ब्रिटिश सरकार के लिए चुनौतियां
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुविधाएं लचर हो रही हैं। कोविड के बाद से इस देश में शिक्षा का स्तर मुख्य धारा में नहीं लौटा है। बुजुर्ग और विकलांग अपनी सुविधाओं में गिरावट देख रहे हैं। ईंधन आपूर्ति विकट है, सरकार का ख़ज़ाना खाली है। ब्रेक्जिट के बाद यूरोपीय संघ से रिश्ते सामान्य नहीं हुए हैं और रूस-यूक्रेन जंग में निरंतर यूक्रेन को समर्थन के कारण ब्रिटेन की अंदरूनी सेहत खराब है।
ब्रिटेन में एक बड़ा वर्ग ऐसा है जो यह मानता है कि रूस यूक्रेन के बीच युद्ध में ब्रिटेन को तटस्थ रहना चाहिए, पर वह अरसे से अमेरिका का पिछलग्गू बना हुआ है। इस बारे में क्रांतिकारी कदम उठाने की जरूरत है।
बतौर प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की चुनौतियां
तो इन स्थितियों में कोई भी प्रधानमंत्री क्या करेगा? इसका जवाब ऋषि सुनक की वह छवि है, जो उन्होंने बोरिस जॉनसन मंत्रिमंडल में बतौर वित्तमंत्री कमाई थी। वे घनघोर कोरोना काल में एकदम मौलिक इकोनॉमिक बेल आउट एक्शन प्लान लेकर आए थे। मध्यवर्ग को इससे बड़ी राहत मिली थी। इन्हीं दिनों उन्होंने होटल उद्योग को पंद्रह हज़ार करोड़ पौंड से भी अधिक की सहायता दी।
अगस्त 2021 में उन्होंने कर्मचारियों तथा अपना रोज़गार कर रहे नागरिकों को दो लाख रुपये प्रति व्यक्ति की सहायता दी। इसके बाद कोरोना के दौरान चौपट हो गए पर्यटन उद्योग को भी 10 हज़ार करोड़ पौंड की मदद दी।
कभी होटल में वेटर और दवाओं के डिलीवरी बॉय का काम कर चुके ऋषि सुनक को मध्यम वर्ग की तकलीफें विचलित करती हैं, इसलिए जब उन्हें बोरिस जॉनसन के मंत्रिमंडल में काम करने का उन्मुक्त अवसर नहीं मिला तो उन्होंने मुक्त होना ही बेहतर समझा था। उनका भारतीय अमीर ससुराल भी उन्हें आम आदमी से दूर नहीं कर सकी और शायद यही वह भरोसा है ,जिसके दम पर ऋषि सुनक गोरों को मुश्किलों से बाहर निकालने का काम कर सकते हैं।
वैसे तो यह अनुमान लगाना तनिक जल्दबाज़ी होगी कि ऋषि की चुनौतियों को सुलझाने में हिन्दुस्तान किस तरह सहायता कर सकता है ,पर यह तो निश्चित है कि भारत ने वर्तमान में चीन के साथ तनावपूर्ण रिश्तों के बावजूद कारोबारी खिड़की खोल कर रखी है। जितना व्यापार विनिमय इस शातिर और धूर्त पड़ोसी के साथ हो रहा है ,उसका आधा भी ब्रिटेन के साथ हो तो उसके लिए प्राणवायु साबित होगा। शायद इसीलिए दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता अब गंभीर शक्ल ले चुका है।
इस समझौते की चर्चा तो बोरिस जॉनसन के कार्यकाल से ही चल रही है। पर, उम्मीद कर सकते हैं कि ऋषि सुनक के कार्यकाल में यह परवान चढ़ेगा। कंप्यूटर टेक्नोलॉजी ,काँच ,लोहा ,स्वास्थ्य ,शिक्षा ,पर्यटन, रक्षा उपकरण और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में बात बढ़ेगी तो दूर तलक जाएगी।
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