1962 की फीचर लेंथ फिल्म ‘क्लेओ फ्रॉम 5 टू 7’
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नारीवादी फिल्म- ‘वन सिन्ग्स, दि अदर डजंट’
1977 में बनी ‘वन सिन्ग्स, दि अदर डजंट’ उनकी एक प्रमुख नारीवादी फिल्म है। इस फिल्म में गाने की इच्छुक एक लड़की पॉम (पौलीन) तथा संघर्ष करती, दो बच्चों की मां सुज़ैन के जीवन को दिखाया गया है। 22 साल की सुजैन बिन ब्याही मां है और अब तीसरी बार गर्भवती है। यह फिल्म फ्रांस में चल रहे नारी आंदोलन की पृष्ठभूमि में बनाई गई है। यह स्त्रियों के गर्भाधान के अधिकार की बात करती है। दो घंटे की इस फिल्म में पंद्रह साल तक दो स्त्रियां बचे रहने के लिए संघर्ष करती हैं।
पौलीन ने 17 साल की उम्र में माता-पिता और स्कूल से छुटकारा पा कर घुमक्कड़ स्ट्रीट सिंगर बनना तय किया है। वह गाती है, ‘टेक द रोड अज इट कम्स/इंवेंट एवेरीथिंग फ्रॉम ए टूजेड/ एंड डोन्ट बी अफ्रेड’। गर्भपात के सामने उसका गाना नारी आंदोलन का अहं हिस्सा बन जाता है जब वह गाती है, ‘बॉयलॉजी’ज नॉट फेट/द डॉक’स लॉज आर आउट ऑफ डेट/माई बॉडी इस माइन’। यह फिल्म स्त्रियों के बहनापा की धारणा को मजबूत करती है। इस फिल्म को इसकी विषय वस्तु और तकनीकी के लिए सराया गया। इसके लिए उन्हें एक पुरस्कार प्राप्त हुआ।
1986 में इनकी निर्देशित फिल्म ‘विद आउट रूफ ओर लॉ’ को भी खूब सराहना मिली। यह अमेरिका में ‘वेगाबॉन्ड’ नाम से रिलीज हुई। इसमें एक किशोरी फ्रांस के ग्रामीण क्षेत्र में घूम रही है, उसी की भावनाओं और सामाजिक समस्याओं का इसमें चित्रण है। असल में एक युवा स्त्री का शरीर खड्ड में जमा हुआ मिलता है। फिल्म फ्लैशबैक तकनीक का प्रयोग करते हुए साथ ही साक्षात्कारों द्वारा उसकी अप्रत्याशित मौत का रहस्य खोलती है। इस पौने दो घंटे की फिल्म को आठ पुरस्कार प्राप्त हुए थे। इसमें सैन्ड्रीन बोनैयर, माचा मेरिल ने भूमिकाएं की हैं।
73 पुरस्कार हैं इनके नाम
1991 में उन्होंने युवाओं पर एक राजनैतिक शॉर्ट फिल्म, ‘जेको डे नैन्टेस’ बनाई। एग्नेस वार्डा को अब तक कुल 73 पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। इन्होंने फीचर फिल्मों के साथ ही खूब सारी लघु तथा डॉक्यूमेंट्री बनाई हैं।
2017 की फिल्म ‘फेसेस प्लेसेस’ इनकी सर्वोत्तम डॉक्यूमेंट्री है, इसमें वे तथा उनके सह-निर्देशक, 30 साल के फोटोग्राफर, स्ट्रीट आर्टिस्ट जेआर फ्रांस के ग्रामीण में भ्रमण करते हैं, दोनों की दोस्ती अनमेल दोस्ती का उदाहरण है। दोनों मिलकर स्थानीय लोगों का ‘लार्जर दैन लाइफ’ चित्रण करते हैं। इसके लिए इन्हें ऑस्कर नामांकन मिला।
एक साल बाद 2018 में अमेरिका की अकादमी ने इन्हें ऑननरी अवॉर्ड दिया। 2020 में इन्हें ऑस्टीन फिल्म क्रिटिक एसोशिएशन का स्पेशल ऑननरी अवॉर्ड प्रदान किया गया। वे पीढ़ियों के लिए प्रेरक फिल्ममेकर रही हैं। आगे भी वे फिल्म बनाने वालों को राह दिखाने में सक्षम हैं।
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