रिटायरमेंट का नाम आते ही परिवार में पहला सवाल यही उठता है-‘अब हर महीने का खर्च कैसे चलेगा?’ राम किशोर जी की चिंता भी कुछ अलग नहीं है। यह दुविधा लगभग हर उस व्यक्ति के मन में पनपने लगती है, जिसकी नौकरी का आखिरी पड़ाव करीब आ रहा होता है। पर, घबराने के बजाय अगर समय रहते कुछ जरूरी बातों पर ध्यान दिया जाए और सही वित्तीय योजना बनाई जाए, तो इन आशंकाओं को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
एक पक्का बजट हो
सबसे पहले एक डायरी लीजिए और अपने हर महीने के पक्के खर्चों की एक लिस्ट बनाइए। जब आप एक-एक पैसे का वास्तविक बजट बना लेंगे, तो आपको खुद साफ दिखने लगेगा कि आपकी जेब से कितना जा रहा है और आपको हर महीने कितने रुपयों की जरूरत है।
नियमित आय का इंतजाम
जमापूंजी का एक छोटा हिस्सा ऐसी एफडी में रखें, जिसे आप नेट बैंकिंग या चेक से तुरंत निकाल सकें। दूसरा हिस्सा नियमित आय के लिए निवेश करें। पूंजी का बड़ा भाग एससीएसएस और पोस्ट ऑफिस की मंथली स्कीम में बांटकर लगा दें। इससे हर महीने घरेलू खर्च संभालना आसान होगा। बचे हुए पैसे को हाइब्रिड या बैलेंस्ड म्यूचुअल फंड में किसी एक्सपर्ट की सलाह से लगा सकते हैं, ताकि भविष्य में जब महंगाई बढ़े, तो आपका पैसा भी थोड़ा बढ़ सके। जब तक आप और आपकी पत्नी हैं, खर्चों पर नियंत्रण खुद के हाथों में रखिए।
अनुभव का इस्तेमाल करें
चिंता करने से बेहतर है कि अपने बरसों के अनुभव का इस्तेमाल करें। सेहत इजाजत दे, तो आप अपने क्षेत्र के लोगों को सलाह (कंसल्टेशन) दे सकते हैं, बच्चों को पढ़ा सकते हैं, या कोई पार्ट-टाइम काम कर सकते हैं। इससे एक तो आपकी अतिरिक्त आमदनी होगी और आप दिमागी रूप से चुस्त-दुरुस्त भी रहेंगे।
स्वास्थ्य को खर्च नहीं, निवेश समझें
ढ़ती उम्र में सेहत से जुड़ी चुनौतियां और उनका खर्च सबसे बड़ा सिरदर्द बनते हैं। इसलिए, अपनी सेहत का ख्याल रखिए। समय पर रूटीन चेकअप करवाते रहिए। अगर आपके पास एक अच्छा स्वास्थ्य बीमा नहीं है, तो उसके लिए अलग से एक फंड जरूर रखिए।
पत्नी से कहिए कि ‘अब चिंता की कोई बात नहीं है, मैंने सब प्लान कर लिया है।’ दोनों साथ मिलकर एक छोटा-सा बजट बनाइए, और अपनी जमा-पूंजी को सही जगह व्यवस्थित कीजिए। फिर देखिए, यह रिटायरमेंट का जीवन आप दोनों के लिए बेहद सम्मानजनक और निश्चिंतता से भरा होगा।