4 अक्तूबर 2015 के दिन प्रयोगशाला का नया नाम रखा गया और एक स्मरणपट्टिका लगाई गई
- फोटो : अरुण डिके
2014 तक कृषि रसायनों ने पूरी दुनिया की मिट्टी प्रदूषित कर दी थी। इस कारण विश्व राष्ट्र संगठन ने सन 2015 को सॉइल इयर घोषित किया और मिट्टी के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक सर अलबर्ट हॉर्वर्ड की भूरि भूरि प्रशंसा करी (हॉर्वर्ड के गुरु हमारे अनपढ़ किसान)।
पर्यावरणविद वंदना शिवा 20 विदेशी वैज्ञानिकों,किसानों,और समाजसेवियों को लेकर सर हॉवर्ड का कार्यस्थल देखने 4 अक्तूबर 2015 के दिन इंदौर कृषि महाविद्यालय आईं थीं। हॉवर्ड की प्रयोगशाला और वो जहां काम करते थे वे खेत देखकर सब भावविभोर हो गए। उसी दिन उस प्रयोगशाला का नया नाम रखा गया और एक स्मरणपट्टिका लगाई गई।
अपनी पुस्तक में सर हॉवर्ड ने जो मुख्य बातें लिखी है वे गौर करने लायक है:-
1. रोमन साम्राज्य का पतन ही इसलिए हुआ क्योंकि उसने पूंजीपतियों को खेत सौंप दिए थे।
2. किसी भी देश की लोकसंख्या उस देश का गौरव होता है और उनकी मूलभूत आवश्यकताओं की यदि पूर्ति हो जाती है तो उस देश की समृद्धि कोई रोक नहीं सकता है लेकिन यदि इसके विपरीत हुआ तो बड़ी से बड़ी पूंजी भी उस देश को बचा नहीं सकेगी।
3. बहुफसलीय खेती भारत की विशेषता है क्योंकि इससे अन्न सुरक्षा स्थिति गांवों की महिलाएं संभाल लेंगी।
4. भारत का मौसम ऐसा है कि यहां फसलों का प्रसंस्करण संभव नहीं है। वे जल्द सड़ जाती हैं, इसलिए ताजा माल खेत से निकालो और उपभोग करो।
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