पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक सोशल मीडिया पोस्ट से लक्षद्वीप एकाएक विश्व पर्यटन मानचित्र पर आ गया था। इसमें कोई दो राय नहीं है कि लक्षद्वीप बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थल बनने की सभी खूबियां रखता है। वो पड़ोसी देश मालदीव को आसानी से पर्यटन में पछाड़ सकता है, लेकिन भारत के पर्यटन नेकलस में गोवा भी एक अहम हीरा है। मालदीव के मुकाबले गोवा न केवल देसी-विदेशी पर्यटकों को लुभाता है, बल्कि गोवा की प्रमोद सावंत सरकार राज्य में पर्यटकों को बढ़ावा देने के लिए गंभीरता से काम कर रही है।
गोवा में खास
गोवा हमेशा सन, सेंड और सी के लिए जाना जाता रहा है। सूर्य के नीचे नहाते हुए सुनहरे रेत पर टहलना, नीले सागर में सर्फिंग का आनंद लेना और मनमोहक सूर्यास्त का दीदार करना गोवा के समुद्र तटों का यही सार है। गोवा अपनी नाइट लाइफ, स्वादिष्ट समुद्री भोजन और खूबसूरत समुद्र तटों के लिए जाना जाता है।
गोवा में 75 मील लंबी तटरेखा और 40 बीच हैं, जिनमें कुछ अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैं, जो गोवा को इंटरनेशनल टूरिज्म मैप पर एक अलग पहचान दिलाते हैं। हरे-भरे ताड़ के पेड़ों से घिरे बीच सैलानियों का मन मोह लेते हैं। कलंगुट बीच, पालोलेम बीच, बागा बीच, अंजुना बीच, कैंडोलिम बीच, अरामबोल बीच, अगोंडा बीच, मोरजिम बीच और मीरामार बीच प्रसिद्ध हैं। अंजुना, कलंगुटे और बग जैसे बीच तो मालदीव को पीछे छोड़ते हैं।
अब गोवा सरकार राज्य को आध्यात्मिक पर्यटन के नक्शे पर लाने के प्रयास में जुटी है। आध्यात्मिक पर्यटन के लिए जिस इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी, उसके लिए सरकार काम कर रही है। राज्य सरकार ने
गोवा में देश का पहला रीजेनरेटिव पर्यटन लॉन्च किया है। गोवा की आजादी की 62वीं वर्षगांठ पर राज्य के पर्यटन विभाग ने नई पर्यटन नीति रीजेनरेटिव टूरिज्म की घोषणा की थी। रीजेनरेटिव के माध्यम से सरकार राज्य में पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक संरक्षण और सामुदायिक सशक्तिकरण को मजबूत करना चाहती है। नई नीति के माध्यम से प्रमोद सावंत एकादश तीर्थ की शुरुआत के साथ ही आध्यात्मिकता, स्वदेशी, सभ्यतागत और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, सजग पर्यटन पर जोर देते हुए भारतीय पर्यटन को एक नया आयाम देना चाहते हैं।
महाभारत काल में गोवा
यदि गोवा के इतिहास की बात करें तो इसका उल्लेख महाभारत में भी आता है। महाभारत में गोवा गोपराष्ट्र यानी गोपालकों के देश के रूप में मिलता है। संस्कृत के कुछ अन्य पुराने स्रोतों में गोवा को गोपकपुरी और गोपकपट्टन कहा गया है, जिनका उल्लेख हरिवंशम और स्कंद पुराण में मिलता है। जनश्रुति के अनुसार, गोवा की रचना भगवान परशुराम ने की थी। मान्यता है कि परशुराम ने एक यज्ञ के दौरान अपने बाणों की वर्षा से समुद्र को कई स्थानों पर पीछे धकेल दिया था। इसी वजह से आज भी गोवा में बहुत से स्थानों का नाम वाणावली, वाणनस्थली आदि है।
चूंकि, गोवा करीब 450 साल तक पुर्तगाली शासन के अधीन रहा, इस कारण यहां यूरोपीय संस्कृति का प्रभाव दिखता है, लेकिन गोवा के वास्तु शास्त्र में हिंदू प्रभाव दिखाई देता है। सबसे प्राचीन मंदिर गोवा में हैं। गोवा की संस्कृति काफी प्राचीन है। 1000 साल पहले गोवा कोंकण काशी के नाम से जाना जाता था। यहां का श्री कामाक्षी, सप्तकेटेश्वर, श्री शांतादुर्ग, महालसा नारायणी, परनेम का भगवती मंदिर, महालक्ष्मी आदि बेहद दर्शनीय हैं। पुर्तगालियों ने गोवा की संस्कृति का नामोनिशान मिटाने के लिए बहुत प्रयास किए, लेकिन यहां की मूल संस्कृति इतनी शक्तिशाली थी कि उनके प्रयास असफल ही रहे।