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एग्जिट पोल 2019ः एनडीए को बहुमत लेकिन इन राज्यों में फेल हो सकता है अनुमान

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एग्जिट पोल में एनडीए को बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है। - फोटो : Amar Ujala
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लोकसभा चुनाव में सातवें और अंतिम चरण की वोटिंग खत्म होने का साथ ही एग्जिट पोल के नतीजे आ गए हैं। टाइम्स नाउ-वीएमआर के एग्जिट पोल के अनुसार पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन फिर से सत्ता में वापसी करता दिख रहा है। टाइम्स नाउ-वीएमआर के अनुसार, एनडीए गठबंधन को 306 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, यूपीए को 132 सीटें मिलने का अनुमान है जबकि अन्य को 104 सीटें मिलती दिख रही हैं। यह सर्वेक्षण कितना प्रामाणिक है यह तो समय बताएगा, लेकिन अतीत में ऐसे कई उदाहरण हैं जब एग्जिट पोल्स वोटर्स के मूड को भांप पाने में नाकाम साबित हुए हैं।

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इस बार देखना यह रोचक होगा कि ये एग्जिट पोल कितने सही साबित होते हैं। हालांकि देश का मूड लगभग इसी प्रकार का दिख रहा है लेकिन अंडर करंट की बात करें तो भाजपा और एनडीए के लिए स्थितियां ज्यादा अनुकूल नहीं दिख रही है। बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र आदि प्रांतों में भाजपा को घाटा होता दिख रहा है, लेकिन जिन प्रांतों में भाजपा की बढ़त के बारे में बताया जा रहा है वहां आशा सीमित है। ऐसे में एग्जिट पोल की विश्वसनीयत पर सवाल भी खड़े हो सकते हैं।

अबतक का अनुभव बताता है कि अक्सर एग्जिट पोल चुनावी नतीजों की एक बड़ी तस्वीर तो पेश करता है, पर काउंटिंग के बाद आए नतीजों से वह काफी दूर रह जाता है। 
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कई बार एग्जिट पोल सही नहीं हुए हैं। - फोटो : Amar Ujala
एग्जिट पोल के नतीजे जब हुए फेल?  
बात अगर पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान एग्जिट पोल्स की करें तो ज्यादातर के अनुमान सही पाए गए थे। ज्यादातर एग्जिट पोल्स में भारतीय जनता पार्टी की अगुआई में एनडीए को सरकार बनाने के करीब बताया गया था। जब नतीजे आए तो बीजेपी को खुद के दम पर बहुमत मिल गया और एनडीए 336 सीटों पर विजयी रहा। कांग्रेस 44 सीटों पर सिमटकर रह गई थी। हालांकि कांग्रेस की इतनी बुरी तरह हार के बारे में ज्यादातर एजेंसियों मौन थी लेकिन यह हुआ। 

2014 के अनुमान से पहले 2009 व 2004 में जो चुनाव परिणाम पर एग्जिट पोल आए वह गलत साबित हुए। मसलन 2 आम चुनावों में एग्जिट पोल्स सही भविष्यवाणी करने में बुरी तरह नाकाम रही। एग्जिट पोल्स की नाकामी का सबसे चर्चित वाकया 2004 का है। उस वक्त ज्यादातर एग्जिट पोल्स में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए सरकार के फिर सत्ता में आने की भविष्यवाणी की गई थी, लेकिन नतीजे बिल्कुल उलट आए। एनडीए को 189 सीटें मिलीं और कांग्रेस की अगुआई वाले यूपीए को 222 सीटें मिलीं और डॉक्टर मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।

इसी प्रकार 2009 में भी एग्जिट पोल्स फेल हुए। ज्यादातर एग्जिट पोल्स में यह तो बताया गया कि यूपीए को एनडीए पर बढ़त मिलेगी, लेकिन किसी ने भी यह अनुमान नहीं लगाया था कि कांग्रेस अकेले ही 200 के पार पहुंच जाएगी। परिणाम घोषित हुए तो कांग्रेस को अकेले 206 और यूपीए को 262 सीटें मिलीं। यह चमत्कार से कम नहीं था। इसके कारण कांग्रेस फिर से सत्ता में लौट आई और अनुमान लगाने वाले गलत साबित हो गए। 

इससे पहले 1998 के लोकसभा चुनाव के दौरान ज्यादातर एग्जिट पोल्स के अनुमान सही साबित हुए। तब सभी एग्जिट पोल्स में बीजेपी की अगुआई वाले गठबंधन को 200 से ज्यादा सीटें व बहुमत के करीब बताया था, जबकि कांग्रेस की अगुआई वाले गठबंधन को 200 से कम सीटों का अनुमान लगाया गया था। जब नतीजे आए तो बीजेपी़ को 252, कांग्रेस़ को 166 और अन्य को 119 सीटें मिली थीं। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान एग्जिट पोल्स के अनुमान बहुत हद तक सही रहे, लेकिन उसमें जो अनुमान लगाया गया था वह सही साबित नहीं हो पाया। 
 
