देश में मोदी सरकार ने सुधार के लिए बारीकी से काम किया है।
- फोटो : फाइल फोटो
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स विश्व बैंक जारी करता है। इसमें कई अलग-अलग पैरामीटर देखे जाते हैं। सभी पैरामीटर को मिलाकर यह देखा जाता है कि कारोबार करने में लोगों को कितनी आसानी है। यह भी देखा जाता है कि कारोबार करने में किस प्रकार की अड़चनें आती हैं। अलग-अलग देशों में कारोबार की सुगमता के आधार पर यह इंडेक्स तैयार होता है। रेग्युलेशन की स्थिति प्रमुखता से देखी जाती है।
सरकारी रेग्युलेशन के चलते कारोबार आसान हुआ है या मुश्किल, इस पर गंभीरता से विचार किया जाता है, और भी कई फैक्टर हैं जिनको ध्यान में रखते हुए यह इंडेक्स तैयार होता है। इनमें प्रमुख हैं-कंस्ट्रक्शन परमिट, रजिस्ट्रेशन, लोन और टैक्स पेमेंट की मशीनरी। इन्हीं आधारों को ध्यान में रखकर देशों को इज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स में स्थान जारी किया जाता है।
फ़िलहाल देश में मोदी सरकार ने सुधार के लिए बारीकी से काम किया है। उसने हर योग्यता पर काम किया। इसी वजह से भारत की रैंकिंग इतनी ज्यादा सुधरी है। डूईंग बिजनेस रैंकिंग डिस्टेंस टू फ्रंटियर (डीटीएफ) के आधार पर तय किया जाता है और ये स्कोर दिखाता है कि वैश्विक मानकों पर अर्थव्यवस्था कारोबार के मामले में कितना अच्छा प्रदर्शन कर रही है।
सरकार का इरादा अब राज्यों और ज़िला के स्तर पर भी कारोबार को आसान बनाने के मामले में प्रतिस्पर्धा शुरू करने का है। इस मामले में तो राज्यों की रैंकिंग शुरू हो चुकी है, लेकिन अब ज़िला स्तर पर भी रैंकिंग शुरू करने की योजना चल रही है। इसके लिए पहले चरण में कुछ चुनिंदा ज़िलों की पहचान कर इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करने का प्रस्ताव है। अगर सभी ज़िला और राज्य अपने यहां कारोबार को आसान बनाते हैं तो इसका सीधा असर भारत की रैंकिंग पर भी पड़ेगा।
सरकार निर्माण गतिविधियों को मंजूरी देने के मामले में लगातार सुधार दिखा रही है।
- फोटो : फाइल फोटो
कारोबारी सुगमता
कारोबार की सुगमता में किसी देश की रैंकिंग के जो 10 पैमाने होते हैं उसके 10 में से 7 संकेतकों में विश्व के सबसे अच्छे मानकों में भारत और करीब पहुंच गया है। पहले ये 10 में से 6 मानकों के सबसे अच्छे होने की स्थिति में था, हालांकि सबसे अच्छी बात ये है कि निर्माण की गतिविधियों के पैमाने पर देश ने सबसे अच्छी प्रगति हासिल की है और ये सीमाओं के पार भी फैल रहा है।
सरकार निर्माण गतिविधियों को मंजूरी देने के मामले में लगातार सुधार दिखा रही है। साल 2018 में निर्माण गतिविधियों के मामले में भारत की रैंक सुधरकर 181वें स्थान से 52वें स्थान पर आ गई है और अकेले साल में 129 स्थानों की ये छलांग काफी अहम साबित हो रही है। ईज ऑफ डूईंग बिजनेस के मामले में भारत की रैंकिंग के सुधरने के पीछे इसका बड़ा हाथ है। सीमाओं के पार निर्माण गतिविधियों में भी भारत की रैंक में सुधार आया है। रैंकिंग सुधरने की वजह से भारत एशिया का प्रमुख आर्थिक ताकत के तौर पर उभर सकता है।
स्वदेशीकरण को बढ़ावा
केंद्र सरकार देश में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी के तहत केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रलय का मानना है कि अगले वित्त वर्ष तक देश में बनने वाले फीचर फोन में स्वदेशी कलपुर्जो का इस्तेमाल मौजूदा 15 फीसद से बढ़कर 37 फीसद हो जाएगा। यही नहीं स्मार्टफोन के निर्माण में भी स्वदेशी कलपुर्जो की हिस्सेदारी मौजूदा 10 फीसद से बढ़कर 26 फीसद हो जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रलय के अनुसार सरकार मोबाइल हैंडसेट निर्माण के लिए घरेलू स्तर पर पूरा इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है।
भारत अब मोबाइल फोन हैंडसेट का निर्यातक बन गया है। वित्त वर्ष 2019-20 में मोबाइल हैंडसेट का निर्यात आठ गुना बढ़कर 11,200 करोड़ रुपये मूल्य का हो गया, जो आयात की तुलना में अधिक है। यह पहली बार है जब किसी साल भारत का मोबाइल फोन हैंडसेट निर्यात, आयात के मुकाबले अधिक रहा है।
इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आइसीईए) के अनुसार चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-जुलाई दौरान मोबाइल फोन हैंडसेट निर्यात 7,000 करोड़ रुपये के करीब रहा। माना जा रहा है कि चालू वित्त वर्ष में यह 25,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को छू जाएगा।
आइसीईए के अध्यक्ष पंकज मोहिंद्रू का कहना है कि मोबाइल हैंडसेट मैन्यूफैक्चरिंग उद्योग का शानदार प्रदर्शन जारी है। वित्त वर्ष 2017-18 के मुकाबले 2018-19 में मोबाइल हैंडसेट के निर्यात में 800 प्रतिशत वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 में मोबाइल आयात 10,000 करोड़ रुपये मूल्य का था जबकि निर्यात 11,200 करोड़ रुपये रहा। यह सुनहरे भविष्य के लिए छोटी, लेकिन दमदार शुरुआत है। यह देश के लिए भी अच्छा है।
आइसीईए का कहना है कि वित्त वर्ष 2018-19 में भारत में कुल 29 करोड़ मोबाइल फोन हैंडसेट का उत्पादन हुआ, जिनका मूल्य 1.81 लाख करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2014-15 में मात्र 5.8 करोड़ मोबाइल हैंडसेट का उत्पादन हुआ था जिसका मूल्य 18,900 करोड़ रुपये था। उस समय निर्यात लगभग शून्य था क्योंकि नोकिया का प्लांट बंद हो चुका था। कुलमिलाकर बेहतर कारोबारी माहौल से विदेशी निवेश भी बड़े पैमाने पर भारत आ रहा है साथ ही दुनियाँ में भारत की साख बढ़ी है है ।
(लेखक राजस्थान की मेवाड़ यूनिवर्सिटी में डायरेक्टर और टेक्निकल टूडे पत्रिका के संपादक हैं)
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।