कड़वी नीम की पत्तियां चबाने के बाद जिस चीज का इंतज़ार होता था वह था ठंडा, मीठा और हल्का खट्टा श्रीखंड। साथ ही बनती थी मीठी और नमकीन घी से तर पूरनपोली। नमकीन पूरनपोली इसलिए ताकि मीठे और नमकीन का बैलेंस रहे। साथ ही माँ बताती कि गुड़ी पड़वा पर कोई भी चीज स्टफिंग करके यानी भर कर बनाने का रिवाज है, ताकि साल-भर घर मे अन्न-धान भरापूरा रहे।
सुबह जल्दी नहा-धोकर हम निकलते आस-पड़ोस के महाराष्ट्रीयन घरों में सजी गुड़ी को देखने। यह महाराष्ट्र की परंपरा का अभिन्न अंग है। सारे घरों के चक्कर लगाने के बाद तय किया जाता कि कौन से घर की गुड़ी ज्यादा सुंदर है। फिर हम बच्चे पूरी कॉलोनी में घू मकर उस नाम का ढिंढोरा पीटते।
भारतीय त्योहार भावनाओं का समंदर हैं। इनसे अनमोल और खूबसूरत यादें जुड़ी होती हैं। जो सभी को परिवार और समाज से भी जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए यहां हर त्योहार सबका साझा होता है। जब पड़ोस से आई पूरनपोली की महक और मिठास मन मे घुलती है तो त्योहार का आनंद और भी बढ़ जाता है। उम्मीद करें कि यह नववर्ष भी सुखद खबरें लेकर आएगा और विगत की कड़वी यादों पर मिठास की परत चढ़ा जाएगा।
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