चीन संपूर्ण तालाबंदी के कारण ही इस महामारी को नियंत्रित कर पाया है।
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आप जहां हैं वहीं रहें, यही समाज और राष्ट्र के लिए बेहतर है
इस भयानक महामारी से लड़ने में समाज और राष्ट्र के स्तर पर आपका सबसे बड़ा योगदान ये ही होगा कि आप जहांं हैं वहीं रहें, सुरक्षित रहें।
जिनको वेबसाइट, अखबार और टेलीविजन पर मौजूद तमाम सूचनाओं के बाद भी इस महामारी की गंभीरता समझ नहीं आ रही वो इस समय जर्मनी में मौजूद उस युवा का वीडियो ज़रूर देख लें जो हमें चेता रहा है। समझा रहा कि भारत में इसकी गंभीरता अधिक क्यों हैं।
तब भी नहीं समझ रहे तो उस चीनी पत्रकार का वीडियो ज़रूर देखें जो बता रहे हैं कि वो संपूर्ण तालाबंदी के कारण ही इस महामारी को नियंत्रित कर पाए हैं। वो साफ कह रहा है कि हमारी सख्ती को आप चाहे जिस रूप में देखें, उसकी आलोचना करें, हमें कोसें पर हमें ये करना पड़ा। क्योंकि इस बीमारी पर नियंत्रण का और कोई तरीका नहीं है। ये एक बहुत विचित्र परिस्थिति है। ये अभूतपूर्व है। इसलिए इससे निपटने के उपाय भी अभूतपूर्व ही होने चाहिए। बहुत अलग। बहुत सख्त।
तो चीन के इस अनुभव से ही सबक ले लें
चीन के लिए एक आसानी और थी। उन्हें इस बीमारी का केंद्र पता था। ये वुहान में शुरू हुआ। तो सबसे ज्यादा मेहनत वहीं करनी थी। वहांं से आगे बढ़ने से रोकना था। लेकिन इटली, स्पेन, अमेरिका या ब्रिटेन में ऐसा नहीं था। कोई एक केंद्र नहीं, इसीलिए स्थिति भयावह हो गई। भारत में तो ये 22 राज्यों के कई शहरों में पांंव पसार चुका है। कोई एक केंद्र नहीं।
हमारे सामाजिक ताने-बाने को देखते हुए हमारे यहांं स्थिति और भी गंभीर हो जाने की आशंकाएंं गलत नहीं हैं। बल्कि हम आंकड़े को तेजी से बढ़ता हुआ देख रहे हैं। पहले 50 संक्रमित मिलने में 40 दिन लगे थे। 200 से 250 तक पहुंंचने में केवल एक दिन। इसी से स्थिति की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। सो एक ही तरीका है। 22 मार्च का जनता कर्फ़्यू तो बस प्रतीक है। इसे गंभीरता से अपना कर ही हम इस बीमारी से लड़ सकते हैं।
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