सर्दियों की छुट्टियां हमेशा सबसे खुशी का समय नहीं होतीं। हम आम दिनों से ज्यादा व्यस्त रहते हैं। यही नहीं, सर्दियों की बीमारियों से भी लड़ रहे होते हैं। नतीजतन, हम बहुत ज्यादा तनाव में आ जाते हैं, जो हमारी ऊर्जा और फोकस को खत्म कर सकता है। सोशल मीडिया पर, इस भावना को कभी-कभी ‘फंक्शनल फ्रीज’ कहा जाता है।
यह स्थायी तनाव से पैदा होने वाली एक मानसिक स्थिति है, जब आप काम करने में सक्षम तो होते हैं, पर लगता है कि ‘बस जी रहे हैं’ और सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं। लोग इसे ‘थका हुआ और परेशान’ होने जैसा बताते हैं। कुछ अन्य लोग बताते हैं कि, भले ही वे सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हों, पर वे उनका आनंद नहीं उठा पाते और ‘भावनात्मक रूप से सुन्न’ महसूस करते हैं।
क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट जेनिना फिशर ने कहा कि लोग जिन लक्षणों की बात कर रहे हैं, वे मौसमी विकार, व्यक्तित्व ह्रास या पिछले आघात के लंबे असर से हो सकते हैं। यह उन कामों को करने के लिए लगातार खुद को संभालने का नतीजा है, जो करने ही होते हैं। इसलिए सबसे जरूरी मैसेज का जवाब मिल जाता है। काम के असाइनमेंट पूरे हो जाते हैं। बच्चों को खाना खिला दिया जाता है। लेकिन आप जरूरी चीजों से ज्यादा कुछ भी करने के लिए खुद को मुश्किल से ही तैयार कर पाते हैं।
ये भावनाएं रोजमर्रा के जीवन की जरूरतों से अभिभूत होने के कारण पैदा हो सकती हैं। यह बहुत ज्यादा सूचनाओं का नतीजा भी हो सकता है। खबरों में कुछ इतना परेशान करने वाला हो सकता है कि हम खुद को बेबस महसूस करते हैं। डॉ. बोनानो कहते हैं कि इससे निपटने के लिए आप अपनी मुख्य चिंताओं पर ध्यान दें और उन्हें एक-एक करके सुलझाएं। मसलन, अगर आप थके हुए हैं, तो क्या आपको पूरी नींद मिल रही है? अगर नहीं, तो आप सोचिए कि ज्यादा नींद कैसे ले सकते हैं?
डॉ. फिशर का सुझाव है कि आम तौर पर तनाव और घबराहट महसूस होने पर अपने स्वतंत्र तंत्रिका प्रणाली को सक्रिय करें, जो हृदय की धड़कन, पाचन, सांस लेने और रक्तचाप को नियंत्रित करता है। इसके लिए, उन्होंने अपने शरीर से जुड़ने और शांत महसूस करने के लिए ध्यान, योग, ताई ची व्यायाम करने या दौड़ने की सलाह दी। सबसे जरूरी बात, खुद से यह कहने से बचें कि ‘मैं काम नहीं कर पा रहा हूं।’ आप इसे ठीक कर सकते हैं। इन्सानों में मुश्किलों के हिसाब से ढलने और आगे बढ़ने की जबर्दस्त क्षमता होती है।