1980 की फिल्म ‘डोना फ्लोर एंड हर टू हजबैंड्स’ का दृश्य
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अस्सी के दशक का सिनेमा
सत्तर और अस्सी के दशक में ब्राजील में खूब सारी अच्छी फिल्में बनीं। ब्रूनो बेरेटो की 1980 की फिल्म ‘डोना फ्लोर एंड हर टू हजबैंड्स’ ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ कमाई की। इस फिल्म ने सोनिया ब्रागा को सिने-जगत में स्थापित कर दिया। इसी समय एना कारोलीना ने ‘सी ऑफ रोजेज’, सुजाना एमराल ने ‘द आवर ऑफ द स्टार’ तथा टिजुका यामासाकी ने ‘गैजिनीए: ए ब्राजीलियन ओडिसी’ बनाई। इस तरह सिने-संसार को तीन नायाब महिला निर्देशक प्राप्त हुईं।
इस बीच ब्राजील में वीडियो उपकरणों की सहायता से खूब सारी शॉर्ट फिल्म भी बनीं। फिर आना मुय्लएर्ट ने ‘स्मोक गेट्स इन योर आईज’, ‘द सैकेंड मदर’ तथा ‘डुर्वाल रिकॉर्ड्स’ बनाई। मगर 1989 में ब्राजील सिने उद्योग का भट्टा बैठ गया मात्र 25 फीचर फिल्म वहां बनीं।
अगले साल मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर को बंद कर दिया गया। रातों रात ब्राजील फिल्म उद्योग भहरा गया। 1991 में केवल 9 फीचर फिल्में बनीं और उसके अगले साल मात्र 6। मगर 1998 में फिल्मों का भाग्य फिर पलटा और साल में 40 फीचर फिल्में बनीं।
1997 में ब्रूनो बेरेटो ने ‘फोर डेज इन सेप्टेम्बर’ बनाई जिसमें ब्राजील के गुरिल्ला फाइटर्स अमेरिकी राजदूत का अपहरण कर लेते हैं, राजदूत का जीवन अधर में लटका हुआ है। सरकार सहायता को राजी नहीं है। अपहरणकर्त्ता बदले में 15 राजनैतिक कैदियों को रिहा कराना चाहते हैं।
अगले साल वॉल्टर सैलेस के निर्देशन में ‘सेंट्रल स्टेशन’ आई। इस फिल्म ने बर्लिन फिल्म समारोह में गोल्डेन बेयर जीता। यह फिल्म एक स्कूल टीचर तथा एक युवक की भावात्मक कहानी है। स्कूल टीचर अनपढ़ लोगों के लिए पत्र लिखता है और लड़के की मां हाल में गुजर गई है। दोनों मिल कर लड़के के पिता को खोज रहे हैं जिसे उन लोगों ने देखा नहीं है। इसमें फेर्नान्डा मोन्टेनेग्रो, विनिसिउस डे ओलिवेइरा, मैरिलिआ पेरा ने मुख्य भूमिकाएं की हैं।
ब्राजील का आधुनिक सिनेमा
नई सदी ब्राजील के सिनेमा के लिए बड़ी मुफीद साबित हुई है। आज विश्व, ब्राजील सिनेमा की चर्चा करता है और वहां बनी फिल्मों का बेसब्री से इंतजार करता है। 2002 में बनी फेर्नान्डो मेरेल्लेस तथा कैटिआ लैंड द्वारा निर्देशित ‘सिटी ऑफ गॉड’ ने कमाल कर दिया। इसमें दो लड़के बिल्कुल भिन्न राहों पर चल रहे हैं। इस हार्डहिटिंग थ्रिलर ने 4 ऑस्कर का नामांकन पाया, तरह-तरह के 75 पुरस्कार जीते। एलैक्जेंडर रोड्रिक, लीनड्रो फर्मीनो ने गजब का अभिनय किया है। यह फिल्म अवश्य देखी जानी चाहिए।
नोबेल पुरस्कृत साहित्यकार होसे सारामागो के उपन्यास पर आधारित ‘ब्लाइंडनेस’ फिल्म भी फेर्नान्डो मेरेल्लेस ने 2008 में निर्देशित की। 121 मिनट की इस फिल्म में एक विचित्र बीमारी शहर को घेर लेती है। यह अंधत्व है, मगर श्वेत अंधत्व है। इसमें मुख्य भूमिकाएं जुलिआन मूर, मार्क रुफैलो, एलिस बर्गा ने की हैं। इस फिल्म को 15 पुरस्कार प्राप्त हुए।
आज ब्राजील में करीम ऐनौज (‘मैडम साटा’, ‘दि इनविजिबल लाइफ ऑफ एउरिडिस गुनाओ’), क्लेबर मेन्डैम फिल्हो (‘नेबरिंग साउंड’, ‘इक्वारियस’), गुटो परेन्टे (‘कैनिबाल क्लब’, ‘एंड इन्फेर्निन्हो’), जुलिआनो डोर्नेल (‘कोल्ड ट्रॉफीज’) जैसे कई निर्देशक सक्रिय हैं। इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में ब्राजील के दर्शक और विश्व सिने-दर्शक बेसब्री से ब्राजील से आने वाली फिल्मों का इंतजार करते हैं।
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