आम आदमी पार्टी कांग्रेस के परम्परागत मतदाताओं के बल पर ही सत्ता में आई थी।
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दिल्ली चुनाव का नया समीकरण
इस तरह देखा जाए तो दिल्ली के चुनाव में एक नया समीकरण उभर कर आया है। आम आदमी पार्टी कांग्रेस के परम्परागत मतदाताओं के बल पर ही सत्ता में आई थी। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी जैसे ही मजबूत हुई वैसे ही आम आदमी पार्टी का ग्राफ गिरा। दोनों ही पार्टियों के मतदाता वर्ग एक ही विचारधारा के है। ऐसे में आम आदमी पार्टी व कांग्रेस में से जो भी अधिक मतदाताओं को अपनी और कर पाएगा वही पार्टी बड़े दल के रूप में उभरे सकेगी।
2019 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली की 7 सीटों में भारतीय जनता पार्टी को 56.58 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस को 22.46 प्रतिशत वोट तथा आम आदमी पार्टी को मात्र 18 प्रतिशत ही वोट मिले थे। इस तरह देखे तो कांग्रेस पार्टी जितनी अधिक मजबूत होती है आम आदमी पार्टी उतनी ही कमजोर होती है, जिसका सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिलता है।
पिछले लोकसभा चुनाव की तरह यदि इस बार के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी मजबूत होकर उभरती है तो निश्चय ही आम आदमी पार्टी को नुकसान होगा, जिसका भी भाजपा को ही सीधा लाभ मिलेगा।
2015 के विधानसभा चुनाव में दिल्ली की 70 सीटों में से आम आदमी पार्टी को 67 सीटें मिली थी। उसे 48 लाख 78 हजार 397 वोट मिले थे जो कुल मतदान का 54.3 प्रतिशत थे। भारतीय जनता पार्टी को मात्र 3 सीटें व 28 लाख 90 हजार 485 वोट मिले थे। जो कुल मतदान के 32.2 प्रतिशत थे। वहीें कांग्रेस पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी। उसे 8 लाख 66 हजार 814 वोट मिले थे जो कुल मतदान का 9.3 प्रतिशत थे।
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020: नई दिल्ली
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वोट और सीट का गणित
2013 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 31 सीटें 26 लाख 4 हजार 100 वोट मिले थे जो कुल मतदान का 33.7 प्रतिशत थे। आप को 28 सीटे 23 लाख 22 हजार 330 वोट मिले थे जो कुल मतदान का 29.49 प्रतिशत थे। वही कांग्रेस को 8 सीटें व 19 लाख 32 हजार 933 वोट मिले थे तो कुल मतदान का 24.55 प्रतिशत थे। जनता दल यूनाइटेड, शिरोमणि अकाली दल व निर्दलीय को एक-एक सीट मिली थी।
2013 के विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाई थी जो मात्र 48 दिन ही चली पाई थी। कांग्रेस द्धारा समर्थन वापस लेने के कारण सरकार गिर गई थी। उसके बाद 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने बम्पर बहुमत के साथ वापसी करते हुए वर्तमान सरकार बनाई थी।
दिल्ली विधानसभा चुनाव का फैसला तो वहां के एक करोड़ 46 लाख 92 हजार 136 मतदाताओं के हाथ में हैं, जिनमें 80 लाख 55 हजार पुरुष व 66 लाख 35 हजार महिला मतदाता हैं। इनका झुकाव जिस पार्टी की तरफ होगा जीत उसी की होगी। दिल्ली विधानसभा के चुनाव में आम आदमी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी सभी 70 सीटों पर अकेले ही चुनाव लड़ रही है। वही भारतीय जनता पार्टी 67 सीटों पर तथा उनकी सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेड 2 सीटों पर व लोक जनशक्ति पार्टी एक सीट पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस पार्टी 66 सीटों पर व उसकी सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल 4 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र होने से दिल्ली के चुनाव का और भी महत्व बढ़ जाता है। हालांकि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं हैं। दिल्ली के केंद्र शासित प्रदेश होने से वहां उपराज्यपाल ज्यादा प्रभावी है। मगर फिर भी राज्य सरकार का अपना अलग महत्व होता है। पिछले 5 सालों में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार चल रही है वहीं दिल्ली में आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार चल रही है।
केन्द्र व दिल्ली में अलग-अलग दलों की सरकार होने से उनमें अक्सर टकराव देखने को मिलता रहा है, जिसका असर दिल्ली के विकास पर भी पड़ा है। अब इस बात का फैसला तो दिल्ली के मतदाता ही करेंगे कि दिल्ली प्रदेश में भी केंद्र के साथ एनडीए की सरकार बनाएंगे या फिर वर्तमान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को फिर से एक बार मौका देंगे। इसका पता तो 11 फरवरी को चुनाव परिणाम के बाद मिल पाएगा।
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