मन्नु बताते हैं कि 2003 में वे एथेंस एमबीए की पढ़ाई करने आए थे।
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कैसे बदली मन्नु की किस्मत?
मन्नु बताते हैं कि 2003 में वे एथेंस एमबीए की पढ़ाई करने आए थे। दो साल की पढ़ाई में रोज़मर्रा के ख़र्च निकालने के लिए उन्होंने छोटे-मोटे काम तलाशना शुरू कर दिया। लेकिन नौकरी तलाशने के लिए जाते तो ग्रीक भाषा(स्थानीय भाषा) की जानकारी नहीं होने का ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ता। कई जगह भटकने पर भी केवल अंग्रेज़ी के बलबूते बात नहीं बन पाई। इसके बाद गाड़ी की सफ़ाई, पर्चे बांटने, होटल में साफ़ सफ़ाई जैसे काम करने पड़े।
इससे वहां रहने और गुज़र बसर करने का जुगाड़ हो गया। बाद में एक भारतीय रेस्तरां मालिक ने उन्हें अपने यहां काम पर रख लिया। जहां उनकी मेहनत से सभी प्रभावित हुए। इसके बाद उनके क़िस्मत की गाड़ी दौड़ पड़ी। साल 2010 में आई वैश्विक आर्थिक मंदी ने ग्रीस के व्यवसायियों को भी ख़ासा प्रभावित किया था।
दो साल में इससे उबरने और अपनी भाषाई पकड़ मज़बूत कर उन्होंने रेस्तरां व्यवसाय में फिर से मेहनत शुरू की। इसके बाद जयपुर पैलेस में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाते हुए एथेंस के बाद मैकनोज और संतोरीनी तक व्यवसाय को बढ़ाया। आज जयपुर पैलेस लोकप्रिय इंडियन रेस्तरां के नाम से जाना जाता है।
तेजी से आगे बढ़ रहे हैं मन्नु
मन्नु की निगरानी में यहां का रेस्तरां फल फूल रहा है। यहां काम करने वाले भारतीयों में कुछ हरियाणा से हैं। जबकि नेपाल और पाकिस्तान के लोग भी उनके कीचन का हिस्सा हैं। मन्नु अपने अनुभव से बताते हैं कि एक देश के लोगों को एक साथ काम पर रखना सिरदर्द से ज्यादा कुछ नहीं। लेकिन जब भारत और पाकिस्तान के लोग एक साथ मिलकर काम करते हैं तो माहौल ख़ुशनुमा और शांतिपूर्ण रहता है।
वे बताते हैं कि ग्रीस में फैले उनके रेस्तराओं में क़रीब 70 स्टाफ़ हैं। जब कभी एक देश के कर्मचारियों को साथ में रखा जाता है तो आपसी मतभेद, अनबन जैसे मामले सामने आते रहते हैं। लेकिन जब भारत-पाक के लोगों को साथ में रखने और एक ग्रुप बनाकर काम लेना शुरू किया तो परिणाम सकारात्मक और सुखद था। उनके बीच खटास या मनमुटाव की घटना कभी नहीं हुई। उनके स्टाफ़ में नेपाली भी हैं, जिनकी फ़ैशनपरस्ती और साफ़ सफ़ाई के तरीक़ों से सभी प्रभावित होते है और सीखते हैं।
संतोरीनी जयपुर पैलेस की साज सज्जा देखकर आपको मुरथल, हरियाणा के फेमस ढाबों की याद आ जाएगी। रेस्तरां के आगे साईं बाबा और गणेश -लक्ष्मी भगवान की बड़ी पेंटिंग लगी हुई है तो रेस्तरां के अंदर पारंपरिक भारतीय परिधान पहने किसी नायिका की तस्वीर है। अंदर भारत दर्शन वाले पोस्टर लगे भी दिख जाएंगे।
दिलचस्प यह है कि मन्नु ख़ुद विशेष धार्मिक नहीं हैं लेकिन लोगों के बीच प्योर इंडियन रेस्तरां की छाप गहरी करने के लिए उन्होंने रेस्तरां में भगवान की पेंटिंग पोस्टर का सहारा लिया है। वे मुस्कुराते हुए बोलते हैं साईं बाबा की तस्वीर लोगों को हमारे रेस्तरां की तरफ़ खींचने का काम करती है। इन तस्वीरों से हमारे काम और नाम दोनों को बल मिलता है। लोगों को हमारे विशुद्ध भारतीय होने का प्रमाण मिलता है।