उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर एकत्रित हुए लोगों को उनके गृह जिलों में पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों की व्यवस्था कराईं
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सरकारें अपनी ओर से कर रह हैं प्रयास
केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर लोगों को इस महामारी से बचाने के लिए पूरा प्रयास कर रही हैं। हर संभव उपाय कर रहे हैं। वही कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अनपढ़ गरीब लोगों के मन में कोरोना को लेकर डर का माहौल पैदा कर देश में कानून व्यवस्था की स्थिति को खराब करना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद बार-बार देश की जनता से मुखातिब होकर लगातार कह रहे हैं कि किसी को भी रहने, खाने, चिकित्सा सुविधाओं की कहीं कमी नहीं रहने दी जाएगी। जो लोग जहां हैं वहीॆ रहेॆ उनके स्थान पर ही उनकी समस्त आवश्यकताओं की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी सरकार की है। लेकिन अचानक ही दिल्ली में लाखों लोग यूपी बॉर्डर की तरफ निकल पड़ते हैं। कहा तो यहां तक भी जा रहा है कि डीटीसी की बसों में भी भर कर कर लोगों को यूपी बार्डर तक छोड़ा गया था। इससे उस क्षेत्र में भारी भीड़ हो जाने से सोशल डिस्टेंस मेंटेन का तो सवाल ही नहीं रहा।
प्रशासन के समक्ष कानून व्यवस्था बनाए रखने की भी बड़ी समस्या खड़ी हो गई। ऐसे में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तात्कालिक निर्णय लेते हुए उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर एकत्रित हुए लोगों को उनके गृह जिलों में पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों की व्यवस्था कराईं। हालांकि लोगों की संख्या को देखते हुए एक हजार बसों की संख्या पर्याप्त नहीं थी। फिर भी वहां से काफी लोगों को हटाया गया।
आज भी देश के अनेक भागों में लोग अपने परिवार सहित पांच - सात सौ किलोमीटर दूर अपने घरों के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं। जिनके पास न खाने का कोई साधन है ना ही परिवहन का कोई साधन है। ना ही रुपए पैसे हैं।
मजबूरी में लोगों ने गांव जाना ही उचित समझा
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मीडिया व सोशल मीडिया में लगातार ऐसी फोटो, वीडियो सामने आए जिसमें अपने छोटे-छोटे बच्चों को कंधों पर उठाकर लोग पैदल ही अपने गांव की तरफ लौटते नजर आए। अपने घरों की तरफ लौट रहे लोगों से कई जगह पत्रकारों ने बात की तो उनका कहना था कि हम जहां काम करते थे वहां भूखे मरने की नौबत भी आ गई थी। इसलिए हमने सोचा कि भूख से मरने से तो अच्छा है पैदल चलकर ही घर पहुंचें।
लाकडाउन के दौरान लोगों के पलायन के दौरान कई दर्दनाक तस्वीरें भी सामने आयी है। पलायन की आपाधापी में 67 लोगों का एक दल दिल्ली से उत्तर प्रदेश में अपने गांव श्रावस्ती जाने के लिए पैदल ही निकल पड़ता है। इस दल में औरत, बच्चे व मर्द शामिल हैं। दिल्ली में ये लोग एक ठेकेदार के पास काम करते थे।
लॉक डाउन की घोषणा सुनते ही ठेकेदार मजदूरों का पैसा ले कर भाग गया। इससे मजदूरों के पास न काम बचा न पैसा। मजबूरी में लोगों ने गांव जाना ही उचित समझा। इन लोगों में 80 साल के सालिगराम को लकवा था। जिससे वो चल नहीं सकता था।
इस कारण एक लकड़ी में चादर को झूले की तरह बांध कर उसमे सालिग राम को डाल कर लोगों ने उसे कंधों पर उठाकर पांच दिन में दिल्ली से लखनऊ तक पैदल लेकर आ गए। जब इन लोगों का दल लखनऊ पहुंचा तो वहां के शाहीद पथ पर आईपीएस नवनीत सिकेरा की नजर उन लोगों पर पड़ी। लोगों की हालत देखी तो उन्होने सबसे पहले इन सबको खाना खिलाया फिर रोड़वेज बसों का इंतजाम करवाकर उनको घर तक पहुंचाया।
केंद्र सरकार ने सभी जिलों की सीमा सील कराने के निर्देश दिए हैं
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देश में अचानक ही लोगों के अपने गांव की तरफ लौटने से मची अफरातफरी के मध्यनजर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तत्काल सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखकर कड़ाई बरतने का निर्देश देते हुए कहा है कि जो लोग जहां है उनको वही रोककर उनके खाने-पीने के समस्त व्यवस्था की जाए तथा उनका मेडिकल चेकअप करवाया जाए।
जो लोग घरों से निकल कर चल रहे हैं उनकी न तो कहीं कोई स्वास्थ्य की जांच की गई है ना ही किसी को यह पता है कि उनमें से कोई कोरोना से पीडि़त तो नहीं है। ऐसे में यदि ये लोग अपने घर पहुंच जाते हैं और वहां जाकर उनमें से कोई कोरोना पॉजीटिव निकल जाता है तो वह सबके लिए खतरा बन सकता है।
इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने सभी जिलों की सीमा सील कराने के निर्देश दिए हैं जो बहुत जरूरी भी है। यदि ऐसा नहीं होगा तो सरकार द्वारा की जा रही इतनी व्यवस्था, देश में किया जा रहा लाकडाउन निष्प्रभावी हो जाएगा और कोरोना जैसी महामारी से लड़ने में हम असफल हो जाएंगे। इसलिए सभी प्रदेशों की सरकारें व सभी जिला प्रशासन को तत्काल ही दिशा में कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
पुलिस प्रशासन के बल पर लाकडाउन का पालन करवाया जा रहा है
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देश के शहरी क्षेत्र में तो पुलिस प्रशासन के बल पर लाकडाउन का पालन करवाया जा रहा है। मगर ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लाकडाउन का पूर्णतया पालन नहीं हो पा रहा है। पुलिस और प्रशासन का पूरा ध्यान शहरों तक ही होने के कारण गांव में लोग आज भी धड़ल्ले से कहीं भी आ जा रहे हैं।
लोग अपनी मनमर्जी से दुकानें खोल रहे हैं व मनमर्जी से घूम रहे हैं। उनको नियंत्रण करने वाला कोई नहीं है। अन्य प्रांतों से पलायन कर जो लोग गांव में पहुंचे हैं उनकी अभी सही तरीके से मेडिकल जांच नहीं हो पा रही है। इससे गांव में कोरोना के संक्रमण का खतरा अधिक मंडरा है।
देश में कोरोना संक्रमण से पीडि़तो की संख्या हर घंटे बढ़ रही है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि गांव में भी लाकडाउन को प्रभावी ढंग से लागू करवाया जाए। गांवों में भी पुलिस की व्यवस्था करवाई जाए तथा बाहर से आने वाले लोगों का सही सर्वे करवाकर उनकी व्यवस्थित तरीके से चिकित्सकीय जांच करवाना बहुत जरूरी है। यदि ऐसा नहीं हो पाया तो कोरोना जैसी बड़ी बीमारी को रोक पाना मुश्किल हो जाएगा व देश के लोगों का जीवन सुरक्षित नहीं रह पाएगा।
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