे।
वार्नर्स, कोलम्बिया, पैरामाउंट, एमजीएम तथा 20th सेंचुरी जैसे सिनेमा हाउस के साथ डॉल्टन ट्रंबो ने 74 फिल्मों के स्क्रीनप्ले लिखे जिसमें अधिकांश प्रसिद्ध हुईं। उन्होंने जिन फिल्मों के स्क्रीनप्ले लिखे उनमें से कुछ के नाम हैं, ‘पेपिओन’, ‘रोमन होलीडे’, ‘द होर्समैन’, ‘लोनली आर द ब्रेव’, ‘एक्जोडस’, ‘स्पार्टकस’, ‘द ब्रेव वन’, ‘गन क्रेजी’, ‘द लॉरेटा यंग शो’, ‘ही रैन ऑल द वे’, ‘थर्टी सेकेंड्स ओवर टोकियो’, ‘ए गाई नेम्ड जो’, ‘फाइव केम बैक’ आदि।
अधिकांश में पहले उसका नाम क्रेडिट में नहीं था, बाद में क्रेडिट में नाम लिखा गया। ट्रंबो के साथ यह हुआ। अफसोस की बात है, कितने ही लोग फिल्मी दुनिया में जीवन भर काम करते हैं और बेनाम रह जाते हैं।
1993 में मिला ऑस्कर
गुमनामी में ‘रोमन होलीडे’ (1853) का स्क्रीनप्ले लिखा, 40 साल बाद सुधार कर 1993 में जब उन्हें ऑस्कर दिया गया वे उसे ग्रहण करने के लिए जीवित न थे। 16 साल पहले वे इस दुनिया से जा चुके थे। एक साक्षात्कार में उनसे पूछा गया वे ऑस्कर मिलने पर क्या करेंगे? उनका उत्तर था वे उसे अपनी बेटी को देंगे।
असल में गुमनामी के दौरान वे जिस भी फिल्म का स्क्रीनप्ले लिख रहे थे, उसका नाम बेटी को बताते थे। वह तब बहुत छोटी थी। इस इंटरव्यू के समय वह 13 साल की थी। वह चाह कर भी यह बात किसी से साझा नहीं कर पाती थी। अपनी इसी राजदार बेटी को वे अपना ऑस्कर देना चाहते थे।
जय रॉच ने 2015 में ‘ट्रंबो’ नाम से उन पर बायोपिक बनाई है। इसे ऑस्कार का नामांकन मिला। इस फिल्म में ब्रायन क्रैन्स्टन के अलावा डायने लेन तथा हेलेन मिरेन ने भी अभिनय किया है। उनके बेटे क्रिस्टोफर ट्रंबो ने ‘ट्रंबो’ नाम से उन पर एक नाटक लिखा है।
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