भाजपा का आरोप है कि टीएमसी कोरोना के मामले छिपा रही है।
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दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी राज्यपाल का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधती रही हैं। राज्यपाल ने तो लॉकडाउन को लागू करने के लिए बंगाल में केंद्रीय बलों की तैनाती का सुझाव तक दे दिया है। लेकिन ममता का कहना है कि संकट के मौजूदा दौर में राजनीति से परहेज करना चाहिए।
राज्यपाल ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल सरकार पर आरोप लगाया कि वह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने और धार्मिक कार्यक्रमों पर रोक लगाने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस व प्रशासन के जो अधिकारी प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए। राज्यपाल ने यह भी मांग की कि राज्य में लॉकडाउन लागू कराने के लिए केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों को तैनात करने की जरूरत पर विचार होना चाहिए।
दूसरी ओर, पुलिस ने भाजपा सांसद सुभाष नस्कर के खिलाफ कोरोना से मरने वालो के अंतिम संस्कार के बारे में सोशल मीडिया पर अफवाह पैलाने के आरोप में एक मामला दर्ज किया है। भाजपा सांसद के खिलाफ पुलिस की यह कार्रवाई मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की 15 अप्रैल की उस चेतावनी के बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोविड-19 को लेकर गलत सूचना फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कर्रवाई की जाएगी।
पार्टी के एक अन्य सांसद जॉन बारला ने अमित शाह को 15 अप्रैल को भेजे एक पत्र में आरोप लगाया है कि उनके घर के बाहर 40 पुलिसवाले तैनात हैं ताकि वह घर से बाहर नहीं निकल सकें। बारला का कहना है कि जिला प्रशासन तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं को तो राहत सामग्री बांटने में सुविधा प्रदान कर रहा है। लेकिन उनके बाहर निकलने पर राहत सामग्री जब्त कर ली गई और घऱ लौटा दिया गया।
भाजपा का प्रदेश नेतृत्व भी कई बार आरोप लगा चुका है कि कई इलाकों में लॉकडाउन का सरेआम उल्लंघन हो रहा है। पार्टी के एक प्रतिनिधमंडल ने बीते सप्ताह राज्भवन में राज्यपाल से मुलाकात कर उनको भी यह शिकायत की थी। पार्टी के नेताओं ने राज्य सरकार पर कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा चिपाने का भी आरोप लगाया है।
प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने आरोप लगाया है कि सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस के नेता मनमाने तरीके से राहत सामग्री बांट रहे हैं। लेकिन भाजपा के सांसदों और नेताओं को सोशल डिस्टेंसिंग के नाम पर ऐसा करने से रोका जा रहा है।
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