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वन हंड्रेड ईयर्स ऑफ सोलिट्यूड: एक विराट और रोमांचक कथानक आखिर कैसे आकार लेगा पर्दे पर?

सार

मार्केस ने ‘वन हंड्रेड इयर्स ऑफ सोलिट्यूड’ की कहानी अपनी मौसियों-नानियों से सुनी कहानियों के आधार पर बुनी है। करीब साढ़े चार सौ पन्नों की इस गाथा में से नेटफ्लिक्स क्या छोड़ेगा और क्या लेगा, यह तो दोनों सीजन के सारे एपिसोड देखने के बाद ही पता चलेगा और उसके लिए 2025 तक इंतजार करना होगा।
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100 इयर्स ऑफ़ सोलिट्यूड - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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कहते हैं, मृत व्यक्ति की इच्छा का सम्मान होना ही चाहिए, पर बात जीवित लोगों की चलती है। सदैव ऐसा होता नहीं है। नोबेल पुरस्कृत उपन्यासकार गैब्रियल गार्षा मार्केस अपना एक उपन्यास ‘अंटिल अगस्त’ पांच बार लिखने के बावजूद पूरा नहीं कर सके, वे इस आधे-अधूरे उपन्यास को प्रकाशित नहीं करवाना चाहते थे।

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मार्केस के लेखन में लैटिन अमेरिका का जीवन धड़कता है, उनकी इस आवाज ने दुनिया का दिल जीत लिया है। मगर 2014 में उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटों ने अपने पिता की इच्छा को अनदेखा करते हुए ‘पाठकों की प्रसन्नता’ को वरीयता दी और इसे प्रकाशित करवा दिया। जब तक मार्केस की पत्नी मर्सडीज बार्चा भी जीवित नहीं रहीं तो बेटों की बन आई। बेटों के अनुसार मार्केस सदैव अपनी किताबों पर फिल्म बनाना चाहते थे। मगर उनकी पत्नी का कहना था, ‘उन्होंने इतनी बार न कहा कि प्रस्ताव गायब हो गए।’ 2020 में मर्सडीज के गुजरने के बाद बेटे सर्वेसर्वा हो गए।


कुछ दिन पहले बेटों ने 1967 के उनके विश्व प्रसिद्ध उपन्यास ‘वन हंड्रेड इयर्स ऑफ सोलिट्यूड’ पर सीरियल बनाने का अधिकार नेटफ्लिक्स को दे दिया है। फिल्म इसी साल रिलीज होने वाली है। स्मरण रहे मार्केस के दो बेटे हैं, बड़ा बेटा रोड्रिगो फिल्म निर्देशक है, जबकि छोटा गोंजालो ग्राफिक डिजाइनर है। शायद बड़े बेटे रोडिगो को लगा इस उपन्यास का फिल्मांकन किया जा सकता है। यह तो प्रदर्शन के पश्चात् ही पता चलेगा, ऐसा हो सकता है अथवा नहीं और फिल्मांकन कितना अच्छा या खराब हुआ है। इंतजार ही एकमात्र उपाय है। 

‘वन हंड्रेड इयर्स ऑफ सोलिट्यूड’

मार्केस ने ‘वन हंड्रेड इयर्स ऑफ सोलिट्यूड’ की कहानी अपनी मौसियों-नानियों से सुनी कहानियों के आधार पर बुनी है, साथ ही नाना से सुनी शौर्य गाथा यहां मिलती है, बीसवीं सदी के दूसरे दशक का बनाना बूम यहां गुंफित है, जिससे शहर में समृद्धि आई। सच की घटना, बनाना मजदूरों की हड़ताल के समय किया गया सेना द्वारा 1928 का नरसंहार पूरी जीवंतता से यहां उपस्थित है।

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करीब साढ़े चार सौ पन्नों की इस गाथा में से नेटफ्लिक्स क्या छोड़ेगा और क्या लेगा, यह तो दोनों सीजन के सारे एपिसोड देखने के बाद ही पता चलेगा और उसके लिए 2025 तक इंतजार करना होगा। 


अराकटाका के सब लोग इस बात से मुतमुईन नहीं हैं कि मकांडो को पन्नों से उतार कर परदे पर साकार किया जा सकता है। उनका मानना है कि नेटफ्लिक्स के बड़े बजट के बावजूद यह संभव नहीं है क्योंकि इसमें संवाद बहुत कम हैं, ढेर सारे पात्र हैं, जिनके नाम समान है। नॉन लिनियर कथानक कभी अतीत में जाता है, कभी वर्तमान में चलता है। देखना है, मार्केस के खूबसूरत-त्रासद मकांडो और इसके पात्रों को नेटफ्लिक्स कितना जीवंत कर पाता है।

मार्केस के पास इस महान कृति को फिल्म में ढालने के अकूत धन राशि के प्रलोभन के साथ कई प्रस्ताव आए, मगर उन्होंने हां नहीं कही। जादुई यथार्थवाद के लेखक का जन्म अराकटाका में हुआ था और आठ साल की  उम्र तक वे यहीं अपने नाना के घर में रहे थे। हालांकि इसी स्थान की तर्ज पर उन्होंने ‘वन हंड्रेड इयर्स ऑफ सोलिट्यूड’ में एक काल्पनिक स्थान मकांडो सृजित किया है।

