यूरोपीय देश आयरलैंड के प्रधानमंत्री लियो वरडकर ने मेडिकल प्रैक्टिशनर के तौर पर अपना नाम दोबारा पंजीकृत करा लिया है।
- फोटो : PTI
प्रधानमंत्री के इस निर्णय से वहांं की जनता काफ़ी खुश है वहीं कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ने में उन्हें अधिक बल भी मिला है। उनके परिवार और दोस्तों में अधिकांश स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों जुड़े हुए हैं। और इस मुश्किल घड़ी का डटकर मुक़ाबला कर रहे हैं। उनके माता-पिता और बहनें सभी इसी क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। लियो आयरलैंड के सबसे युवा प्रधानमंत्री भी हैं। साल 2017 में महज 38 साल की उम्र में वे देश के प्रधानमंत्री बन गए थे।
तो दूसरी ओर स्वीडन की प्रिंसेस सोफिया स्टॉकहोम के सोफियाहेम्मेट अस्पताल में अपनी सेवाएंं देने का आधिकारिक ऐलान कर चुकी हैं। वे इस अस्पताल की मानद अध्यक्ष भी हैं। चूंकि उन्होंने नर्सिंग का कोर्स किया है इसलिए उन्हें बतौर फ्रेसर पहले-पहल अस्पताल के हेल्थकेयर स्टाफ़ की मदद की ज़िम्मेदारी सौंपी जा रही है। वे उपकरणों को कीटाणुमुक्त करने, मरीज़ों की सेवा, भोजन और साफ़ सफ़ाई के कार्य में सहयोग देंगी। हाल में ही अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर उन्होंने अस्पताल की नई ड्रेस और टैग जिसपर बड़े अक्षरों में सोफिया लिखा था, फ़ोटो पोस्ट करते हुए अपनी ख़ुशी ज़ाहिर की।
उन्होंने लिखा कि ऐसे मुश्किल समय में लोगों की सहायता करने का अवसर मिलना वाक़ई ईनाम मिलने की तरह है। यह पहली बार है जबकि रॉयल फ़ैमिली से ताल्लुक़ रखने वाला कोई व्यक्ति इसतरह जनता से जुड़ने को मुखर हुआ है। आपको बता दूँ कि कि स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में कोरोना संक्रमित मरीज़ों और मरने वालों की संख्या देश में सबसे ज़्यादा है। स्वीडन में अबतक क़रीब पंद्रह हज़ार लोग संक्रमित हो चुके हैं और पंद्रह सौ से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।