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जीवन धारा: विचारों को बहने दीजिए, नई खोज के लिए इंतजार नहीं...बल्कि चिंतन की भीड़ और साहसिक प्रयोग जरूरी

Sat, 03 Jan 2026 07:53 AM IST
शुभम कुमार लिनुस पॉलिंग

सार

बिना विचारों के न नवाचार संभव है और न प्रगति। जितने अधिक विचार जन्म लेंगे, उतनी ही अधिक संभावनाएं सामने आएंगी। यही कारण है कि रचनात्मक लोगों का मन नए-नए विचारों से भरा रहता है।
 
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जीवन धारा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यदि किसी व्यक्ति को सचमुच नई खोजें करनी हैं, तो उसे अच्छे विचारों की तलाश में नहीं, बल्कि विचारों को ज्यादा से ज्यादा ईजाद करने में भरोसा करना चाहिए। महान खोज की शुरुआत किसी एक चमकदार विचार से नहीं होती, बल्कि असंख्य छोटे-बड़े विचारों की भीड़ से होती है। बिना विचारों के न तो नवाचार संभव है और न ही प्रगति। जितने अधिक विचार जन्म लेंगे, उतनी ही अधिक संभावनाएं सामने आएंगी। यही कारण है कि रचनात्मक लोगों का मन नए-नए विचारों से भरा रहता है, क्योंकि वे विचारों से डरते नहीं, उन्हें न्योता देते हैं।

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लेकिन, अच्छे विचारों की प्रतीक्षा करने से कुछ नहीं होने वाला। इसके बजाय बहुत सारे विचार पैदा करना जरूरी है और यही अच्छा विचार पाने का सबसे बेहतरीन तरीका भी है। हालांकि, इसका अर्थ यह कतई नहीं कि हर विचार महान ही हो। वास्तव में, अधिकांश विचार अधूरे, कमजोर या अनुपयोगी होंगे। और यह ठीक भी है, क्योंकि हर ऐतिहासिक खोज के पीछे दर्जनों असफल प्रयास छिपे होते हैं। यहीं एक और गुण अत्यंत आवश्यक हो जाता है और वह है विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता।

यह कोई जादुई शक्ति नहीं, बल्कि अनुभव, अभ्यास और गहरी समझ से विकसित होने वाली एक तरह की ‘छठी इंद्रिय’ है। यही विवेक हमें यह पहचानने में मदद करता है कि कौन-सा विचार आगे बढ़ाने योग्य है और कौन-सा केवल सीख देकर पीछे छूट जाने के लिए आया है। सफल लोग वही होते हैं, जो बेकाम के विचारों से समय रहते विदा ले लेते हैं और सार्थक विचारों पर अपना समय व ऊर्जा केंद्रित करते हैं।
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नए-नए विचारों को आजमाने से कभी डरना नहीं चाहिए, चाहे वे अधूरे लगें या गलत। हर विचार महत्वपूर्ण है, क्योंकि वही अगले बेहतर विचार की नींव बन सकता है। हमें अपनी समझ और अनुभव को इतना मजबूत बनाना चाहिए कि हम सही व गलत के बीच संतुलन बना सकें। रचनात्मकता केवल कल्पना नहीं है तथा सफलता केवल मेहनत नहीं। इन दोनों को जोड़ने वाला पुल विवेक ही है।

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