क्या कभी सोचा था कि इंसान को जिंदा रखने वाली प्राणवायु ऑक्सीजन की भी चोरी होगी और लोग इसकी भी खुलकर कालाबाजारी करने से बाज नहीं आएंगे? लोग खुद को जिंदा रखने के लिए दूसरों की सांसें इस बेशर्मी से छीन लेंगे? यह जानते हुए भी कि एक दिन उनकी सांसें भी छिन जाने वाली हैं।
अफसोस कि कोरोना वायरस ने हमें वो दिन भी दिखा दिया है। कल तक मध्य प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडरों की खबरें आ ही रही थीं, अब पुणे में ऑक्सीजन सिलेंडरों की चोरी के समाचार ने समाज के स्याह चेहरे को बेनकाब कर दिया है।
मध्य प्रदेश में तो तमाम सरकारी दावों और आश्वासनों के बावजूद ऑक्सीजन की कमी भी चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश हो रही है। अगर यह चल गया तो नतीजे किसकी राजनीतिक सांसें रोक लेंगे, यह सोचने की बात है। जैसे-जैसे कोविड 19 विकराल रूप लेता जा रहा है, मध्य प्रदेश सहित देशभर में अस्पताल कम पड़ते जा रहे हैं।
कोरोना मरीजों के लिए चिकित्सालयों में बिस्तरों का टोटा पड़ रहा है। आईसीयू की हालत खचाखच भरे ट्रेन की जनरल बोगी से भी बदतर होती जा रही है। कई अस्पतालों में तो स्थानाभाव के कारण गेट के बाहर और गार्डन तक में मरीजों को रखने की नौबत आ गई है, क्योंकि जितने संसाधन थे, वो सब नाकाफी साबित हो रहे हैं। ऐसे में कोढ़ में खाज की मानिंद उन ऑक्सीजन गैस सिलेंडरों का टोटा पड़ गया है, जो कोरोना मरीज के जीवित रहने का अंतिम भरोसा है। क्योंकि कोरोना वायरस सीधे फेंफड़ों पर हमला कर उन्हें बेकाम कर देता है।
परिणामस्वरूप मरीज को सांस लेना दूभर होने लगता है और एक सीमा के बाद सांसों की ये डोर टूट जाती है। ऐसे में अस्पतालों में रोगी को कृत्रिम ऑक्सीजन देकर जिंदा रखने की हर संभव कोशिश की जाती है। लेकिन 'आपदा में अवसर' बूझने वालों से सांसों की कालाबाजारी शुरू कर दी है। देश में ऑक्सीजन संकट के लक्षण तो जुलाई से दिखने लगे थे, जब कई 'चतुर' लोगों ने कोरोना सितंबर में चरम पर आने की सूचनाओं के साथ ही ऑक्सीजन गैस सिलेंडरों की जमाखोरी शुरू कर दी थी।
हैदराबाद में एक शख्स को इसी मामले में गिरफ्तार भी किया गया था। कुछ और स्थानों से भी इस तरह की सूचनाएं मिल रही थीं, लेकिन तब इसे बहुत गंभीरता से नहीं लिया गया, उतना भी नहीं, जितना कि रसोई गैस सिलेंडरों की चोरी या कालाबाजारी को लिया जाता है। इसके पहले हमें ऑक्सीजन चोरी जैसी घटनाएं एवरेस्ट चढ़ने वाले पर्वतारोहियों से सुनने को मिलती थीं।
तीन साल पहले हिमालय चढ़ने वाले विदेशी पर्वतारोहियों और शेरपाओं ने शिकायत की थी कि उनके हाई कैंप से ऑक्सीजन बॉटल्स की चोरी की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। मानोंं अब यही ट्रेंड बड़े पैमाने पर मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडरों की चोरी के रूप में सामने आ रहा है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र में पुणे के पास पिंपरी चिंचवड में 20 ऑक्सीजन सिलेंडरों से भरा एक टेम्पो ही चुरा लिया गया। पुलिस को संदेह है कि ये ऑक्सीजन सिलेंडर दूसरे अस्पतालों को ऊंचे दाम में बेचने के लिए चुराए गए हैं। इससे भी ज्यादा चिंताजनक ट्रेंड निजी तौर पर ऑक्सीजन गैस सिलेंडरों की जमाखोरी का है। बताया जाता है कि कोरोना होने पर ऑक्सीजन न मिलने की आशंका के चलते लोग अपने घरों में ही ऑक्सीजन गैस सिलेंडरों का स्टॉक कर रहे हैं, गोया वह कुकिंग गैस हो।