मप्र में सरकार के नाम पर केवल सीएम शिवराज सिंह चौहान हैं।
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इधर काम नहीं होने से बेचैन हैं भाजपा के वरिष्ठ विधायक
भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा कमलनाथ सरकार के तख्ता पलट में महत्वपूर्ण किरदार थे, लेकिन भारी सक्रियता के बाद अचानक कोरोना का में कोई सक्रिय भूमिका न मिलने से बीते एक पखवाड़े से वे अपने घर में नाती पोतों के साथ खेलते, गायों की सेवा करते और वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए अपने विधानसभा क्षेत्र दतिया के हालचाल जानते हुए न्यूज चैनलों पर दिखाए जा रहे हैं।
नेता प्रतिपक्ष और मंत्री रहे गोपाल भार्गव भी यदा कदा टीवी चैनलों पर दिखते हैं। दूसरी तरफ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा अकेले ऐसे नेता हैँ जो शिवराज की ही तरह खबरों में दिख रहे हैँ। दूसरी तरफ एक महीने पहले तक बतौर मंत्री भारी सक्रिय रहे सिधिया समर्थक पूर्व मंत्री दल बदलकर विधायक भी नहीं रहे लेकिन अब वे भी सक्रियता से निष्क्रियता के इस दौर में परेशान हैं। यह बेचैनी यदा-कदा सोशल मीडिया या प्रादेशिक न्यूज चैनलों में उनकी सक्रियता में दिखती रहती है।
जमातियों की खोज खबर रखने में तंत्र फेल
दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके से मरकज की जमात से लौटे लोगाें में मप्र आए जमातियों की तादाद तो बताई जाती रही लेकिन वे कहां-कहां गए, यह एक हफ्ते बाद भी पूरी तरह पता नहीं है। कई जमाती छोटे छोटे कस्बों जिनमें तहसील मुख्यालय शामिल हैँ, पहुंचे थे और वे वहां मस्जिदों और घरों में भी रुके बताए गए हैं।
विदिशा जिले के सिरोंज में एक कोरोना पॉजिटव पाए जाने के बाद अब अन्य कस्बों में भी जमातियों के आने, रुकने और चले जाने की खबरों से लोगों में दहशत है। यह दहशत अब गांवों तक पहुंच रही है। लेकिन सरकारी तंत्र का इंटेलीजेंस फेल रहा है।
सीएम शिवराज सिंह चौहान हर चीज को स्वयं संभाल रहे हैं।
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विदेश यात्रा से लौटे लोगों की सूची होने के बाद भी ट्रैकिंग नहीं की
करीब एक पखवाड़े पहले इसकी सूची जारी होने के बावजूद विदेश यात्रा की हिस्ट्री वाले परिवारों की जांच नहीं की गई। अकेले भोपाल शहर में ऐसे लोगों की सूची 71 पेज की थी। इनमें अब कोरोना पाजिटिव पाई गई स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिवल पल्लवी जैन गोविल का पुत्र तथा स्वास्थ्य विभाग की अपर संचलक वीणा सिन्हा का पुत्र भी शामिल था। यह अफसर न केवल मुख्यमंत्री के साथ बल्कि स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अफसराें, डाक्टरों तथा अन्य स्टाफ के संपर्क में सतत बने रहे।
अब यह आशंका गहरा रही है कि अकेेले स्वास्थ्य महकमे के एक दर्जन अफसर आदि कोरोना पॉजिटव पाए जाने के बाद उनके संपर्क में रह चुके कितने लोगों को यह वायरस संक्रमण सामने आ सकता है? चौंकाने वाली बात यह भी है कि स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव ने खुद को किसी अस्पताल में इलाज के लिए ले जाने से साफ इंकार किया और उन्होंने घर पर ही इलाज के इंतजाम कराए और इस दौरान वे घर से ही मुख्यमंत्री के साथ वीडियों कांफ्रेंसिंग से समीक्षा में शामिल हो रही हैं, इसके लिए उनके बंगले पर अधिकारी कर्मचारी भी जाते रहे। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने उनकी तारीफ भी की।
खतरे की आशंका और लापरवाही जारी
अभी भी भोपाल के अलावा अन्य जिलों तक पहुंचे बीते तीन माह में अमेरिका, इटली, दुबई, ब्रिटेन आदि से यात्रा कर लौटे लोगों की न तो पहचान की कई है और न ही जांच, वह भी आधिकारिक सूची उपलब्ध होने के बावजूद। इनके संपर्क में रहे हजारों लोग अब खुद की सेहत को लेकर चिंतित हैं।
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