एग्जिट पोल पर पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं।
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लगते रहे हैं पक्षपात के आरोप
आलोचक और राजनीतिक पार्टियां अक्सर एग्जिट पोल्स करवाने वाली एजेंसियों को अपनी पसंद, तरीके आदि के हिसाब से पक्षपात का आरोप लगाती रही हैं। हालांकि इस मामले में सर्वेक्षण एजेंसियों पर बहुत भरोसा नहीं किया जा सकता है, लेकिन कुछ हद तक इसमें नैतिकता होती है क्योंकि यहां एजेंसियों की विश्वसनीयता का सवाल होता है। मसलन उनके पक्ष में न आने पर पार्टियां यह तक कहती हैं कि विरोधी दलों ने एग्जिट पोल्स एजेंसियों को इसके लिए पैसे देकर मतदाता की असल भावना को छिपाया है।
सभी जगह है एग्जिट पोल का हिसाब-किताब
एग्जिट पोल केवल भारत में ही नहीं होते हैं बल्कि दुनिया में जहां कहीं भी संसदीय लोकतंत्र हैं वहां लगभग इस प्रकार के चुनाव पूर्व सर्वेक्षण जारी करने की परिपाटी है। चूंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां जितने वोटर हैं उतने वोटर शायद ही दुनिया के किसी लोकतांत्रिक देश में हों। लिहाजा भारत के बारे में जानकारी दुनिया के लोगों के लिए सदा से कौतुहल पैदा करता रहा है।
खास बात यह है कि इस बार जो चुनाव हो रहा है वह भारतीय लोकतंत्र की दिशा तय करेगा, साथ ही भारत में चुनाव प्रचार की प्रकिया को भी प्रभावित करेगा।
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