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DeepSeek AI: तकनीक के क्षेत्र में वर्चस्व का शीतयुद्ध, क्या एआई रेस में आगे निकल जाएगा चीन?

सार

DeepSeek AI: स्पूतनिक 1 ने अमेरिका में जो हलचल पैदा की थी कुछ उसी तरह का डर चीन के डीपसीक एआई ने इन दिनों अमेरिका में फैला दिया है। ट्रंप के सत्ता में आते ही चीन ने डीपसीक नाम के एक एआई टूल से अमेरिका के गुरूर पर हमला किया है।
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US China AI War - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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DeepSeek AI: अक्तूबर 4, 1957 सोवियत संघ स्पूतनिक 1 (पृथ्वी की पहली सैटलाइट) अंतरिक्ष में लॉन्च करता है। यूएसएसआर के इस एक कदम से पूरे अमेरिका में हलचल मच जाती है। स्पूतनिक संकट (Sputnik Crisis) ने पूरे अमेरिका में डर का माहौल बना दिया था। अमेरिका को लगा की जब सोवियत संघ ICBM (Intercontinental Ballistic Missile) तकनीक की मदद से स्पूतनिक 1 को अंतरिक्ष में भेज सकता है, तो वह इसकी मदद से अमेरिका के ऊपर न्यूक्लियर हमला भी कर सकता है। इसके बाद 1958 में अमेरिका ने नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) की स्थापना की, ताकि अंतरिक्ष में सोवियत संघ को टक्कर दी जा सके, फिर जो हुआ वह इतिहास बनकर रह गया। 

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कुछ ऐसा ही इन दिनों भी हो रहा है, लेकिन इस बार ये लड़ाई अंतरिक्ष में नहीं बल्कि तकनीक की दुनिया में हो रही है। स्पूतनिक 1 ने अमेरिका में जो हलचल पैदा की थी कुछ उसी तरह का डर चीन के डीपसीक एआई ने इन दिनों अमेरिका में फैला दिया है। ट्रंप के सत्ता में आते ही चीन ने डीपसीक नाम के एक एआई टूल से अमेरिका के गुरूर पर हमला किया है। इस एआई टूल के लॉन्च करने के कुछ ही समय के भीतर दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी NVIDIA को करीब 600 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। NVIDIA के साथ-साथ मेटा, टेस्ला, गूगल और कई दूसरी कंपनियों को भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। इस एआई टूल ने लॉन्च होने के बाद ग्लोबल एआई मार्केट के नियम कायदे ही बदल दिए हैं।

ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि दुनिया अब एक नए शीतयुद्ध के दौर में प्रवेश कर चुकी है। यह शीतयुद्ध बिल्कुल अलग है। इसे तकनीक के स्तर पर लड़ा जा रहा है। यहां लड़ाई बम और बारूद से नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डाटा और इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी को लेकर हो रही है।
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इसी कड़ी में आइए जानते हैं कि आखिर क्या है ये डीपसीक एआई, जिसने लॉन्च होने के कुछ दिनों के भीतर ही अमेरिका की नाक में दम कर दिया है। इसके अलावा यह भी जानेंगे कि आखिर कैसे चीन, अमेरिका द्वारा एडवांस कंप्यूटिंग चिप्स के निर्यात पर बैन लगा दिए जाने के बाद भी इस तरह की तकनीक को बनाने में सफल हुआ?

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US China AI War - फोटो : DeepSeek

क्या है डीपसीक एआई

डीपसीक एक एआई पावर्ड चैटबॉट है। इसके काम करने का तरीका काफी हद तक चैटजीपीटी जैसा ही है। रिपोर्ट के अनुसार इसके काम करने की शक्ति OpenAI के o1 मोडल जैसी है, जिसे पिछले साल के अंत में जारी किया गया था। इसे चैटजीपीटी की तुलना में  काफी कम जीपीयू का इस्तेमाल करके ट्रेन किया गया है।

डीपसीक एआई डाटा प्रोसेसिंग करने के लिए चैटजीपीटी की तुलना में बहुत कम जीपीयू का इस्तेमाल करता है। खास बात यह है कि कम जीपीयू का इस्तेमाल करके भी डीपसीक एआई, चैटजीपीटी जैसा ही कार्यकुशल है। यही नहीं कई बेंचमार्क्स पर इसने चीटजीपीटी, गूगल और मेटा के एडवांस एआई मॉडल्स को भी पीछे छोड़ दिया है। डीपसीक के सबसे लेटेस्ट R1 मोडल को केवल 5.6 मिलियन डॉलर के बजट पर ट्रेन किया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस एआई टूल को बनाने में जितनी लागत आई है, वह अमेरिकन एआई मॉडल को बनाने के खर्च की तुलना में कई गुना कम है। एक तरफ जहां यूजर्स को ChatGPT Plus का उपयोग करने के लिए 20 डॉलर खर्च करना पड़ता है, उसकी तुलना में डीपसीक एआई का उपयोग करने के लिए आपको किसी प्रकार के पैसों को खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। 

यही नहीं डीपसीक ने दुनियाभर में हर किसी के लिए अपना एक ओपनसोर्स भी जारी कर दिया है। अगर आपके पास कोई कंप्यूटर है, जिसमें अच्छा खासा जीपीयू लगा हुआ है, तो डीपसीक को आप अपने ही लैपटॉप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका इस्तेमाल करने के लिए न तो आपको डीपसीक के चैट सर्वर में जाना होगा और न ही आपको इंटरनेट की जरूरत होगी। इस सर्विस के लिए आपसे कोई शुल्क भी नहीं लिया जाएगा।

खास बात यह है कि चीन ने डीपसीक एआई के अल्गोरिदम को छुपाया नहीं है इसको ओपन सोर्स कर दिया है। इस कारण दुनियाभर में इस एआई टूल का कई तरह के पैरामीटर्स पर परिक्षण किया जा रहा है। कई विशेषज्ञों द्वारा यह कहा जा रहा है कि डीपसीक एआई कई एआई मॉडल्स की तुलना में बेहतर ढंग से काम करता है वो भी बिना ज्यादा महंगे जीपीयू और हार्डवेयर की जरूरत लिए।  

DeepSeek सिर्फ एक एआई टूल नहीं बल्कि यह भविष्य की झलक है, जहां शक्ति संतुलन मिसाइलों, एयरक्राफ्ट, बड़े-बड़े टैंकों में नहीं बल्कि अल्गोरिदम में छिपा होगा। अमेरिका और चीन के बीच चल रहा यह तकनीकी शीतयुद्ध अब एक रोमांचक मोड़ पर जाता हुआ दिख रहा है। 1957 में स्पूतनिक 1 के लॉन्च ने अमेरिका को एक होड़ में धकेला था, जिसके नतीजे में इंसान पहली बार चांद पर कदम रख पाया। 2025 में डीपसीक एआई ने अमेरिका के टेक साम्राज्य में हलचल पैदा की है। अब सवाल यह है कि इसका नतीजा क्या निकलेगा?

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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