क्या प्रकृति के साथ खिलवाड़ करके विकास जरूरी है?
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जानकारों की मानें, तो फोरलेन हाइवे बनाने के लिए पहाड़ों को 90 डिग्री के एंगल में काटा गया है। वहीं, जो सड़कें बनाई गई हैं उनके किनारों पर पेड़ भी नहीं हैं। यही नहीं कई विशाल पेडों को काट तक दिया गया है। दूसरी तरफ, पहाड़ों में अब पहले की तरह छोटे और लकड़ी के घर नहीं बनते। बल्कि, अब यहां विशाल इमारतें बनाई जा रही हैं और इसके लिए भी पहाड़ों को काटा गया। इनमें आमतौर पर घर, रेस्तरां और बड़े-बड़े होटल बनते हैं।
क्या प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर विकास जरूरी?
सरकारें पहाड़ों पर बड़ी-बड़ी टनल बना रही है और कई बन भी चुकी हैं, सड़कें डबल या चौड़ी हो रही है और कुल मिलाकर विकास हो रहा है। टनल बनाने के लिए विस्फोट किया जाता है और कई भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पहाड़ों पर कंपन होता है।
पर क्या प्रकृति के साथ खिलवाड़ करके विकास जरूरी है? आखिर ये कैसा विकास है जो आम लोगों से उनकी जिंदगियां छीनने पर अमादा है, क्योंकि पहले के लोगों की मानें तो पहाड़ों पर न तो इतनी लैंडस्लाइडिंग होती थी और न ही जमीन धंसती थी। पर अब ये सब हो रहा है और इसका कहीं न कहीं कारण बेहिसाब पहाड़ों की कटाई है।
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