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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: हॉलीवुड का सुपरस्टार हैरिसन फोर्ड

सार

हैरिसन को अपनी फिल्म ‘द मस्किटो कोस्ट’ बहुत अच्छी लगती है। अब वे पहले से काफी दयालु और नम्र हो गए हैं। मगर अपने देश की नीतियों से अपना मतभेद दिखाने में कोई कोताही नहीं करते हैं। वियतनाम युद्ध के प्रति उनके बड़े कठोर विचार थे।
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हैरिसन फोर्ड अभिनेता - फोटो : iStock
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विस्तार
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पूरी तरह स्थापित 45 पुरस्कार अपनी झोली में लिए हुए हैरिसन फोर्ड को हॉलीवुड के सुपर स्टार का दर्जा प्राप्त है। मगर वो मात्र एक कुशल अभिनेता नहीं हैं, वो बहुमुखी प्रतिभा का व्यक्ति एक प्राइवेट पायलेट भी है, वह फिक्स्ड-विंग का एयरक्राफ्ट तथा हेलीकॉप्टर उड़ाता है, आवश्यकता पड़ने पर लोगों की सहायता करता है। उसके पास अपना एयरक्राफ्ट है। पैसे तो बहुत लोगों के पास होते हैं मगर बहुत कम लोग उसे सामाजिक कार्यों में उपयोग करते हैं।

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वह द ह्युमैनिटैरियन एवियेशन ऑर्गनाइजेशन ‘होप ऑफ विन्ग्स’ के ऑनरेरी बोर्ड मेम्बर भी है। इतना ही नहीं यह अभिनेता अभिनय से पहले बढईगीरी में पारंगत हो गया था, उसे पेशे के रूप में कर रहा था और आज भी शौकिया तौर पर बढ़ईगीरी करता है। वह मुख्यरूप से घरों की रिमॉडलिंग करता है और कैबिनेट बनाने के लिए उसकी ख्याति फैलती है, इलाके में उसकी मांग बढ़ जाती है। मगर अभी बात करते हैं, उसके अभिनय और उसकी फिल्मों की। 

13 जुलाई 1942 को शिकागो में जन्मे इस अभिनेता के पिता का नाम क्रिस्टोफर फोर्ड था, जो पहले एक अभिनेता थे और बाद में विज्ञापन कंपनी से जुड़ गए। यहूदी नस्ल से जुड़ी मां डोरोथी रेडियो कलाकार हैं यानी अभिनय हैरिसन को विरासत में मिला है। पढ़ने में बहुत मन नहीं लगता था।
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विस्कोसिन के रिपन कॉलेज में उन्होंने अभिनय का कोर्स किया मगर पूरा करके से पहले कोलम्बिया फिर यूनिवर्सल से अनुबंध किया। पहले उन्हें फिल्मों तथा टीवी में प्रमुख भूमिकाएं न मिलकर गौण भूमिकाएं ही मिलीं। इनमें अक्सर ‘आरनसाइड’ तथा ‘द विर्जिनियन’ का नाम लिया जाता है।

फिल्मों में मनचाही सफलता न मिलने पर वे बढ़ईगीरी की ओर उन्मुख हो गए।

चार साल उन्होंने यह काम किया और फिर 1973 में ‘अमेरिकन ग्राफिटी’ में बॉब फैल्फा की भूमिका की और इसके चार साल बाद आई उनकी फिल्म ‘स्टार वार्स: एपीसोड 4- अ न्यू होप’ (1977)। इसमें वे हैन सोलो बने हैं और इस फिल्म से कमाल हो गया। वे चाहते थे कि ‘स्टार वार्स: एपिसोड 6- रेटर्न ऑफ द जेडी’ (1983) के अंत में हैन सोलो मर जाए परंतु निर्देशक जॉर्ज लुकस इसके पक्ष में नहीं थे। और इसके भी चार साल बाद एक और कमाल हुआ।

1981 में उनकी अभिनीत फिल्म ‘इंडियाना जोन्स एंड द रेडर्स ऑफ द लोस्ट आर्क’ आई। इसमें वे बने इंडियाना जोन्स। वे एक बुद्धिमान चरित्र के रूप में जाने जाने लगे।

पहले स्क्रीन टेस्ट के बाद उनसे कहा गया था कि इस बिजनेस में तुम्हारा कोई भविष्य नहीं है। मगर उनका भविष्य यहीं था। हैरिसन फोर्ड की मुस्कान बहुत खूबसूरत है। यदि मेरी बात का विश्वास न हो तो फिल्म ‘मेरिकन ग्राफिटी’ देख लें। वह तंग करने वाला है मगर मारपीट नहीं करता है। इस फिल्म में बॉब फैल्फा का उसका चरित्र बिना किसी खास जटिलता के है।

‘स्टार वार्स’- फिल्मों की श्रृंखला

‘स्टार वार्स’ फिल्मों की एक शृंखला है। अक्सर शृंखला वाली फिल्में उबाऊ होती जाती हैं मगर जॉर्ज लुकस की इस फिल्म की खासियत है कि हर आने वाली कड़ी के साथ इसका क्रेज बढ़ता गया। हर कड़ी अपने आप में एक पूरी फिल्म भी है, साथ ही आगे के लिए बहुत कुछ संभावनाएं छोड़ जाती है।