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एग्जिट पोल में कई राज्यों परिणाम उलट भी सकते हैं। - फोटो : Amar Ujala
राज्यों में यह होती है स्थिति 
जब हम राज्यों के चुनाव पर अपना ध्यान केन्द्रित करते हैं तो इसमें भी बहुत हद तक एग्जिट पोल की विसंगति ध्यान में आती है। 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान एग्जिट पोल्स सही अनुमान लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए। सभी एग्जिट पोल्स में बीजेपी़ को जेडीयू-आरजेडी गठबंधन पर बढ़त बताई गई थी लेकिन नतीजे ठीक उलट आए। बीजेपी़ गठबंधन सहित 58 सीटों पर सिमट गई, जबकि जेडीयू-आरजेडी गठबंधन ने 178 सीटों पर जीत का परचम लहराया।

कितने सटीक हैं इस बार के एग्जिट पोल?  
इस बार का चुनावी एग्जिट पाल क्या बता रहा है थोड़ा उस पर भी ध्यान केन्द्रित करते हैं। देश की सबसे बड़ी नेटवर्क दूरदर्शन वाहिनी आजतक एक्सिस माई इंडिया का एग्जिट पोल के अनुसार मध्य प्रदेश में कांग्रेस और यूपीए को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। यहां 29 में से भाजपा 26 से 28 सीटें जीतती दिख रही है। यहां एक से तीन सीट तक कांग्रेस के पाले में जा सकती है।

छत्तीसगढ़ में भी मध्य प्रदेश जैसी हालत दिख रहे हैं। यहां बीजेपी को 7-8 और कांग्रेस को 3-4 सीटें मिल सकती हैं। आपको बता दें कि यहां कुल 11 सीटें हैं। अभी हाल में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव हुए थे जहां कांग्रेस ने बीजेपी का सूपड़ा साफ कर दिया था और बीजेपी की 15 साल की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी।

इस बार थोड़ी राहत भाजपा को मिलती दिख रही है। हालांकि दोनों प्रदेशों में अभी हाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा से सत्ता छीनी है लेकिन फिर से भाजपा की ओर लोगों का रुझान कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। वैसे ये एग्जिट पोल है और इसे उसी रूप में लिया जाना चाहिए। कई बार ये उलटे भी पड़े हैं।

आजतक द्वारा जो रिपोर्ट दोनों प्रांतों का जारी किया गया है उतनी खराब स्थिति भी कांग्रेस की नहीं है। मध्य प्रदेश में 9 और छत्तीसगढ़ में 8 सीटों पर कांग्रेस स्थिति बेहद मजबूत पहले से बताई जा रही है। ऐसे में रिजल्ट आने के बाद ही सही बात का पता चल पाएगा। 

यूपी में क्या है महागठबंधन का हाल 
इधर एबीपी न्यूज-नील्सन के सर्वे में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश में महागठबंधन को भारी बढ़त मिल रही है। उत्तर प्रदेश में भाजपा को जबदस्त झटका बताया जा रहा है। यहां कांग्रेस को केवल 2 सीटें मिलती दिख रही है। जन की बात के सर्वे के मुताबिक एनडीए को 305 और यूपीए को 124 सीटें मिलती दिख रही हैं। 48 लोकसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में बीजेपी़ ने पिछली बार 42 सीटें जीती थीं और कांग्रेस़ को 6 सीटें मिली थीं।

हालांकि इस बार टाइम्स नाउ एग्जिट पोल के मुताबिक 38 सीटों भाजपा और एनडीए को मिलेगी जबकि कांग्रेस बढ़त बनाए हुए है। कांग्रेस यहां 10 सीटें जीत सकती है। पीएम मोदी के गृह राज्य गुजरात में बीजेपी को 4 सीटें गंवानी पड़ सकती है। पिछली बार उसने सभी 26 सीटों पर फतह हासिल की थी लेकिन इस बार 4 सीटें कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही हैं।

गुजरात के स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार बसंत रावत कहते हैं- गुजरात में इस बार भाजपा कम से कम 20 सीट जीतेगी और 6 पर कांग्रेस बढ़त बनाए हुए है। एग्जिट पोल, बिहार के बोर में टाइम्स नाउ वीएमआर का कहना है कि 40 सीटों वाले बिहार में एनडीए की सीटें घट सकती है। यहां कांग्रेस की अगुआई वाले गठबंधन को पिछले चुनाव की तुलना में सीधे तौर पर 5 सीटों का फायदा होता दिख रहा है।

42.78 फीसदी वोटों के साथ कांग्रेस़ को 15 सीटें मिल सकती हैं जबकि 2.98 फीसदी वोट शेयरों की कमी के साथ एनडीए को 25 सीटों पर संतोष करना पड़ेगा। एग्जिट पोल के अनुसार पश्चिम बंगाल में 42 सीटों में से भाजपा 11 सीटें जीतती दिख रही है। कांग्रेस को 2 और अन्य, जिसमें ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और लेफ्ट शामिल हैं, को 29 सीटें मिल सकती हैं। खास बात यह है कि पिछले चुनाव में बीजेपी को मात्र 2 सीटें मिली थीं और उसका वोट शेयर भी 16.8 फीसदा था।

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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