कैसे बनाया कैमरा?
स्वयं उसके अनुसार सैन फ्रांसिस्को के भूकंप तथा आग लगने के समय वह मात्र 11 साल का था। उन दिनों चलचित्र बहुत विरल होते थे और उस समय तक उसने कोई फिल्म नहीं देखी थी। मगर इस दुर्घटना के बाद सारे शहर में यह नया चलचित्र दिखने लगा। यह होने लगा पहले के स्टोर अथवा बेसमेंट में या फिर जल गई इमारतों में।
उसने पहली पिक्चर जहां देखी वहां ट्रेन आने और पार होने वाली फिल्म दिखाई जा रही थी। बस इतना ही था। मगर मोर इसके सम्मोहन की गिरफ्त में आ गया। बस वह यही चाहता था। वह जानना चाहता था कैसे ट्रेन आती है और दर्शकों से गुजर जाती है और कोई मरता नहीं है।
उसने हाई स्कूल समाप्त नहीं किया, उसे मूवी थियेटर में आने वाली फिल्म के देखभाल का काम मिल गया। वहीं काम करते हुए उसे एक पुराना छोटा, लगभग खिलौने जैसी एक प्रोजेक्शन मशीन (मोटिओग्राफ का पिछला संस्करण ओप्टिग्राफ) मिल गई। उसने अपने बॉस से वह मांग ली। उसके पास तीस-चालीस फीट के फिल्म रील के टुकड़े थे, मगर लैम्प न था मशीन के सिरे पर दो इंच का प्रोजेक्शन लेन्स था।
उसे उसने एक डार्क बक्से में डाला और उसी से कैमरा बना लिया। जरा भी पैसे मिलते, वह प्रयोग करता। वह चलचित्र बनाने लगा। उसने ट्राइपॉड भी बनाया, इससे उसे अपना कैमरा घुमाने में सहूलियत होने लगी।। डेवलेपिंग रूम भी अपने बेसमेंट में बना लिया।
जल्द ही उसने सेन फ्रांसिको में होने वाली घटनाओं के फोटो लेने शुरू किए। इनको वह ओर्फेअम और इम्प्रेस थियेटर में दिखा कर दस-बीस कमाने लगा। कुछ लोग उन दिनों गौमोन्ट कैमरा प्रयोग कर रहे थे। मोर पंद्रह साल का नहीं हुआ था मगर अपने बनाए कैमरे के साथ सब जगह नजर आने लगा। जल्द स्कूल छोड़ कर पूरे समय यही काम करने लगा।
तेल-कुंओं पर फिल्म
ग्रिफिन नाम का एक आदमी सैलिनास घाटी में तेल का व्यापारी था, वह बेकरस्फील्ड के तेल-कुंओं पर फिल्म बनाना चाहता था। उस आदमी ने मोर को काम पर रखा, मोर को यह काम अच्छा लगा। मोर को इस फिल्म बनने का उद्देश्य नहीं मालूम था। वह गंभीरता से अपना काम करने लगा। लेकिन जब पैटेन्ट्स कम्पनी को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने अपने जासूस मोर के पीछे भेजे।
यह घटना उसके जीवन की सबसे मजेदार घटना है। एक लड़का जो पहले ट्रक ड्राइवर था, उसका सहायक था। उसका काम लोगों को कैमरे के काम के समय दूर रखना था ताकि लोगों को उसके काम की जानकारी न हो और विघ्न भी न पड़े।
उस लड़के ने इन दो जासूसों को भी दूर रखने की कोशिश की। उन दोनों ने मोर को एक दूसरे स्थान पर जा पकड़ा और उसका कैमरा देखने की इच्छा जाहिर की। और लो! मोर ने बेवकूफ की तरह अपना कैमरा बड़े गर्व से उन्हें दिखाया। बस उन्हें और क्या चाहिए था। उन लोगों ने उस पर केस कर दिया। मोर के पिता की कुछ सम्पत्ति थी अत: परिवार नहीं चाहता था वे किसी लफड़े में पड़ें। अत: पिता ने कहा, ‘अच्छा होगा तुम उन लोगों को कैमरा दे दो और यह सब भूल जाओ।’
वैसे भी परिवार उनकी इस संलग्नता से नाखुश था। और वे से फ्रांसिस्को के इस अटर्नी के पास अपना कैमरा लेकर पहुंचे। उसने कहा वह इसे लेगा। मोर का उत्तर था, इसे तुम ले सकते हो मगर एक कैमरे के रूप में नहीं। और मोर ने कैमरा जोर से उसके सामने फर्श पर पटक दिया, जो कई दिशाओं में बिखर गया। ‘यही कैमरा तुम चाहते थे न लो!’ मोर के शब्द थे।
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