अब जब इस उपन्यास का फिल्मीकरण हो रहा है, अराकटाका के लोग आशा कर रहे हैं कि इससे अराकटाका को नवजीवन प्राप्त होगा, प्रसिद्धि मिलेगी। वैसे यहां के सब लोग खुश नहीं हैं कारण नेटफ्लिक्स ने अपने पहले 8 एपिसोड का फिल्मांकन इस स्थान पर नहीं किया है। इसकी शूटिंग एक इंड्रस्ट्रियल सिटी इबागु में हुई है, जो यहां से करीब 430 मील दूर दक्षिण में स्थित है। साथ ही यहां के निवासी इस बात को बखूबी जानते हैं, जो भी दर्शक सिरीज से प्रेरित होगा, वह यहीं आएगा, कारण है, मकांडो का दिल यहीं बसता है।

अराकटाका में मार्केस की प्रसिद्धि के कारण पर्यटक आते रहते हैं। अब शक नहीं कि इनकी संख्या में वृद्धि होगी। जब वे यहां आएंगे तो वे यहां के लोगों की दयालुता, एकता और जो कुछ भी मार्केस ने कोलंबियन करेबियन के विषय में कहा है, उसे वैसा ही पाएंगे। यहां आने वाले लोग प्रेम से स्वीकार किए जाएंगे।

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नेटफ्लिक्स पर ‘वन हंड्रेड इयर्स ऑफ सोलिट्यूड’ सीरियल को दो भाग में बनाया जा रहा है। 11 दिसम्बर 2024 को पहला एपिसोड रिलीज हो रहा है। पहले सीजन में 8 एपिसोड हैं। - फोटो : Adobe Stock
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में लैटिन अमेरिकन साहित्य के प्रोफेसर लोपेज कैल्वो के अनुसार गाबो कभी नहीं चाहते थे कि उनकी प्रसिद्ध किताब पर फिल्म बने। गाबो चाहते थे कि पाठक चरित्रों को अपनी कल्पना में गढ़ें। मार्केस के अनुसार इसकी कहानी 100 घंटे में में कही जा सकती है, वह भी जब स्पैनिश में कही जाए और कोलोम्बिया में फिल्माई जाए।

अराकटाका की प्रत्येक सड़क पर घनी मूछों वाले मुस्कुराते गाबो की आकृति मिलती है, रचनाकार और उसके पात्रों की मर्तियां सारे शहर में लगी हुई हैं। स्थानीय ट्रेन स्टेशन को इंस्टाग्राम-फ्रैंडली स्कीम के तहत चमकीले पीले, सफेद एवं फिरोजी रंगों से सजाया गया है। जहां उनके पिता काम करते थे, उस टेलेग्राफ ऑफिस को संग्राहलय में परिवर्तित कर दिया गया है। उनके बचपन के घर का पुनर्निर्माण कर उसमें पुरानी वस्तुएं ज्यों-कि-त्यों रख दी गई हैं।
 

11 दिसम्बर को रिलीज होगा सीरियल

नेटफ्लिक्स पर ‘वन हंड्रेड इयर्स ऑफ सोलिट्यूड’ सीरियल को दो भाग में बनाया जा रहा है। 11 दिसम्बर 2024 को पहला एपिसोड रिलीज हो रहा है। पहले सीजन में 8 एपिसोड हैं। लैटिन अमेरिका के इतिहास में यह सर्वाधिक खर्चीला टीवी प्रोडक्शन है। अब चूंकि 16 एपिसोड हैं, तो जाहिर-सी बात है, निर्देशक भी कई हैं। उपन्यास का नाम स्पैनिश भाषा में ‘सिएन अनियोस दि सोलिदाद’ है।

नेटफ्लिक्स सीरियल के पहले एपिसोड के निर्देशक एलेक्स गार्षा लोपेज हैं। स्क्रीनराइटर कॉर्डिनेटर के रूप में सैंटिआयो एस्पिनोसा-एरिस्टिजैबाल का नाम क्रेडिट में है। इसमें छ: एपिसोड में औरेलिआनो बुनेदिया की भूमिका में एडुआर्डो दि लोस रेयेस, पहले एपिसोड में कर्नल औरेलिआनो बुनेदिया की भूमिका में क्लौडिओ कैटानो, प्रथम एपिसोड में उर्सुला की भूमिका में सुसैना मोरालेस, पहले एपिसोड में पेट्रोनिला की भूमिका में एला बेसेरा हैं।

पहले आठों एपिसोड का संगीत कैमोलो सैनाब्रिया ने दिया है। इस संगीतज्ञ को सात  पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। ‘समर व्हाइट’ तथा ‘ला एरेरिया’ जैसी फिल्मों की सिनेमाटोग्राफर फ्रेंच-मैक्सिकन सरस्वती हेरेरा ने पहले एपिसोड का कैमरा संभाला है। 

इसमें शक नहीं है कि गैब्रियल गार्षा मार्केस के जादू और ‘वन हंड्रेड इयर्स ऑफ सोलिट्यूड’ की ख्याति के कारण पहले दिन ही नेटफ्लिक्स पर दर्शक टूट पड़ेंगे। प्रथम दिन की इस सफलता को खूब भुनाया जाएगा। असल सफलता समय की छलनी में छन कर आती है। देखना है, ‘वन हंड्रेड इयर्स ऑफ सोलिट्यूड’ का जादुई यथार्थवाद नेटफ्लिक्स पर कितना जादू जगाता है।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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