रामनवमी पर बंगाल में शोभायात्रा पर उपद्रवियों ने पथराव कर दिया।
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न्याय मिलना तो दूर तुष्टीकरण के चक्कर में पीड़ितों के दर्द पर मरहम लगाने से भी रोकने का कुकृत्य कांग्रेसी सरकार करती है। रामनवमी के दिन तो हिंसक भीड़ ने देशभर में 10 स्थानों पर राम भक्तों पर हमले किए।
गुजरात के हिम्मतनगर और खंभात में दंगाइयों ने रामनवमी के जुलूस पर पथराव किया। इसमें तमाम लोग घायल हुए दुकानों को क्षतिग्रस्त किया गया और वाहनों में आग लगा दी गई। मध्य प्रदेश के खरगोन शहर में पथराव, आगजनी और हिंसा की घटनाएं हुईं। खरगोन में जब रामनवमी के जुलूस पर हमला हुआ तो कांग्रेस समेत तमाम सेकुलर सन्नाटा साध गए, किंतु जब शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने दंगाइयों के अवैध निर्माणों को धराशाई किया तो सारे सेकुलर एक स्वर में स्यापा करने लगे।
झारखंड में लोहरदगा में रामनवमी के जुलूस पर सिरोही गांव के पास दंगाइयों ने हमला बोल दिया जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और 12 लोग जख्मी हो गए। पश्चिम बंगाल के बांकुरा में भी इसी तरह जब रामनवमी का जुलूस पहुंचा तो दंगाइयों ने उसे निशाना बनाया।
मचान ताला के पास जब जुलूस मस्जिद के सामने से गुजरा तो दंगाइयों ने राम भक्तों पर पथराव शुरू कर दिया। गोवा के वास्को शहर में भी इसी तरह रामनवमी के जुलूस पर मुस्लिम दंगाइयों द्वारा सुनियोजित हमला किया गया। रात 8:30 बजे जब रामनवमी की शोभायात्रा पर पहले से घात लगाए बैठे लोगों ने शोभा यात्रा को अपना निशाना बनाया।
बिहार के मुजफ्फरपुर में भी रामनवमी की शोभायात्रा में घुसकर दंगाइयों ने हुड़दंग मचाया, प्रतिक्रिया स्वरूप कुछ राम भक्तों ने वहां की मस्जिद पर भगवा झंडा लहरा दिया। शोभा यात्रा पर किए गए हमले की किसी ने निंदा नहीं की, परंतु मस्जिद पर भगवा लहराने पर राष्ट्रीय स्तर पर हंगामा खड़ा किया गया और पाकिस्तान प्रायोजित सोशल मीडिया के तमाम हैंडल से इस पर दुष्प्रचार फैलाया गया। मुंबई में मानखुर्द के शिवाजी नगर इलाके में भी रामनवमी के जुलूस पर हमला हुआ।
ट्विटर पर #Muslimarea ट्रेंड कर रहा है, जो इलाके मुस्लिम बहुल हैं वहां से हिंदुओं के जुलूस निकलने पर हमले का क्या संकेत है? क्या हिंदुस्तान में मुस्लिम एरिया जैसा कोई क्षेत्र होना चाहिए? क्या भारत में अल्पसंख्यक कहलाकर तमाम सुविधाएं झपटने वाले मुसलमानों को अतिवाद पर आमादा होना चाहिए?
रामनवमी की शोभा यात्रा पर इतने अलग-अलग हमले आखिर क्यों? मुस्लिम एरिया जैसे शब्द अनायास ही ट्विटर पर ट्रेंड नहीं कर रहा, इसके पीछे एक सुनियोजित षड्यंत्र है। मद्रास हाईकोर्ट में बीते दिनों एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें याची का आवेदन था कि मुस्लिम एरिया में हिंदुओं के जुलूस को प्रतिबंधित किया जाए और वहां मुसलमानों की भावनाओं को आहत होने से बचाने के लिए हिंदू मंदिरों पर रोक लगाई जाए।
किसी भी धार्मिक समूह द्वारा किसी भी तरह की असहिष्णुता पर रोक लगाई जानी चाहिए।
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तमिलनाडु के पेरंबलूर जिले में कलाथूर मुस्लिम बहुल इलाका है। यहां का मुस्लिम समुदाय 2012 से ही हिंदू मंदिरों और शोभायात्रा को प्रतिबंधित करने की मांग करता रहा है। इसी मांग को लेकर मुस्लिम कट्टरपंथियों ने हिंदू त्योहारों को 'पाप' करार देते हुए मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
इस मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस एन किरूबाकरण और जस्टिस वेलमुरूगन की दो सदस्यीय पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए इसे मुस्लिम समुदाय की असहिष्णुता करार दिया। असहिष्णुता को देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के लिए खतरनाक करार दिया।
मद्रास हाईकोर्ट ने टिप्पणी की-
"केवल इसलिए एक धार्मिक समूह विशेष इलाके में हावी है इसलिए दूसरे समुदाय को त्योहारों को मनाने या उस एरिया की सड़कों पर जुलूस निकालने से नहीं रोका जा सकता। अगर धार्मिक असहिष्णुता की अनुमति दी जाती है तो एक धर्मनिरपेक्ष देश के लिए अच्छा नहीं है।
किसी भी धार्मिक समूह द्वारा किसी भी तरह की असहिष्णुता पर रोक लगाई जानी चाहिए। जिन इलाकों में दशकों से संप्रदाय विशेष के उत्सव हो रहे हैं ,उन्हें धार्मिक भावना भड़कने के नाम पर रोका नहीं जा सकता।
गलियों और सड़कों से निकलने वाले जुलूस को सिर्फ इसलिए प्रतिबंधित करने की मांग को नहीं स्वीकारा जा सकता क्योंकि अमुक इलाका मुस्लिम बहुल है और वहां से हिंदू त्यौहार और शोभायात्रा नहीं निकल सकती।"
न्यायालय ने तर्क दिया कि-
यदि आज मुसलमानों की इस याचिका को स्वीकार लिया गया तो आने वाले दिनों में क्या हिंदू बहुल देश में मुसलमान अपने उत्सव शांतिपूर्ण ढंग से मना पाएंगे? इस तरह के विरोध से धार्मिक लड़ाई झगड़े बढ़ेंगे, दंगे भड़केंगे। निर्दोषों की जान जाएगी और देश का नुकसान होगा।
जो भावना तमिलनाडु के मुस्लिम बहुल मोहल्ले की है वही भावना उन 10 मुहल्लों की भी है जहां पर रामनवमी के जुलूस पर हमले किए गए। किसी मुस्लिम बहुल देश में कोई अन्य समुदाय इस तरह की शर्तें रख सकता है क्या?
किसी ईसाई देश में कोई अन्य संप्रदाय ईसाइयों के पर्वों को रोकने की मांग कर सकता है क्या? क्या यह हिंदुओं के सहिष्णुता की पराकाष्ठा नहीं है! फिर भी अमेरिकी सांसद इलहान ओमर को लगता है कि भारत में मुसलमानों के साथ भेदभाव हो रहा है।
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