नोबेल पुरस्कृत साहित्यकारों के विषय में पढ़ते हुए एक बात पर ध्यान गया। अधिकांश ने अपने बचपन में अपने परिवार के किसी-न-किसी सदस्य से कहानियां सुनी थीं। आगे चल कर ये कहानियां उनके लेखन का खाद-पानी बनीं। इससे कहानियों के महत्व का भान होता है। ये कहानियां अक्सर वाचिक परम्परा का अंग होती थीं। अधिकतर बच्चों को उनकी नानी या दादी कहानियां सुनाती हैं। मैंने बचपन में अपनी एक बुआ और अपनी माताजी से कहानियां सुनी थीं।
उनकी पहली किताब ‘द विडो’ बाद में ‘द लैंड ऑफ सिन’ नाम से प्रकाशित हुई। राजनैतिक कारणों से उन्हें 1975 में सहायक संपादक का काम छोड़ना पड़ा। फिर उन्होंने एकाध काम प्रारंभ किए मगर बीच में ही छोड़ दिए। 1966 में ‘पोसिबल पोयम्स’ के साथ साहित्य जगत में उनकी वापसी हुई। उन्होंने एक बार फिर से लिखना प्रारंभ किया तो लिखते चले गए, एक-के-बाद-एक काम आते चले गए।
‘प्रोबबली जॉय’, ‘फ्रॉम दिस वर्ल्ड एंड दि अदर’, ‘द ट्रेवल्स बैगेज’ के साथ अखबारों केलिए लेखों के दो संग्रह ‘मैनुअल ऑफ पेंटिंग एंड कैलिग्राफी’ नाम से आए। ‘रीजन फॉर्म द ग्राउंड’, ‘बाल्टाजार एंड बिलामुंडा’, ‘इयर ऑफ द डेथ ऑफ रिकार्डो राइस’ ने उन्हें विश्वख्याति दी। ‘हिस्ट्री ऑफ द सीज ऑफ लिस्बन’, ‘द स्टोन राफ्ट’ का खूब स्वागत हुआ।
मगर ‘द गॉस्पल अकॉर्डिंग टू जीसेस क्राइस्ट’ आते ही साहित्य एवं धार्मिक जगत में तूफान आ गया। इसी कारण उन्हें पुरस्कार मिलने पर भी धर्म के ठेकेदारों को सर्वाधिक परेशान हुई।
‘इन नोमिने डेई’ लिखते हुए उन्हें ध्यान आया हम अंधे हैं। वे तत्काल ‘ब्लाइंडनेस’ लिखने बैठ गए। इसमें होसे सारामागो अंधत्व की मात्र शारीरिक परेशानियों को ही नहीं उठाते हैं बल्कि मनोवैज्ञानिक समस्याओं को भी बड़ी गहनता, शिद्दत एवं खूबसूरती के साथ प्रस्तुत करते हैं। यहां एक अनजान शहर में सारे व्यक्ति एक-एक कर अंधेपन का शिकार हो जाते हैं, केवल एक पात्र को छोड़ कर। यही पात्र उन सबके संरक्षक, अगुआई एवं कथावाचक का काम करता है।
अंधत्व के कारण समस्त कार्यव्यापार, पूरा सिस्टम ठप्प पड़ जाता है। पूरी व्यवस्था भंग हो जाती है। सबको खाने के लाले पड़ जाते हैं। खूब अराजकता फैल गई। उन्होंने यह लिखा ताकि पढ़ने वाले यह याद कर सकें कि हम जिंदगी का अपमान करते हैं। इसे विकृत करते हैं और इसका परिणाम भी भुगतना पड़ता है। दुनिया के बलशाली लोग प्रतिदिन मनुष्य-जीवन का अपमान करते हैं, फल सबको भोगना पड़ता है।
होसे सारामागो के ‘रेज़्ड फ्रॉम द ग्राउंड’, ‘कैन’, ‘द स्टोन राफ्ट’, ‘सीइंग’, ‘डैथ ऐट इंटरवल्ज़’, ‘हिस्ट्री ऑफ द सीज़ ऑफ लिस्बन’, ‘ब्लाइंडनेस’ इत्यादि विश्व क्लासिक उपन्यास की श्रेणी में आते हैं। बेचैन करने वाली कृति ‘ब्लाइंडनेस’ जैसा कोई उपन्यास समस्त विश्व साहित्य में विरले मिलेगा। अंधत्व लोगों को सीमित करता है। होसे देखने एवं अवलोकन और निरीक्षण के अंतर की ओर हमारा ध्यानाकर्षण करते हैं।
यह एक एलिगरी है, जो सामाजिक एवं राजनैतिक संकट की ओर इंगित करती है। मान लीजिए कभी भविष्य में किसी कारण से हमारी सारी बुनियादी प्रणाली ठप्प हो जाए, तो आज की सुविधाभोगी आबादी कैसे जी सकेगी? तब शायद हमें प्रकृति का महत्व ज्ञात होगा। वैसे शक नहीं, हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हम सब सच में अंधे हैं।
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