‘स्टार वार्स: एपीसोड 4- अ न्यू होप’ क्लासिक मास्टरपीस में हैरिसन फोर्ड ने काफी दमदार अभिनय किया है, जबकि इस चरित्र हैन सोलो के रूप में पहली बार उसका परिचय दिया गया है। आज भी इसकी चर्चा लोग करते हैं। 

शायद नम्बर चार उनके लिए शुभ है, क्योंकि चार साल बाद शांत परंतु आकर्षक व्यक्तित्व के मालिक हैरिसन फोर्ड को पहली बार जॉन बुक के रूप में ‘विटनेस’ (1985) फिल्म के लिए अकादमी पुरस्कार तथा गोल्डन ग्लोब दोनों में नामांकन मिला। हालांकि इस फिल्म को स्क्रीनराइटिंग तथा एडीटिंग के लिए ऑस्कर मिला।

पीटर वियर की इस दो घंटे की फिल्म में आमिश समुदाय का एक लड़का अपनी मां के साथ फिलाडेलफिया जा रहा है, तभी एक हत्या होती है। लड़का इस हत्या का एकमात्र गवाह है। सरकारी वकील जॉन बुक (हैरिसन फोर्ड) बच्चे को बचाने के लिए सारे जतन करता है मगर इस चक्कर में उसकी जान पर बन आती है। अंतत: वह आमिश इलाके में जा छिपता है। और वहां यह सख्त मिजाज वकील एक आमिश समुदाय की स्त्री को अपना दिल दे बैठता है।

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हैरिसन फोर्ड की फिल्में - फोटो : Twitter

फिल्म ‘इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ डूम’

इसके चार साल बाद आती है उनकी फिल्म ‘इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ डूम’। भारतीय दर्शकों को यह जान कर खुशी होगी कि स्टिवन स्पीलबर्ग द्वारा निर्देशित इस फिल्म में कई भारतीय अभिनेता भी शामिल हैं। यहां रोशन सेठ, अमरीशपुरी (मोला राम), धर्मदास कुरुप हैं साथ ही एक श्रीलंका का अभिनेता डी.आर. नानायकरा भी यहां नजर आता है।

फिल्मों में अपना स्टंट स्वयं करने वाले इस अभिनेता की पूर्व पत्नी मेलिसा मैथिसन ने ई. टी. दि एक्सट्रा-टेरेस्टियल का स्क्रीनप्ले लिखा था। मेलिसा से उन्होंने 1983 में शादी की थी, इनके दो बच्चे हैं, दोनों का 2004 में विच्छेद हो गया। इसके पहले उन्होंने 1964 में मेरी मैर्क्यार्ड से शादी की थी, इन दोनों के भी दो बच्चे हैं और इनका 1979 में तलाक हो गया था। आजकल यानी 2010 से कैलिस्टा फ्लोखार्ट हैरिसन फोर्ड की पत्नी हैं और इनका एक बच्चा है।

हैरिसन को अपनी फिल्म ‘द मस्किटो कोस्ट’ बहुत अच्छी लगती है। अब वे पहले से काफी दयालु और नम्र हो गए हैं। मगर अपने देश की नीतियों से अपना मतभेद दिखाने में कोई कोताही नहीं करते हैं। वियतनाम युद्ध के प्रति उनके बड़े कठोर विचार थे। एक बार मौका आया, जब उन्हें सेना में जाना था। उन्हें शारीरिक परीक्षण के लिए बुलावा आया और यह तय था कि वे इसमें सफल रहते और सेना में चुन लिए जाते। उनके पास दो विकल्प थे या तो वे परीक्षण के लिए जाएं अथवा अपनी आपत्ति जताएं। उन्होंने दूसरा विकल्प चुना।

अमेरिकन फिल्मों से संतुष्ट नहीं

अमेरिकन विदेश नीति उन्हें बहुत बेचैन करती है, उन्हें लगता है कि इसके लिए कुछ किया जाना चाहिए। अमेरिकन फिल्म को लेकर भी वे संतुष्ट नहीं हैं। उनके अनुसार आज वहां बहुत सारी फिल्में वीडियो गेम्स की तरह बनती हैं, जबकि फिल्मों को मनुष्य के जीवन तथा संबंधों की कहानी कहनी चाहिए। आज वहां ज्यादातर फिल्में 12-20 साल के बच्चों के लिए बनती हैं।

अधिकतर जॉर्ज लुकस तथा स्टिवन स्पिलबर्ग के साथ काम करने वाले हैरिसन कम-से-कम रिहर्सल करते हैं लेकिन अपने अभिनय का प्रभाव डालते हैं। खुद स्टंट करने का नतीजा हुआ, फिल्म ‘द फुजिटिव’ के स्पेशल ट्रेलर के फिल्मांकन के दौरान उनके घुटने का लिग्मेंट फट गया। उन्होंने जब अभिनय प्रारंभ किया वे सोचते थे कि वे चरित्र अभिनेता बनेंगे और उन्हें मुख्य भूमिका कभी नहीं मिलेगी।

वे सोचते थे कि मुख्य भूमिका उन्हीं लोगों को मिलती है जो देखने में अच्छे होते हैं और जिनके पास प्रतिभा होती है। अक्सर बुद्धिमान लोग खुद को कमतर आंकते हैं।

‘हैरिसन फोर्ड: हॉलीवुड हीरो’ उनकी अधुनातम फिल्म है।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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