मौसम वैज्ञानिक यूरोप में बिगड़े हालात को जलवायु संकट की शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं।
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वहीं इटली पिछले 70 सालों के सबसे भयंकर सूखे की मार झेल रहा है। जिससे वहां गर्मी से आपातकाल की घोषणा की गई। इस सूखे की सबसे ज्यादा मार चावल की खेती पर हुई है। लगातार गर्मी और कम बारिश की वजह से धान के खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक़ इटली में पिछले तीस वर्षों की औसत बारिश का आधा भी इस वर्ष नहीं हुआ है। सूखे के कारण देश का 30 प्रतिशत कृषि उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसमें धान की खेती यहां सबसे ज़्यादा बर्बाद हुई है। इसका असर आने वाले दिनों में बाजार की महंगाई पर भी पड़ने वाला है।
इंग्लैंड और वेल्स में मौसम विभाग ने अगले दो हफ्तों के लिए हीट अलर्ट जारी कर दिया है। यहाँ आने वाले दिनों में तापमान औसत से ज़्यादा रहेंगे। ऐसे में लोगों को दिन में कम से कम घर से बाहर निकले और शरीर में पानी की कमी नहीं हो इसकी भरपूर व्यवस्था रखने के सुझाव सार्वजनिक तौर पर दिये जा रहे हैं।
वहीं सूखे व भयंकर गर्मी की वजह से रोम और पुर्तगाल के जंगलों में आग लग गई। इस वजह से आसपास के इलाकों का तापमान औसत से कहीं ज़्यादा बढ़ चुका है। माना जा रहा है कि तापमान ऐसे ही प्रचंड रहा तो पुर्तगाल में भी गर्मी को राष्ट्रीय संकट घोषित किया जा सकता है।
मौसम वैज्ञानिक यूरोप में बिगड़े हालात को जलवायु संकट की शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं। उनका कहना है कि बार बार चेतावनी देने के बाद भी अगर मौसम परिवर्तन को लेकर दुनिया सचेत नहीं हुई तो आने वाले दिन इससे कहीं ज़्यादा घातक होने वाले हैं। यूरोप में असंतुलित तापमान का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। जिससे पूरी दुनिया प्रभावित होगी।
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