पीडीएस प्रणाली पर राज्य में उठेे सवाल. (सांकेतिक तस्वीर)
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दूसरी ओर, राज्यपाल जगदीप धनखड़ इस मुद्दे पर सरकार पर लगातार हमले कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि राज्य में गरीबों को मुफ्त में चावल, दाल आदि देने के लिए केंद्र सरकार लगातार राशन भेज रही है।
सरकार को इस वस्तुओं की कालाबाजारी पर रोक लगा कर गरीबों तक राशन पहुंचाना चाहिए। धनखड़ ने अपने एक ट्वीट में कहा है कि पांच मई तक केंद्र ने बंगाल के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 9889 मिलियन टन मसूर दाल आवंटित किया है। इसमें से 6800 मिलियन टन पहले ही पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री को इस मामले में स्थिति साफ कर देनी चाहिए।
उनका कहना है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत गरीबों के लिए हर महीने पांच किलो चावल और पांच किलो दाल दिया जा रहा है। पीडीएस को दुरुस्त करना जरूरी है ताकि कालाबाजारियों तक राशन नहीं पहुंच सके।
माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती ने भी राशन वितरण में धांधली का आरोप लगाया है। वह कहते हैं कि गरीबों को पूरा राशन नहीं मिल रहा है। राज्य सरकार की कथनी और करनी में भारी अंतर है।
माकपा का आरोप है कि राशन के जरिए सत्तारुढ़ पार्टी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं को तो पूरा खाद्यान्न मिल रहा है। लेकिन बाकी लोगों को नहीं। पार्टी ने बढ़िया किस्म के खाद्यन्नों की बजाय राशन के जरिए खराब क्वालिटी की चीजों के वितरण का भी आरोप लगाया है।
दूसरी ओर, राज्य के गृह सचिव अलापन बनर्जी ने राशन वितरण में भ्रष्टाचार के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि लाकडाउन के दौरान बंगाल में 10 करोड़ लोगों को मुफ्त में राशन दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने लॉकडाउन के दौरान लगभग 10 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया है। डिजिटल राशन कार्डधारकों के अलावा इस प्रणाली से उन 61 लाख लोगों को भी लाभ मिला है जिनको कूपन दिए गए हैं।
इन आंकड़ों से साफ है कि पीडीएस में कोई अनियमितता नहीं है। उन्होंने कहा कि 359 राशन डीलरों पर कार्रवाई की गई है और 65 को निलंबित कर दिया गया है। गृह सचिव बताते हैं कि 25 डीलरों पर जुर्माना लगाया गया है और 50 से अधिक राशन डीलरों को गिरफ्तार किया गया है। लेकिन सरकार की लाख सफाई के बावजूद राज्य में कथित राशन घोटाले पर विवाद लगातार तेज होता जा रहा है।
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