भारतीय टीम ने 1983 में हुए क्रिकेट वर्ल्ड कप को जीतकर हर किसी को हैरान कर दिया था।
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अलग था तब का रोमांच
वर्ल्ड कप 1983 में भारत ग्रुप बी में था। ग्रुप बी में वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया भी थी। उस समय 60 ओवर का मैच होता था। भारत ने दो-दो मैच वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया से खेले थे। दोनों से एक-एक मुकाबला जीता था और एक-एक हारा था। जयंती प्रसाद याद करते हैं कि ग्रुप मैचों में भारत के प्रदर्शन से क्रिकेट प्रेमी खुश थे और जैसे-जैसे वर्ल्ड कप आगे बढ़ रहा था, क्रिकेट देखने और सुनने वालों की तादाद भी बढ़ती जा रही थी।
उस दौरान रेडियो और टेलीविजन की बिक्री बढ़ना शुरू हो गई थी। अखबारों की प्रसार संख्या में भी बढ़ोतरी हुई थी। मेजबान इंग्लैंड के साथ भारत ने पहला सेमीफाइनल खेला था। सभी की धड़कनें बढ़ी हुई थीं, क्योंकि इंग्लैंड की टीम काफी मजबूत थी। इंग्लैंड पर भारत की जीत से क्रिकेट प्रेमियों में अलग ही जोश और उत्साह का संचार हो गया था।
जहां लगे थे टीवी, वहां इकट्ठा हुई थी भारी भीड़
जयंती प्रसाद याद करते हैं कि 25 जून 1983 को इंग्लैंड के लॉर्ड्स में भारत और वेस्टइंडीज का फाइनल मैच खेला गया। जहां-जहां टेलीविजन लगे थे, वहां लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। लोग रेडियो से चिपके हुए थे, लेकिन जब भारत ने 54.4 ओवर में मात्र 183 रन बनाए तो क्रिकेट प्रेमी थोड़ा निराश हुए थे। उन्हें लग रहा था कि यह टारगेट बेहद आसान है।
वेस्टइंडीज की टीम बहुत आराम से अपना तीसरा कप भी जीत लेगी, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने जिस तरह से मैच को पलटा, उसे देखकर भारतीय फैन्स नाचने लगे थे। हर एक विकेट पर जबरदस्त शोर मचता था। वेस्टइंडीज की पूरी टीम 52 ओवर में 140 रन पर आउट हो गई थी। सही मायने में 1983 की वर्ल्ड कप की जीत ने भारत में क्रिकेट को एक नई दिशा दी थी। यही कारण है कि लॉर्ड्स के मैदान पर कप के साथ कपिल देव और बाकी टीम के सदस्यों का फोटो आज भी लोगों के जहन में बसा हुआ है।
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