दीपावली का संदेश: दीप के आलोक में खुद को संवारने का दिन
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दीपावली आत्मा के स्वर्ग में विजयी प्रवेश का प्रतीक है। दीपावली पर जलाए गए सैकड़ों दीपक उस सौंदर्य और शांति का प्रतीक हैं, जो आत्मा को भीतर की आंतरिक दुनिया में प्रवेश करने पर मिलता है। आध्यात्मिक-आंतरिक क्षेत्र का अनुभव ध्यान में अपने भीतर किया जा सकता है। दीपावली केवल पटाखे जलाने का पर्व नहीं है, यह हमारी आत्मा को उसके सिंहासन पर बैठने के लिए प्रेरित करने का प्रतीक भी है या मन से अधिक सशक्त बनने का प्रतीक है। जब से राम ने कोशल के सम्राट का पद संभाला, तब से तीनों लोकों के दुख समाप्त हो गए और सभी में खुशी का संचार हो गया। जब आत्मा मन से अधिक प्रबल हो जाती है तो धर्म के चार स्तंभ- सत्य, पवित्रता, करुणा और दान भी मजबूत हो जाते हैं। जब देश के अधिकांश लोगों में आत्मा प्रबल होती है तो सत्य का वर्चस्व होता है और हम राम राज्य में प्रवेश करते हैं।
यदि हम शब्द ‘रामायण’ को तोड़ें तो यह राम + अयन बनता है, जिसका अर्थ है- ‘राम के आने की कहानी’। हर साल दीपावली का उत्सव राम के अयोध्या लौटने की विजय के रूप में मनाया जाता है। यह राम के शासन (राम राज्य) की शुरुआत का संकेत है। गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस में अच्छाई की बुराई पर विजय की इस अमर कथा को सजीवता के साथ प्रस्तुत किया गया है। इसमें भगवान और आत्मा के बीच पवित्र प्रेम को दर्शाया गया है। राम की यात्रा मानवीय अनुभवों का दर्पण है, जहां वे कठिनाइयों और सुख-दुख की स्थितियों से गुजरते हुए उन भावनाओं को भी जीते हैं, जो हमारे लिए सहज और परिचित हैं।
हालांकि राम त्रेतायुग में अयोध्या लौटे, लेकिन हम कलियुग में भी दीपावली मनाते हैं। समय के साथ कहानियां धुंधली पड़ जाती हैं, लेकिन रामायण की कहानी बिना किसी सोशल मीडिया के युगों से जीवित रही है।
गहराई से बसी है रामायण
रामायण की कहानी भारतीय आत्माओं में गहराई से बसी हुई है। इसलिए यह समय के चक्रों (युगों) में भी जीवित रही है। कहा जाता है कि राम की कथा को ध्यानपूर्वक सुनने से आत्मा पर शुद्धिकरण का प्रभाव पड़ता है, क्योंकि जब कोई ध्यान से सुनता है तभी रामायण की कहानी का आध्यात्मिक अर्थ प्रकट होता है। राम के सीता के साथ घर लौटने और उनके राज्याभिषेक का भी एक गहरा आध्यात्मिक अर्थ है। राम का अयोध्या की गद्दी पर बैठना आत्मा के मानव शरीर के सिंहासन पर बैठने के समान है। हम मन, शरीर और आत्मा से बने हैं। दोनों आंखों के बीच और नाक के ऊपर आत्मा का स्थान है, जिसे तीसरी आंख कहा जाता है। आत्मा की विजय का अर्थ है कि आत्मा शरीर में सबसे सशक्त है और मन से ऊपर है।