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उपन्यास आइस-कैंडी
उपन्यास आइस-कैंडी, चिड़िया, पिंजड़ा आदि कई प्रतीकों का प्रयोग करता है। आइस-कैंडी एक ओर मीठी होती है दूसरी ओर ठंडी भी। यह जीवन की तरह क्षणभंगुर होती है। आइस-कैंडी-मैन एक ओर लुभावना है वह आया और लेनी के जीवन में खुशी लाता है दूसरी ओर बहुत क्रूर है, प्रतिकार में आया को अपहृत कर उसे वेश्यालय पहुंचाता है। चिड़िया स्वतंत्रता का प्रतीक है वह पिंजड़े में है। यहां भी आइस-कैंडी-मैन का दोहरा चरित्र नजर आता है। वह उन्हें पिंजड़े से उड़ा कर स्वतंत्र करता है अर बाद में आया को कैद करता है।
माता-पिता की नजरों से दूर लेनी औरत-मर्द के शारीरिक मिलन को देखती है, समय से पहले, सामान्य तौर पर वयस्क होने के पहले उसे इन बातों का पता चलता है। आया के अपहृत होने पर उसके व्यवहार में परिवर्तन आता है। उसका घर वास्तव में बंट जाता है।
विभाजन का अल्पसंख्यकों और खासतौर स्त्रियों पर असर वह देखती है, नतीजन वह एक बच्ची नहीं रह जाती है, इसलिए यह उपन्यास ‘आइस-कैंडी-मैन’ (‘क्रैकिंग इंडिया’) ‘कमिंग ऑफ एज’ का उपन्यास है।
भारत विभाजन होता है, लाहौर जल रहा है। अपहृत आया लेनी की गॉडमदर के प्रभाव से जब वह खोजी जाती है, वह रेडलाइट इलाके में मिलती है। विभाजन के हादसे के बाद न लेनी वही बच्ची रहती है और न भारत भारत रह जाता है, अब भारत एवं पाकिस्तान दो भिन्न देश हैं।
असल में भारत औपनिवेशिक काल में ही घायल हो गया था, उसका विभाजन काफी पहले प्रारंभ हो गया था। उपन्यास शुरु से लोगों के नाम, उनके कपड़ों और केश विन्यास में उनकी धार्मिक भिन्नता दिखाता है। समय के साथ ये विभाजन बढ़ते जाते हैं, नफरत में बदल जाते हैं।
जो आइस-कैंडी-मैन उसकी आया और उसे पसंद करता था, वही आगे चल कर आया की बरबादी का कारण बनता है। लेनी मुसलमान द्वारा सिख को मारा जाना देखती है, पठान को मरते देखती है। उसकी बुआ अमृतसर में रहती है, वह जब आती है तो भारत में मारकाट की बात लेनी को पता चलती है। राजनैतिक एवं सामाजिक हलचल के कारण 1947 और उसके एकाध साल आगे-पीछे इस भूखंड में क्या कुछ नहीं हुआ?
धर्म के नाम पर देश का विभाजन हुआ। लाखों लोगों का जीवन तबाह हो गया, हादसे से कितने अपना मानसिक संतुलन खो बैठे, कितनों को जबरदस्ती अपनी धार्मिक पहचान बदलनी पड़ी। यह सब देखने के बाद बच्ची पहले वाली बच्ची कैसे रह सकती थी, कैसे कायम रहती उसकी मासूमियत! समय से पहले लेनी परिपक्व हो जाती है।
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