नये संकल्पों के साथ हिम्मत से करें मुसीबतों का सामना
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नववर्ष में आशा की जानी चाहिए कि देश से गरीबी खत्म हो जाए, भ्रष्टाचार का भूत शिष्टाचारियों को सताना बंद कर दे। महंगाई डायन सरकार के काबू में आ जाएं। आतंकवादियों का हृदय परिवर्तन हो जाए और वे आतंक का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर दें। नेता वायदों की कबड्डी खेलना बंद करें और देश के उत्थान का संकल्प लें। युवापीढ़ी फैशन और व्यसन से हाय-तौबा करके आदर्श नागरिक बनकर देश के नव निर्माण में अपनी किंचित मात्र ही सही आहुति प्रदान करे।
घरेलू हिंसा का दौर थमे, कोई फुटपाथ पर सोने को मजबूर न हो और किसी का आत्मगौरव व आत्मविश्वास शर्मिंदा न हों। सबके भुजबलों में इतनी शक्ति व सामर्थ्य जगे कि वे जीवन कि हर परिस्थिति का पूरे जोश के साथ मुकाबला कर सके। बुजुर्गों का हर घर में सम्मान हों और बहुओं को दहेज के नाम पर नहीं जलाया जाएं। हर समस्या का समाधान हो और हर कोई जीवन के प्रति बेहद ही सकारात्मक व आशावादी दृष्टिकोण से सोचना-देखना शुरू कर दें।
नये संकल्पों के साथ हिम्मत से करें मुसीबतों का सामना
जिंदगी का मतलब दुखों का घर है। यहां महज गरीब ही नहीं अमीर भी अपने-अपने दुखों से परेशान हैं। ऐसे में हालात और जीवन की विषमता से घबराकर नहीं अपितु साहस और हिम्मत से लड़कर-भिड़कर हाथों की तकदीर और माथे के मुकद्दर को परिवर्तित करने का संकल्प लेना होगा। कुछ छ्द्म राष्ट्रवादी और कट्टरपंथी यह भी कहते और सुने जा सकते हैं कि यह नववर्ष अंग्रेजों का दिन है। इसे भारतीयों को मनाने से बचना चाहिए। हां, यह सच है कि यह नववर्ष अंग्रेजों का ही है, क्योंकि यह ग्रेगोरियन कैलेंडर पर आधारित है। लेकिन यहां विरोधाभास यह भी है कि अंग्रेजों का तो हमारे पास बहुत कुछ है हम उसको त्यागने की कभी जरूरत महसूस नहीं करते। और वैसे भी इंसान को जहां कई से भी अच्छी व सच्ची बातें सीखने को मिलें उसे अपने व्यावहारिक जीवन में अंगीकार करते जाना चाहिए।
खुशी से मनाएं नये साल का उत्सव
जहां एक दिन पूरी दुनिया नववर्ष को लेकर खुशियां का उत्सव मना रही हो तो वहां हमें भी पीछे नहीं रहना चाहिए। नववर्ष ऐसे समय में दस्तक देता है जहां शीतलहर व समुद्र के ठंडे होते जल के कारण कई जीव-जंतु बेमौत मर रहे होते हैं। लेकिन इसी विषम व दुख की घड़ी से निकलकर परिस्थितियों से लड़ने का साहस बांधने के लिए विश्व के हर कोने में नववर्ष मनाया जाता है। नववर्ष को लेकर साहित्य जगत के कवियों व लेखकों ने भी नये साल को नये उत्सव के विशेषणों से सुशोभित किया है। इसी संदर्भ में हालावादी कवि हरिवंश राय बच्चन की ये पंक्तियां नववर्ष को हर किसी के समक्ष एक संदेश के रूप में प्रस्तुत करती प्रतीत होती है -
नव वर्ष, हर्ष नव,
जीवन उत्कर्ष नव।
नव उमंग, नव तरंग,
जीवन का नव प्रसंग।
नवल चाह, नवल राह,
जीवन का नव प्रवाह।
गीत नवल, प्रीति नवल,
जीवन की रीति नवल,
जीवन की नीति नवल,
जीवन की जीत नवल !
अभी तो मीलों चलें हम और हमें मीलों चलना है। क्योंकि चलना ही नियति है। आप सभी को नये साल 2019 की शुभकामनाएं।
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