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जीवन धारा: जिज्ञासा ही सबसे बड़ी ताकत

स्टीफन हॉकिंग Published by: Devesh Tripathi Updated Sat, 11 Jul 2026 07:01 AM IST

सार

जब तक इन्सान सवाल पूछना नहीं छोड़ेगा, तब तक वह आगे बढ़ता रहेगा। ब्रह्मांड का हर रहस्य हमें यही याद दिलाता है कि हमारी सबसे बड़ी ताकत उत्तरों में नहीं, बल्कि उन्हें खोजने की अटूट इच्छा में छिपी है।
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अंतरिक्ष - फोटो : अमर उजाला प्रिंट


मेरे लिए असली सवाल सिर्फ यह नहीं था कि ब्रह्मांड कैसे बना, बल्कि यह भी था कि क्या प्रकृति के नियम स्वयं उसकी उत्पत्ति की व्याख्या कर सकते हैं। वर्षों के शोध ने मुझे इस विश्वास तक पहुंचाया कि ब्रह्मांड को समझना कोई चमत्कार नहीं, बल्कि प्रकृति के नियमों को ही जानना है। इसी खोज ने मुझे एक और सवाल तक पहुंचाया कि क्या जीवन केवल पृथ्वी तक ही सीमित है? मेरा मानना है कि अगर सही परिस्थितियां मिलें, तो जीवन ब्रह्मांड के दूसरे कोनों में भी जन्म ले सकता है। आज हमारे पास इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है, पर विज्ञान की खूबसूरती यही है कि वह कल्पनाओं पर नहीं, सबूतों पर आगे बढ़ता है। इसलिए, मैं हर उत्तर से अधिक उस खोज को महत्व देता हूं, जो हमें नए प्रश्न पूछने का साहस देती है।


इन्सान ने विज्ञान व तकनीक के सहारे अद्भुत प्रगति तो की है, पर प्राकृतिक संसाधनों पर अभूतपूर्व दबाव भी डाला है। ऐसे में, मानव सभ्यता को लाखों वर्षों तक जीवित रखने के लिए केवल पृथ्वी पर निर्भर नहीं रहना होगा। हमें अंतरिक्ष की ओर भी बढ़ना होगा।


मेरी शारीरिक सीमाएं कभी मेरी कमजोरी नहीं बनीं। उन्होंने मुझे यह सिखाया कि मनुष्य का वास्तविक बल उसके शरीर में नहीं, उसकी जिज्ञासा और दृढ़ संकल्प में होता है। मैं मानता हूं कि जब तक इन्सान सवाल पूछना नहीं छोड़ेगा, तब तक वह आगे बढ़ता रहेगा। ब्रह्मांड का हर रहस्य हमें यही याद दिलाता है कि हमारी सबसे बड़ी ताकत उत्तरों में नहीं, बल्कि उन्हें खोजने की अटूट इच्छा में छिपी है।
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